Uttarakhand News: किसी भी राष्ट्र की प्रगति की वास्तविक रूपरेखा केवल उसकी आर्थिक नीतियों या विशाल औद्योगिक परियोजनाओं से तय नहीं होती, बल्कि उसकी आधारशिला उन कक्षाओं में रखी जाती है जहां देश की नई पीढ़ी अपने सपनों को आकार देती है। जब युवा मन राष्ट्र के वर्तमान, अतीत की उपलब्धियों और आने वाले कल की संभावनाओं पर सोचना शुरू करता है, तब प्रगति केवल एक सरकारी नारा न रहकर एक जीवंत जन-अभियान में तब्दील हो जाती है। इसी व्यापक सोच को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से उत्तराखंड के विद्यालयी एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत एक विशेष रचनात्मक श्रृंखला का आयोजन किया जा रहा है। 26 सितम्बर से प्रारंभ होने वाली ‘मेरे सपनों का भारत’ शीर्षक प्रतियोगिता को लेकर राज्य भर के शिक्षण संस्थानों में सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

इस भव्य आयोजन की पूर्व तैयारियों को पुख्ता करने के लिए विकास भवन सभागार में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह सहित शिक्षा, युवा कल्याण और विकास प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। समीक्षा के दौरान शिक्षा मंत्री ने विद्यालयी और उच्च शिक्षा स्तर पर अब तक किए गए प्रबंधों का बिंदुवार ब्योरा लिया और स्पष्ट निर्देश दिए कि यह आयोजन केवल एक औपचारिक प्रतियोगिता बनकर न रह जाए, बल्कि इसे छात्र चेतना के एक व्यापक जागरण पर्व के रूप में विकसित किया जाए।

आयोजन की रूपरेखा पर नजर डालें तो इस अभियान को त्रि-स्तरीय संरचना में बांटा गया है। मुख्य विषय ‘मेरे सपनों का भारत’ के अंतर्गत दो प्रमुख उप-विषय तय किए गए हैं, जिनमें ‘विकसित भारत के संकल्प’ और ‘बीते 25 वर्षों के कार्य एवं उपलब्धियां’ शामिल हैं। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के विद्यालयों में छात्र-छात्राएं निबंध लेखन, भाषण तथा चित्रकला प्रतियोगिताओं के जरिए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। शिक्षा मंत्री का स्पष्ट मानना है कि निबंध लेखन से जहां बच्चों में तार्किक सोच और विश्लेषण की क्षमता विकसित होती है, वहीं भाषण कला उनके भीतर नेतृत्व के गुण और सार्वजनिक अभिव्यक्ति का आत्मविश्वास भरती है। इसी प्रकार चित्रकला बच्चों के अंतर्मन में पल रही उस भारत की तस्वीर को रंगों के माध्यम से कैनवास पर उतारने का अवसर देती है, जैसा देश वे भविष्य में देखना चाहते हैं।
प्रतियोगिता का आरंभ 26 सितम्बर को प्रत्येक विद्यालय स्तर पर होगा। हर विद्यालय के शिक्षक अपने-अपने स्तर पर इन विधाओं में श्रेष्ठ प्रतिभाओं का चयन करेंगे। इसके उपरांत चयनित विद्यार्थियों को विकासखंड और जनपद स्तर पर आयोजित होने वाले केंद्रीय सम्मान समारोह में अपनी कला प्रस्तुत करने का मौका मिलेगा। जनपद स्तरीय समारोह में न केवल प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा, बल्कि विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए उत्कृष्ट चित्रों और उनके वैचारिक आलेखों की एक भव्य सार्वजनिक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य आम जनमानस, अभिभावकों और नीति-निर्माताओं को यह दिखाना है कि आज का छात्र अपने परिवेश और राष्ट्र की प्राथमिकताओं को किस संवेदनशीलता से देखता है।
विद्यालयों से आगे बढ़कर इस अभियान की जड़ें उच्च शिक्षण संस्थानों तक भी गहराई से पहुंचाई जा रही हैं। महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत युवाओं के लिए विधाओं का दायरा और अधिक विचारशील रखा गया है। उच्च शिक्षा स्तर पर संवाद, दृश्य कला और कहानी लेखन प्रतियोगिताओं की योजना बनाई गई है। डॉ. धन सिंह रावत ने बैठक में विशेष रूप से रेखांकित किया कि युवावस्था वह कालखंड है जब विचार परिपक्व हो रहे होते हैं। संवाद सत्रों के माध्यम से छात्र एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझ सकेंगे, समाज की ज्वलंत समस्याओं के समाधान खोजेंगे और शासन-प्रशासन के समक्ष यह सुझाव रख सकेंगे कि आने वाले दशकों में नीतिगत सुधार किस दिशा में होने चाहिए। कहानी लेखन के माध्यम से युवा समाज के वंचित वर्गों की आकांक्षाओं और तकनीकी भारत के समन्वय को साहित्यिक रूप दे सकेंगे।
समीक्षा बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सूचनाओं का प्रवाह प्रत्येक दूरस्थ गांव के स्कूल तक समयबद्ध रूप से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्सर यह देखने में आता है कि सूचनाओं के विलंब से पहुंचने के कारण पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों के प्रतिभावान बच्चे मुख्यधारा के आयोजनों से वंचित रह जाते हैं। इस बार ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। प्रत्येक खंड शिक्षा अधिकारी और प्रधानाचार्य को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करना होगा कि हर छात्र को नियमों, समय-सारणी और विषयों की स्पष्ट जानकारी समय से मिले। उन्होंने निर्देश दिए कि विद्यालयों में ऐसा वातावरण बनाया जाए जिससे बच्चे बिना किसी झिझक के अपनी मौलिक कल्पनाओं को सामने ला सकें।

प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी संभाल रहे मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बैठक में प्रस्तुत कार्ययोजना की जानकारी देते हुए बताया कि जिला स्तर पर सभी विभागों के साथ सामंजस्य स्थापित कर लिया गया है। उन्होंने शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि जनपद स्तर के मुख्य आयोजन के लिए प्रविष्टियों के संकलन, मूल्यांकन और विजेताओं की सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। इसके लिए वरिष्ठ साहित्यकारों, कला विशेषज्ञों और प्रबुद्ध नागरिकों की निर्णायक समितियां गठित की जा रही हैं, ताकि बच्चों की वास्तविक प्रतिभा का सही मूल्यांकन हो सके।
यह पूरा आयोजन केवल पुरस्कार वितरण का माध्यम नहीं है, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक और सामाजिक निवेश है। जब एक छात्र 25 वर्षों के कार्यों और उपलब्धियों का अध्ययन करता है, तो वह देश की उन ऐतिहासिक सफलताओं से परिचित होता है जिन्होंने भारत को अंतरिक्ष से लेकर डिजिटल तकनीक और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया है। इसके साथ ही जब वह ‘विकसित भारत’ की संकल्पना पर अपनी कलम चलाता है, तो उसके भीतर यह भाव स्वतः जाग्रत होता है कि आने वाले कल का निर्माण किसी और को नहीं, बल्कि उसी को अपने ज्ञान, परिश्रम और ईमानदारी से करना है।

26 सितम्बर से शुरू होने वाला यह पखवाड़ा उत्तराखंड के शैक्षणिक परिसरों में एक नई ऊर्जा का संचार करेगा। शिक्षा मंत्री की इस सघन समीक्षा और प्रशासनिक मशीनरी की सक्रियता से यह तय हो गया है कि ‘मेरे सपनों का भारत’ अभियान राज्य के हजारों नौनिहालों और युवाओं को अपनी राष्ट्रीय आकांक्षाओं को मुखर करने का एक सार्थक, सशक्त और प्रेरक मंच प्रदान करने जा रहा है।
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