Uttarakhand News: देहरादून स्थित डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ग्राउंड, ओएनजीसी में आयोजित ‘ड्रग फ्री उत्तराखण्ड वॉकथॉन’ को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ओएनजीसी ऑफिसर्स एसोसिएशन द्वारा संचालित इस विशेष आयोजन में सैकड़ों युवाओं, अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को नशामुक्त उत्तराखंड की शपथ दिलाई और स्पष्ट किया कि यह आयोजन केवल एक दिन का औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि देवभूमि को मादक पदार्थों के चंगुल से मुक्त कराने का एक सतत और व्यापक सामाजिक अभियान है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजनों का सीधा असर समाज की सोच पर पड़ता है। जब सैकड़ों लोग एक साथ सड़कों पर उतरकर किसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ एकजुट होते हैं, तो उससे न केवल जनचेतना जागृत होती है बल्कि भटके हुए युवाओं को भी एक सकारात्मक दिशा मिलती है। उन्होंने इस अभियान को धरातल पर उतारने के लिए ओएनजीसी ऑफिसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों, आयोजकों तथा विशेष रूप से श्री देवेंद्र सिंह बिष्ट के प्रयासों की सराहना की। युवाओं की ऊर्जा और नशे का सामाजिक प्रभाव मुख्यमंत्री ने युवाओं की भूमिका पर विशेष बल देते हुए कहा कि जिस हाथ में किताबें होनी चाहिए, जिसे खेल के मैदान में अपना हुनर दिखाना चाहिए और अपनी कड़ी मेहनत से अपने परिवार और प्रदेश का नाम रोशन करना चाहिए, यदि वह नशे की गिरफ्त में फंस जाता है तो यह केवल उस व्यक्ति की व्यक्तिगत क्षति नहीं होती।

यह पूरे परिवार के सपनों को तोड़ देता है और समाज की नींव को कमजोर करता है। युवा किसी भी राज्य और देश की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं, इसलिए उनकी ऊर्जा, रचनात्मकता और प्रतिभा को सुरक्षित रखना पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नशा व्यक्ति के सोचने-समझने की क्षमता, आत्मविश्वास और भविष्य को पूरी तरह बर्बाद कर देता है। ऐसे में युवाओं को केवल इस अभियान में मूकदर्शक या सामान्य सहभागी बनकर नहीं रहना है, बल्कि उन्हें आगे आकर इस मुहिम का नेतृत्व करना होगा। जब एक युवा दूसरे युवा को सही मार्ग दिखाता है और नशे के दुष्प्रभावों से आगाह करता है, तो उसका प्रभाव किसी भी प्रशासनिक आदेश या उपदेश से कहीं अधिक गहरा और टिकाऊ होता है। खेल, योग और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने का आह्वान नशे से दूर रहने के लिए जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव को सबसे प्रभावी उपाय बताते हुए मुख्यमंत्री ने युवाओं को खेल, योग और नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या का अभिन्न अंग बनाने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि अच्छी संगति, सकारात्मक सोच और शारीरिक सक्रियता मानसिक तनाव को दूर रखती है, जो अक्सर युवाओं को नशे की ओर धकेलने का मुख्य कारण बनता है। उत्तराखंड की गौरवशाली परंपरा का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि यह धरती वीरों, तपस्वियों और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों की भूमि है। राज्य के युवाओं को अपनी इस ऐतिहासिक पहचान को आगे ले जाना है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक युवा को शिक्षा, कौशल विकास, खेल, नवाचार, स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखाने के भरपूर अवसर मिलें ताकि वे अपनी ऊर्जा का उपयोग राज्य और राष्ट्र निर्माण में कर सकें। बहुस्तरीय रणनीति: कार्रवाई, उपचार और सामाजिक पुनर्वास नशे के संगठित नेटवर्क पर प्रहार करने के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल पुलिस और कानूनी कार्रवाई से इस जटिल समस्या को जड़ से समाप्त नहीं किया जा सकता।

राज्य सरकार नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में लिप्त तस्करों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठा रही है, लेकिन इसके साथ ही जनजागरूकता, सही काउंसलिंग, गुणवत्तापूर्ण नशामुक्ति केंद्र और पीड़ितों के सम्मानजनक पुनर्वास पर भी समानांतर काम किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर विशेष ध्यान दिलाया कि जो युवा किसी कारणवश नशे की लत के शिकार हो चुके हैं, उन्हें अपराधी की दृष्टि से देखने के बजाय एक संवेदनशील मरीज के रूप में समझा जाना चाहिए। उन्हें समय पर सही चिकित्सा परामर्श, चिकित्सकीय देखरेख और सबसे बढ़कर परिवार का भावनात्मक संबल मिलना आवश्यक है। जब तक समाज और परिवार ऐसे व्यक्तियों को अपनाने और उन्हें मुख्यधारा में वापस लाने के लिए तैयार नहीं होंगे, तब तक पुनर्वास की प्रक्रिया अधूरी रहेगी।
जनसहभागिता ही नशामुक्ति का स्थायी आधार मुख्यमंत्री ने अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संस्थाओं और समाज के प्रबुद्ध वर्ग से अपील की कि वे अपने-अपने स्तर पर सतर्क रहें। स्कूलों, कॉलेजों, कार्यस्थलों और खेल मैदानों से नशामुक्ति का यह संदेश प्रत्येक घर और दूर-दराज के गांवों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि नशामुक्त उत्तराखंड का लक्ष्य तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक यह संकल्प हर नागरिक के आचार, विचार और व्यवहार का हिस्सा न बन जाए। संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने ‘नशे को ना, जिंदगी को हां’ का मूलमंत्र देते हुए कहा कि जब सरकार की मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति और समाज की सक्रिय जनभागीदारी आपस में मिलेगी, तभी एक ऐसे स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त उत्तराखंड का निर्माण संभव होगा जहां हर परिवार खुशहाल रहे और हर युवा अपने सपनों को साकार कर सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशामुक्त उत्तराखण्ड वॉकथॉन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और स्वस्थ एवं सशक्त उत्तराखण्ड के निर्माण का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण अभियान है। इस प्रकार के आयोजनों से नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जनजागरूकता बढ़ने के साथ ही युवाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने इस पहल के लिए ओएनजीसी ऑफिसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों, आयोजकों एवं विशेष रूप से श्री देवेन्द्र सिंह बिष्ट की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ ही उसके परिवार और समाज को भी प्रभावित करता है। जिस युवा के हाथों में किताबें होनी चाहिए, जिसे खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा दिखानी चाहिए और अपने परिश्रम से भविष्य संवारना चाहिए, यदि वह नशे की गिरफ्त में आ जाता है, तो उसके सपनों के साथ ही परिवार की उम्मीदें भी प्रभावित होती हैं। इसलिए युवाओं को नशे से दूर रखकर उनकी ऊर्जा और प्रतिभा को सही दिशा देना हम सभी की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार और पुलिस के प्रयासों से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। विद्यालयों, महाविद्यालयों, कार्यस्थलों और खेल मैदानों से नशामुक्ति का संदेश हर घर और हर गांव तक पहुंचाना होगा। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे इस अभियान में केवल सहभागी बनकर न रहें, बल्कि इसका नेतृत्व करें और दूसरों के लिए प्रेरणा बनें।
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