UttaraKhand News In Hindi:उत्तराखंड को स्वच्छता के मानक पर देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 की विस्तृत समीक्षा करते हुए, मुख्य सचिव ने प्रदेश के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) का एक पूर्ण तंत्र यानी ‘कंप्लीट मैकेनिज्म’ विकसित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
यह समीक्षा बैठक केवल सरकारी औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें चारधाम यात्रा, जल पुनर्चक्रण (Water Recycling) और अत्याधुनिक तकनीकी निगरानी जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर ठोस रणनीति तैयार की गई।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन: ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की ओर कदम
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि केवल कूड़ा इकट्ठा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके निस्तारण के लिए एक वैज्ञानिक और प्रभावी कार्ययोजना की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रदेश के भीतर जितने भी कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट्स (CBG) और वेस्ट टू एनर्जी प्लांट्स (WTE) निर्माणाधीन हैं, उन्हें युद्ध स्तर पर पूरा कर संचालित किया जाए।
इन प्लांट्स के माध्यम से कचरे से ऊर्जा और जैविक खाद बनाई जाएगी, जिससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और राजस्व के अवसर भी पैदा होंगे।
चारधाम यात्रा मार्गों पर स्वच्छता पर विशेष बल
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और पहचान का आधार ‘चारधाम यात्रा’ है। यात्रा सीजन के दौरान लाखों की संख्या में उमड़ने वाले श्रद्धालुओं के कारण अपशिष्ट प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन जाता है। मुख्य सचिव ने इसे प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिए कि:
- अतिरिक्त फंड की व्यवस्था: चारधाम यात्रा मार्गों और जनपदों के प्रवेश द्वारों पर कचरा प्रबंधन के लिए विशेष फंड आवंटित किया जाए।
- जिलाधिकारियों की जवाबदेही: संबंधित जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि धामों के आसपास और संवेदनशील मार्गों पर स्वच्छता सुनिश्चित की जाए।
- प्रवेश द्वारों का सौंदर्यीकरण: राज्य में प्रवेश करते ही पर्यटकों को स्वच्छता का अनुभव हो, इसके लिए प्रवेश मार्गों पर विशेष निस्तारण इकाइयां स्थापित की जाएंगी।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP): जल संरक्षण का नया मॉडल
बैठक का एक सबसे महत्वपूर्ण बिंदु उपचारित जल (Treated Water) का पुन: उपयोग रहा। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश में जहाँ भी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट कार्यरत हैं, उनसे निकलने वाले पानी का 100% उपयोग ग़ैर-पेयजल कार्यों (जैसे बागवानी, निर्माण कार्य, सड़कों की धुलाई और औद्योगिक उपयोग) में किया जाए।
यह कदम उत्तराखंड जैसे पहाड़ी और जल-संवेदनशील राज्य के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इससे पेयजल के स्रोतों पर दबाव कम होगा और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
तकनीक से होगी निगरानी: व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTS)
स्वच्छता अभियान में पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए मुख्य सचिव ने तकनीक के उपयोग पर जोर दिया है। उन्होंने निर्देश दिए कि कूड़ा उठाने वाले वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTS) जल्द से जल्द लागू किया जाए।
- डोर टू डोर निगरानी: इस सिस्टम से यह सुनिश्चित हो सकेगा कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ियाँ हर घर तक पहुँच रही हैं या नहीं।
- रूट ऑप्टिमाइजेशन: कचरा संग्रहण के मार्गों को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जाएगा, जिससे ईंधन की बचत और समय की पाबंदी सुनिश्चित होगी।
उत्तराखंड सरकार ‘स्वच्छ भारत मिशन 2.0’ को महज एक अभियान नहीं
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन का यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि उत्तराखंड सरकार ‘स्वच्छ भारत मिशन 2.0’ को महज एक अभियान नहीं, बल्कि एक स्थायी व्यवस्था के रूप में देख रही है। ‘कंप्लीट मैकेनिज्म’, अतिरिक्त फंड का प्रावधान, और सीवेज वाटर का 100% उपयोग जैसे निर्देश यह सुनिश्चित करेंगे कि आने वाले समय में देवभूमि न केवल आध्यात्मिक रूप से बल्कि पर्यावरणीय रूप से भी शुद्ध और स्वच्छ बनी रहे।










