Congress News:हरिद्वार स्थित प्रेस क्लब में आयोजित एक अहम प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर भारतीय जनता पार्टी और उत्तराखंड की धामी सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि अंकिता भंडारी को जब तक मुकम्मल इंसाफ नहीं मिल जाता, तब तक कांग्रेस पार्टी इस लड़ाई को किसी भी सूरत में रुकने नहीं देगी। यह संघर्ष अब केवल अदालतों और पुलिस दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे सड़क से लेकर देश की संसद तक पूरे दम-खम के साथ लड़ा जाएगा।
प्रेस वार्ता की शुरुआत करते हुए रागिनी नायक ने कहा कि उत्तराखंड की शांत वादियों में एक मासूम बेटी के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया था, लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी पीड़ित माता-पिता न्याय की आस में दर-दर भटकने को मजबूर हैं। जब न्याय मांग रहे परिवार को राजधानी की सड़कों पर धरना देने से रोका जाता है और हिरासत में ले लिया जाता है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि व्यवस्था अपनी खामियों को छुपाने की कोशिश में जुटी है।
कथित वीआईपी का रहस्य और सीबीआई जांच पर उठे सवाल प्रेस वार्ता का सबसे संवेदनशील और गंभीर मुद्दा उस कथित वीआईपी की पहचान का रहा, जिसका जिक्र इस पूरे मामले की शुरुआत से ही हर जुबान पर है। रागिनी नायक ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीबीआई जांच की संस्तुति तो की, लेकिन जांच की दिशा को जिस तरह घुमाया गया, वह कई बड़े संदेह पैदा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में वास्तविक नाम दर्ज करने की बजाय ‘अज्ञात वीआईपी’ का उल्लेख कर एक ऐसा ढाल तैयार किया गया, जिससे प्रभावशाली चेहरे कानूनी शिकंजे से दूर बने रहें।
रागिनी नायक ने सवाल उठाया कि जब मृतका अंकिता भंडारी का फोन न मिलने की स्थिति में उसका डुप्लीकेट सिम निकलवाकर कड़ियां जोड़ी जा सकती हैं, तो मुख्य आरोपी के संपर्कों और उसकी कॉल डिटेल की मुकम्मल पड़ताल में इतनी सुस्ती क्यों बरती गई। उन्होंने पूछा कि वह कौन सा ताकतवर शख्स था जिसे खुश करने के लिए अंकिता पर अनैतिक दबाव बनाया जा रहा था, और आज भी उस नाम को सार्वजनिक करने में सरकारी एजेंसियां क्यों हिचकिचा रही हैं। दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति का उठाया मसला कांग्रेस प्रवक्ता ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दुष्यंत गौतम का नाम लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस शख्स का नाम इस संवेदनशील मामले से जोड़कर लगातार चर्चाओं और विवादों में रहा, उन्हें एक संवैधानिक पद सौंप दिया गया।
नायक का कहना था कि यह निर्णय केवल एक सामान्य राजनीतिक पदोन्नति नहीं है, बल्कि कानूनी जांच के दायरे से बाहर निकालने और संरक्षण देने की एक सोची-समझी कवायद प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक गरिमा की आड़ में किसी भी व्यक्ति को जांच एजेंसियों के सवालों से नहीं बचाया जाना चाहिए। इस पूरे प्रकरण से जुड़े सभी कथित वीडियो और ऑडियो साक्ष्यों की निष्पक्ष फॉरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए ताकि हकीकत जनता के सामने आ सके। किसी भी निष्पक्ष न्यायिक व्यवस्था की पहली शर्त यह होती है कि आरोपी चाहे जितना भी रसूखदार हो, कानून के आगे उसका दर्जा एक सामान्य नागरिक जैसा ही रहे।
उन्नाव से उत्तराखंड तक: व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल रागिनी नायक ने देश के विभिन्न चर्चित महिला अपराध मामलों का संदर्भ देते हुए सत्ता पक्ष के रवैये को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि कुलदीप सेंगर से लेकर बृजभूषण शरण सिंह तक और हाथरस से लेकर उन्नाव तक, ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जहां पीड़ितों को न्याय पाने के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा और व्यवस्था पर आरोपियों को ढाल मुहैया कराने के आरोप लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि आज उत्तराखंड की धामी सरकार भी उसी पृष्ठभूमि में खड़ी दिखाई दे रही है, जहां बेटी को सुरक्षा देने का वादा करने वाले अब सवालों के घेरे में हैं। उन्होंने कहा कि ‘बेटी बचाओ’ जैसे नारे केवल विज्ञापनों और मंचों तक सीमित रह गए हैं, जबकि असल जिंदगी में जब किसी बेटी पर विपत्ति आती है, तो पूरी प्रशासनिक ताकत मामले को दबाने और आरोपियों के तार छुपाने में लग जाती है।
देश की राजधानी में धरने पर बैठी महिला पहलवानों का प्रसंग हो या पहाड़ की अंकिता का दर्द, हर जगह एक जैसा ही ढर्रा नजर आया है। सड़क से संसद तक तेज होगा संघर्ष हरिद्वार की इस सभा में कांग्रेस नेताओं ने साफ संकेत दिए कि अंकिता भंडारी का मुद्दा केवल उत्तराखंड की स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे राष्ट्रीय पटल पर एक बड़े जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा। रागिनी नायक ने कहा कि जनता अब चुप बैठने वाली नहीं है और उत्तराखंड की नारी शक्ति अपने हक और स्वाभिमान की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से इसका माकूल जवाब देगी। इस प्रेस वार्ता में कांग्रेस के कई प्रांतीय एवं स्थानीय पदाधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर यह संकल्प दोहराया कि जब तक मामले से जुड़े तमाम वीआईपी चेहरों का सच बेनकाब नहीं होता और अंकिता के परिजनों को अंतिम न्याय नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।
राजनीतिक निहितार्थ और चुनावी समीकरणों पर प्रभाव उत्तराखंड की राजनीति में महिला सुरक्षा और संवेदनशील आपराधिक मामलों की गूंज हमेशा से चुनावी समीकरणों को प्रभावित करती रही है। अंकिता भंडारी प्रकरण अब केवल एक कानूनी लड़ाई न रहकर राज्य के राजनीतिक विमर्श का केंद्र बिंदु बन चुका है। कांग्रेस पार्टी द्वारा इस विषय को लगातार प्रमुखता से उठाना यह दर्शाता है कि विपक्ष आगामी चुनावों और जनआंदोलनों में इसे सत्ता पक्ष के खिलाफ सबसे बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
पर्वतीय क्षेत्रों में मातृशक्ति को राज्य निर्माण आंदोलन से लेकर सामाजिक चेतना तक का आधार माना जाता है। ऐसे में किसी स्थानीय बेटी से जुड़े गंभीर अपराध में न्याय मिलने में देरी या जांच की दिशा पर सवाल उठना सीधे तौर पर पहाड़ी समाज की भावनाओं को आहत करता है। विपक्ष का यह तर्क कि सत्ताधारी दल रसूखदारों को बचाने के लिए पूरी मशीनरी का इस्तेमाल कर रहा है, सीधे तौर पर सरकार की उस छवि को चुनौती देता है जिसे सुशासन और पारदर्शिता के दावे के साथ गढ़ा गया था। प्रशासनिक विश्वसनीयता और न्यायपालिका की भूमिका लोकतांत्रिक ढांचे में पुलिस और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता जनता के विश्वास की सबसे पहली कसौटी होती है। जब किसी हाई-प्रोफाइल मामले में वीआईपी संस्कृति के हावी होने के आरोप लगते हैं, तो इससे सामान्य नागरिक के मन में कानून के शासन को लेकर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है।
कांग्रेस प्रवक्ता द्वारा प्रेस वार्ता में उठाए गए सवाल सीधे तौर पर जांच की पारदर्शी प्रक्रिया और संस्थागत ईमानदारी पर केंद्रित हैं। विशेषज्ञों का भी मानना है कि जब तक इस मामले से जुड़े सभी संशय दूर नहीं किए जाते और सार्वजनिक मंचों पर उठ रहे सवालों का तार्किक और कानूनी जवाब सामने नहीं आता, तब तक जनआक्रोश शांत होना संभव नहीं है। अदालत की निगरानी में निष्पक्ष जांच और हर साक्ष्य की वैज्ञानिक पुष्टि ही वह एकमात्र रास्ता है जिससे पीड़ित परिवार को वास्तविक न्याय मिल सकता है और आम जनता के बीच प्रशासनिक व न्यायिक प्रणाली के प्रति सम्मान बना रह सकता है।
Dehradun News: स्वच्छ सर्वे अभियान के तह्त शहर में चला विशेष सफाई अभियान, उठाया गया 40 टन कूड़ा







