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CM Dhami News: जनसमस्याओं का त्वरित और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें – मुख्यमंत्री

On: September 22, 2026 8:23 AM
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CM Dhami News: जनसमस्याओं का त्वरित और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें - मुख्यमंत्री
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CM Dhami News: लोकतंत्र की सार्थकता किसी भव्य इमारत अथवा सत्ता के औपचारिक तंत्र में नहीं, बल्कि इस बात में निहित होती है कि शासन का अंतिम व्यक्ति अपनी पीड़ा और अपेक्षा के साथ सत्ता के शीर्ष तक कितनी सहजता से पहुंच पाता है। जब राज्य का मुखिया स्वयं अपने आवास और कार्यालय के द्वार आम नागरिकों के लिए खोलकर बैठता है, तब शासन और जनता के बीच की पारंपरिक दूरी समाप्त होने लगती है।

देहरादून स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय का मुख्य सेवक सदन इसी मानवीय सेतु का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है। सोमवार का दिन यहां केवल एक नियमित शासकीय कार्यदिवस नहीं था, बल्कि प्रदेश के सुदूर पर्वतीय अंचलों, घाटियों, तराई के मैदानों और ग्रामीण बस्तियों से आए नागरिकों के विश्वास और आशा की परीक्षा का दिन था।

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Photo- CM Dhami hears peoples problems Mdano news

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जब मुख्य सेवक सदन में उपस्थित जनसमूह के बीच पहुंचे, तो वातावरण में एक स्वाभाविक आत्मीयता देखने को मिली। दूरदराज के सीमांत क्षेत्रों से अपने जीवन की जटिलताओं को लेकर पहुंचे वृद्ध, महिलाएं, युवा और सामान्य नागरिक इस आस में बैठे थे कि उनकी आवाज सुनी जाएगी। लोकतंत्र में जब जनता को यह अहसास होता है कि उसकी बात को केवल सुना ही नहीं जा रहा, बल्कि उस पर तत्काल ध्यान भी दिया जा रहा है, तो प्रशासनिक तंत्र के प्रति जनविश्वास कई गुना बढ़ जाता है। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक नागरिक के पास पहुंचकर अथवा उन्हें अपने समीप बैठाकर उनकी बातों को पूरे धैर्य और संवेदनशीलता के साथ सुना। यह दृश्य यह स्पष्ट करता है कि सुशासन का अर्थ केवल फाइलों का आगे बढ़ना नहीं, बल्कि पीड़ित व्यक्ति के चेहरे पर संतोष और राहत के भाव लाना है।

जनसमस्याओं की बहुआयामी प्रकृति और पर्वतीय जीवन की चुनौतियां मुख्य सेवक सदन में प्रस्तुत किए गए प्रकरणों का दायरा अत्यंत विस्तृत और विविधतापूर्ण था। उत्तराखंड का भौगोलिक स्वरूप ऐसा है जहां प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ दैनिक जीवन की चुनौतियां भी सामान्य राज्यों की तुलना में अधिक जटिल होती हैं। यही कारण था कि जनसुनवाई के दौरान सड़क, पेयजल, विद्युत, स्वास्थ्य, शिक्षा, राजस्व, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, रोजगार और आपदा अथवा गंभीर बीमारियों से जुड़ी आर्थिक सहायता के अनगिनत मामले सामने आए। कहीं किसी सुदूरवर्ती गांव में संपर्क मार्ग के क्षतिग्रस्त होने से रोजमर्रा की आवाजाही ठप थी, तो कहीं किसी पर्वतीय बस्ती में पेयजल स्रोत सूखने अथवा पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से माताओं-बहनों को मीलों पैदल चलना पड़ रहा था। राजस्व और भूमि संबंधी विवादों में उलझे साधारण किसानों की चिंताएं भी इस जनसुनवाई में प्रमुखता से उभरीं। कई स्थानों पर तकनीकी अड़चनों अथवा स्थानीय स्तर पर समन्वय के अभाव के कारण पेंशन और कल्याणकारी योजनाओं की राशि पात्र लाभार्थियों तक समय से नहीं पहुंच पा रही थी। इसके अतिरिक्त, गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों ने मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता की गुहार लगाई।

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Photo- CM Dhami hears peoples problems Mdano news

इन तमाम प्रकरणों को सुनते हुए मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण केवल एक प्रशासक का नहीं, बल्कि परिवार के एक मुखिया जैसा दिखाई दिया। उन्होंने समस्याओं की तह में जाकर यह समझने का प्रयास किया कि कोई विषय वर्षों तक क्यों उलझा रह जाता है और कैसे सामान्य नागरिक को कार्यालयों की जटिल प्रक्रियाओं से मुक्त किया जा सकता है। प्रशासनिक विकेंद्रीकरण और जवाबदेही का सख्त संदेश इस जनसंवाद का सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक पहलू वह कड़ा प्रशासनिक संदेश था जो मुख्यमंत्री ने शासन-प्रशासन के सभी स्तरों को दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जिन समस्याओं का समाधान ग्राम पंचायत, तहसील, ब्लॉक अथवा जिला और विभागीय स्तर पर संभव है, उनका अनावश्यक रूप से शासन स्तर पर लंबित रहना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। यह टिप्पणी उत्तराखंड की पूरी प्रशासनिक कार्यसंस्कृति पर एक गंभीर और विचारणीय प्रकाश डालती है। अक्सर यह देखा जाता है कि स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की उदासीनता, शिथिलता अथवा निर्णय लेने के साहस की कमी के कारण एक साधारण व्यक्ति को अपनी छोटी-छोटी शिकायतों को लेकर राजधानी देहरादून की ओर दौड़ना पड़ता है।

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Photo- CM Dhami hears peoples problems Mdano news

मुख्यमंत्री का यह स्पष्ट निर्देश कि अधिकारी अपने-अपने स्तर पर जनसमस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करें, प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने रेखांकित किया कि लोकतंत्र में पद और दायित्व केवल विशेषाधिकार नहीं होते, बल्कि वे जनता के प्रति सेवा की शपथ होते हैं। जब कोई प्रकरण जिला स्तर पर लटका रहता है, तो इससे न केवल उस नागरिक का समय, ऊर्जा और धन व्यर्थ होता है, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि शिकायतों के समाधान में हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी और प्रत्येक अधिकारी को अपने कार्यक्षेत्र में रहकर ही जनता के प्रति पूरी तरह उत्तरदायी बनना होगा। कागजी औपचारिकताओं से परे वास्तविक राहत की अनिवार्यता अक्सर प्रशासनिक हलकों में यह एक सामान्य बीमारी मानी जाती है कि किसी शिकायत पर केवल पत्राचार करके या फाइल पर कोई तकनीकी टिप्पणी दर्ज करके उसे निस्तारित मान लिया जाता है।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रवृत्ति पर सीधा और कड़ा प्रहार किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसुनवाई अथवा किसी भी अन्य माध्यम से प्राप्त होने वाली शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शासन की मंशा तब तक पूरी नहीं मानी जा सकती जब तक कि शिकायतकर्ता को धरातल पर वास्तविक और ठोस राहत महसूस न हो। इसके लिए उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक विभाग और जनपद में शिकायतों के निस्तारण की नियमित और निष्पक्ष मॉनिटरिंग की जाए। जब तक संबंधित नागरिक स्वयं इस बात की पुष्टि न करे कि उसकी समस्या का समाधान हो चुका है, तब तक उस फाइल को बंद न समझा जाए। संवेदनशीलता और जवाबदेही के इस संतुलन को उन्होंने राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताया। इस निर्देश ने यह तय कर दिया कि आधुनिक उत्तराखंड में लोकसेवा की कसौटी केवल दफ्तरों में भरे जाने वाले रजिस्टर नहीं, बल्कि गांव के अंतिम व्यक्ति के जीवन में आने वाला वास्तविक बदलाव है।

तकनीक और जनता के बीच सीधा संपर्क: सीएम हेल्पलाइन और द्वार-द्वार पहुंचता शासन उत्तराखंड सरकार ने सुशासन के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तकनीक और प्रत्यक्ष संपर्क दोनों का संतुलित उपयोग किया है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विशेष रूप से सीएम हेल्पलाइन उन्नीस सौ पांच की उपयोगिता और भूमिका का उल्लेख किया। यह हेल्पलाइन आज राज्य के दुर्गम से दुर्गम कोने में रहने वाले नागरिक के लिए एक सशक्त हथियार बन चुकी है, जिसके माध्यम से वह बिना किसी दलाल या बिचौलिये के सीधे सरकार तक अपनी व्यथा पहुंचा सकता है। किंतु तकनीक केवल एक माध्यम है; सरकार का उद्देश्य व्यवस्था को और अधिक जीवंत बनाना है। इसी विचार से प्रेरित होकर सरकार द्वारा जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार जैसी अभिनव पहल को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा रहा है।

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Photo- CM Dhami hears peoples problems Mdano news

इस कार्यक्रम का मूल दर्शन यह है कि जनता को सरकार के पास आने के लिए विवश न होना पड़े, बल्कि शासन-प्रशासन स्वयं चलकर जनता की चौखट तक पहुंचे। पूर्व में आयोजित शिविरों के माध्यम से यह सिद्ध हो चुका है कि जब जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी और समस्त विभागीय अधिकारी एक ही छत के नीचे गांव में बैठते हैं, तो वर्षों से अटके पड़े मामले कुछ ही घंटों में सुलझ जाते हैं। चाहे वह प्रमाण पत्रों का निर्गमन हो, भूमि के अभिलेखों की त्रुटि सुधारना हो, या फिर विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का तत्काल पंजीकरण, यह व्यवस्था आम जनता के लिए वरदान साबित हो रही है। सेवा संकल्प अभियान: जनभागीदारी, संवाद और नवाचार का जनआंदोलन वर्तमान समय में उत्तराखंड में चल रहा सेवा संकल्प अभियान इसी जनहितैषी दृष्टि का व्यापक और संगठित विस्तार है। सत्रह सितम्बर से प्रारंभ हुआ यह अभियान सत्रह अक्टूबर दो हजार छब्बीस तक पूरे राज्य में एक विशेष ऊर्जा के साथ संचालित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल कुछ औपचारिक कार्यक्रमों का आयोजन करना नहीं है, बल्कि समाज के भीतर सेवा, जनभागीदारी, सतत संवाद और नवाचार की भावना को गहराई से स्थापित करना है। इस अभियान के अंतर्गत संचालित होने वाला सेवा सेतु अभियान शासन और समाज के बीच के सभी अवरोधों को समाप्त करने का माध्यम बन रहा है। जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार के शिविरों के साथ-साथ इस अभियान में स्वास्थ्य और बहुउद्देशीय शिविरों को भी विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और विशेषज्ञों की जांच एक संवेदनशील विषय रही है। इन शिविरों के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार की तमाम महत्वाकांक्षी योजनाओं, जैसे आयुष्मान भारत, जन आरोग्य योजना, उज्ज्वला, मातृ वंदना, स्वरोजगार और कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रमों की जानकारी और लाभ सीधे आमजन तक पहुंचाया जा रहा है। जब स्वास्थ्य जांच, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, कृषि परामर्श और बैंकिंग सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो जाती हैं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को एक नई शक्ति मिलती है।

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खेल प्रतिभाओं का वैश्विक उत्थान: देवभूमि के युवाओं का गौरवशाली पराक्रम मुख्य सेवक सदन में जनसमस्याओं के गंभीर विमर्श के बीच एक अत्यंत प्रेरक और उल्लासपूर्ण क्षण तब आया जब अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में देश और प्रदेश का नाम रोशन करने वाले युवा खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री से भेंट की। थाईलैंड के पटाया, चोनबुरी में इकतीस जुलाई से दो अगस्त दो हजार छब्बीस तक आयोजित नौवीं हीरोज अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप में उत्तराखंड के प्रतिभावान खिलाड़ियों ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए पदकों की झड़ी लगाई। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने एक बार फिर साबित कर दिया कि देवभूमि की मिट्टी में अदम्य साहस, अनुशासन और वैश्विक स्तर पर चमकने का सामर्थ्य कूट-कूट कर भरा है। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्तराखंड के मन्नू सोनकर, शिवानी दाबसा, मोहम्मद जकी और मुकुल ने स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रध्वज को सर्वोच्च सम्मान दिलाया, जबकि मेघा शर्मा और धनंजय धारीवाल ने कठिन प्रतिस्पर्धा के बीच कांस्य पदक प्राप्त कर अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन सभी पदक विजेता खिलाड़ियों से व्यक्तिगत रूप से बात की, उनके अनुभव सुने और उनके इस कठिन परिश्रम की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि यह केवल पदकों की विजय नहीं है, बल्कि यह उन तमाम कठिनाइयों और संसाधनों की कमी पर दृढ़ संकल्प की विजय है जिससे होकर एक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचता है। मुख्यमंत्री ने सभी खिलाड़ियों को उनके उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद देते हुए आश्वस्त किया कि राज्य सरकार खेल और युवा प्रतिभाओं को हर संभव मंच, आधुनिक संसाधन और वित्तीय संबल प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। संवेदनशील नेतृत्व और विकसित उत्तराखंड का मार्ग मुख्य सेवक सदन में घटित यह पूरा घटनाक्रम उत्तराखंड के वर्तमान और भविष्य की एक स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। एक ओर जहां प्रशासनिक व्यवस्था को कड़े अनुशासन, जवाबदेही और मानवीय संवेदना के सांचे में ढालने का प्रयास हो रहा है, वहीं दूसरी ओर राज्य के युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देकर उन्हें वैश्विक फलक पर स्थापित करने की दूरगामी सोच दिखाई देती है।

जनसमस्याओं का त्वरित और समयबद्ध समाधान केवल एक प्रशासनिक निर्देश नहीं है, बल्कि यह राज्य के प्रत्येक नागरिक के स्वाभिमान और उसके अधिकारों की सुरक्षा का संकल्प है। जब शासन के केंद्र में जनता की पीड़ा होती है और सरकार का हर तंत्र समाधानोन्मुखी होकर काम करता है, तो विकास केवल आंकड़ों में नहीं बल्कि लोगों के जीवन स्तर में झलकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह स्पष्ट संदेश कि आमजन को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिले और उनके दरवाजे पर न्याय पहुंचे, उत्तराखंड को एक आत्मनिर्भर, पारदर्शी और जनोन्मुखी राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध हो रहा है। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जनसेवा का जो दीप प्रज्वलित हुआ है और खेल के मैदान में युवा प्रतिभाओं ने जो परचम लहराया है, वह मिलकर देवभूमि को एक सशक्त, समृद्ध और गरिमामय भविष्य की ओर अग्रसर कर रहे हैं।

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