Dehradun News: दशहरा पर्व के समापन के तुरंत बाद देहरादून के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर कचरा प्रबंधन को लेकर एक सुनियोजित अभियान की शुरुआत की गई। स्थानीय परेड ग्राउंड से लेकर पटेलनगर, लक्ष्मण चौक स्थित हिन्दू नेशनल इंटर कॉलेज और रेसकोर्स जैसे सघन इलाकों में व्यापक स्तर पर सफाई अभियान संचालित हुआ। इस पूरी कार्रवाई के दौरान लगभग चालीस टन कचरा एकत्र कर उसके निस्तारण की व्यवस्था की गई। उत्सवों के समय निकलने वाले कचरे का समयबद्ध तरीके से हटना शहर की आबोहवा और जनस्वास्थ्य दोनों के लिए आवश्यक हो जाता है। परेड ग्राउंड में अकेले दस टन के करीब कचरा दर्ज किया गया, जबकि शेष तीस टन कचरा शहर के अन्य घनी आबादी वाले वार्डों और मुख्य मार्गों से एकत्रित किया गया।
प्रशासनिक सहभागिता और प्रत्यक्ष भागीदारी का संदेश
इस अभियान का सबसे उल्लेखनीय पहलू प्रशासनिक नेतृत्व की प्रत्यक्ष मौजूदगी रहा। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने केवल निर्देश देने तक सीमित न रहकर स्वयं परेड ग्राउंड में सफाई कार्य में भाग लिया। उनके साथ जिला प्रशासन एवं नगर निगम के कर्मचारियों के अलावा जीजीआईसी राजपुर की छात्राओं ने भी कंधे से कंधा मिलाकर कचरा उठाने का काम किया। जब कोई शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी स्वयं धरातल पर उतरकर सफाई कार्य में सहयोग करता है, तो यह व्यवस्था में लगे कर्मचारियों के भीतर उत्साह का संचार करता है और आम जनता के लिए भी एक सीधा नैतिक संदेश प्रस्तुत करता है। यह कदम दिखाता है कि स्वच्छता किसी एक विभाग या वर्ग का काम नहीं, बल्कि नागरिक कर्तव्य का अनिवार्य अंग है।

व्यवहारगत बदलाव और सामुदायिक उत्तरदायित्व
स्वच्छ सर्वेक्षण का मूल ध्येय केवल सड़कों से कूड़ा हटाना भर नहीं है, बल्कि समाज के भीतर कचरा प्रबंधन को लेकर एक स्थायी संस्कार विकसित करना है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जब तक समाज अपनी दैनिक आदतों में सुधार नहीं करेगा, तब तक कोई भी प्रशासनिक प्रयास दीर्घकालिक परिणाम नहीं दे सकता। सार्वजनिक स्थलों, व्यस्त बाजारों और रिहायशी क्षेत्रों में डस्टबिन की उपलब्धता जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी नागरिकों की यह सोच है कि वे कूड़ा इधर-उधर न फेंकें। जब तक लोग अपने घर और दुकान के बाहर सफाई रखने को अपनी नैतिक जिम्मेदारी नहीं मानेंगे, तब तक नगर निगम की गाड़ियां और सफाईकर्मी केवल प्रतिक्रियात्मक स्तर पर ही काम करते रह जाएंगे।
त्योहारों से राज्य स्थापना दिवस तक सतत निगरानी
दशहरे के बाद आने वाले प्रमुख त्योहारों जैसे धनतेरस, दीपावली और फिर उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस को ध्यान में रखते हुए इस सफाई अभियान को निरंतर जारी रखने का निर्णय लिया गया है। त्योहारी दिनों में बाजारों में अत्यधिक चहल-पहल, पैकेजिंग सामग्री का ढेर और खान-पान के अवशेषों के चलते अपशिष्ट उत्पादन सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाता है। प्रशासन ने यह तय किया है कि पूरे जनपद में यह विशेष अभियान अनवरत चलेगा ताकि किसी भी सार्वजनिक स्थान पर कचरे के ढेर न लगें। नियमित निरीक्षण, त्वरित उठाव और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सफाईकर्मियों की तैनाती इस कार्ययोजना का मुख्य आधार बनाई गई है।

वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और स्रोत पर पृथक्करण
सफाई के बाद एकत्रित होने वाले अपशिष्ट का निस्तारण पारंपरिक तरीकों से हटकर वैज्ञानिक पद्धति से किया जाना आज की सबसे बड़ी अनिवार्यता है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि कचरे का संग्रहण करते समय ही जैव अपघटनीय अर्थात गीले कचरे और गैर-जैव अपघटनीय यानी सूखे कचरे को अलग श्रेणियों में रखा जाए। जब तक स्रोत पर पृथक्करण सुनिश्चित नहीं होगा, तब तक प्रोसेसिंग प्लांट में कचरे का पुनर्चक्रण या कंपोस्टिंग संभव नहीं हो पाती। प्लास्टिक, थर्माकोल और पैकेजिंग जैसी सामग्री मिट्टी और जलस्रोतों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाती हैं, इसलिए इनके वैज्ञानिक निस्तारण की सख्त प्रक्रिया तय की गई है ताकि पर्यावरण को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।
नगर निकायों का समन्वय और संवेदनशील क्षेत्रों का कायाकल्प
राजधानी देहरादून के साथ-साथ ऋषिकेश और आसपास के सभी नगर निकायों को एक समन्वित योजना के तहत जोड़ा जा रहा है। शहर के भीतर बहने वाली रिस्पना नदी जैसे संवेदनशील जलस्रोतों को कचरा-मुक्त बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। रिस्पना और बिंदाल जैसी नदियों के किनारे अवैध रूप से डंप होने वाला कचरा पूरे शहर के पारिस्थितिक तंत्र को दूषित करता है। इसके समाधान के लिए चिन्हित हॉटस्पॉट्स पर सीसीटीवी निगरानी, चालान की व्यवस्था और नियमित सफाई अभियान को एक साथ लागू करने की तैयारी है। गैर-सरकारी संगठनों, स्थानीय व्यापार मंडलों और सामाजिक संस्थाओं को इस पूरी प्रक्रिया से जोड़कर इसे एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप देने की रूपरेखा तैयार की गई है।
स्थायी समाधान के लिए नागरिक अनुशासन जरूरी
सफाई अभियान की सफलता अंततः इस बात पर निर्भर करती है कि आम नागरिक अपने शहर को किस नजरिए से देखता है। परेड ग्राउंड, लक्ष्मण चौक, पटेलनगर और रेसकोर्स से चालीस टन कूड़ा उठना एक ओर निगम की तत्परता को दर्शाता है, तो दूसरी ओर यह तथ्य भी उजागर करता है कि उत्सवों के दौरान हम कितना भारी कचरा खुले में छोड़ देते हैं। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने के लिए नागरिकों को गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखने की आदत अपनी दिनचर्या में शामिल करनी होगी। जब नागरिक अनुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही एक साथ काम करते हैं, तभी स्वच्छ सर्वेक्षण जैसे राष्ट्रीय अभियान कागजी आंकड़ों से निकलकर जमीन पर एक स्वस्थ और सुरक्षित शहर का निर्माण कर पाते हैं।

स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत देहरादून में स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और आमजन को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं नगर निगम देहरादून ने स्थानीय परेड ग्राउंड में विशेष सफाई अभियान चलाया । दशहरा पर्व के बाद आयोजित इस अभियान में परेड ग्राउंड के संपूर्ण परिसर की साफ-सफाई की जिसमें लगभग 10 टन कूड़ा एकत्र किया गया इसके अतिरिक्त पटेलनगर, हिन्दु नेशनल इन्टर कालेज, रेसकोर्स से लगभग 30 टन कूड़ा उठाया। जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने जिला प्रशासन एवं नगर निगम के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा जीजीआईसी राजपुर की छात्राओं के साथ स्वयं सफाई अभियान में प्रतिभाग करते हुए कूड़ा उठाया। इस दौरान उन्होंने स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए अधिकारियों, नागरिकों, शैक्षणिक संस्थानों एवं सामाजिक संगठनों से स्वच्छता अभियानों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आहवान किया।
जिलाधिकारी ने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान का उद्देश्य केवल शहर की सफाई करना ही नहीं, बल्कि नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी और व्यवहारगत बदलाव विकसित करना भी है। सार्वजनिक स्थलों, प्रमुख मार्गों, बाजारों एवं अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर नियमित सफाई सुनिश्चित करने के साथ ही लोगों को कूड़े का उचित निस्तारण करने के लिए जागरूक किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ एवं सुंदर देहरादून के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
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