Namo Cricket League News: पंचकूला के ताऊ देवीलाल क्रिकेट स्टेडियम की हरी-भरी घास पर जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हाथों में बल्ला थामकर पिच की ओर बढ़े, तो मैदान में मौजूद युवाओं और खेलप्रेमियों का जोश देखते ही बनता था। अक्सर बैठकों, फाइलों और प्रशासनिक दायित्वों के बीच दिखने वाले जननेता को जब खिलाड़ियों ने खेल की पोशाक में अपने कंधे से कंधा मिलाकर दौड़ते और शॉट लगाते देखा, तो खेल का पूरा वातावरण एक उत्सव में बदल गया। यह दृश्य केवल एक औपचारिकता या सांकेतिक उपस्थिति भर नहीं था, बल्कि यह उस आत्मीय जुड़ाव का सीधा प्रमाण था जो एक संवेदनशील नेतृत्व अपने देश की युवा पीढ़ी के साथ महसूस करता है। मैदान के बीच खड़े होकर जब धामी ने गेंद का सामना किया, तो स्टेडियम की दीर्घाओं से उठने वाली तालियों की गूंज इस बात की तस्दीक कर रही थी कि जब समाज का मार्गदर्शक स्वयं खेल के मैदान में उतरता है, तो वह शब्दों से कहीं अधिक अपने आचरण से नई प्रेरणा का संचार करता है।

नमो क्रिकेट लीग का यह आयोजन केवल चौके और छक्कों का मुकाबला नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य जीवन के उस बुनियादी फलसफे को रेखांकित करना था जो मैदान की चौहद्दी से निकलकर पूरे समाज को दिशा देता है। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से संवाद करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि खेल के मैदान में कदम रखने का अहसास दुनिया के किसी भी अन्य अनुभव से बिल्कुल अलग और अलौकिक होता है। यहां कोई पद या औपचारिकता आड़े नहीं आती, यहां केवल खेल भावना, खुला आसमान और सामने खड़ा लक्ष्य मायने रखता है। उन्होंने बताया कि मैदान हमें सिखाता है कि जीवन की किसी भी चुनौती को अकेले दम पर पार नहीं किया जा सकता; उसके लिए एक मजबूत टीम भावना, एक-दूसरे पर अटूट विश्वास, निरंतर अभ्यास और पूर्ण समर्पण की आवश्यकता होती है। जब कोई खिलाड़ी मैदान पर पसीना बहाता है, तो वह केवल रन नहीं बनाता, बल्कि वह अपने चरित्र की उस नींव को मजबूत करता है जो उसे जीवन के हर मोड़ पर अडिग खड़े रहने का संबल प्रदान करती है।
इस विशाल खेल महोत्सव में देश के कोने-कोने से आई तीस से अधिक टीमों ने भाग लिया। कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक और पूर्वोत्तर से लेकर पश्चिमी सीमाओं तक के युवाओं का एक ही मैदान पर एकत्रित होना भारत की बहुरंगी एकता और असीम ऊर्जा का साक्षात दर्शन करा रहा था। मुख्यमंत्री ने विभिन्न राज्यों से आए इन युवा खिलाड़ियों से व्यक्तिगत रूप से बात की, उनकी तैयारी और खेल के प्रति उनके समर्पण को जाना तथा उनकी प्रतिभा की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। अलग-अलग परिवेश, भाषा और संस्कृति से आने के बावजूद इन सभी युवाओं की आंखों में एक ही चमक थी—अपने खेल में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की और देश का नाम रोशन करने की। मुख्यमंत्री ने इन खिलाड़ियों को विश्वास दिलाया कि उनकी यह मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाएगी और आने वाले समय में वे राज्य और राष्ट्र स्तर पर अपनी अद्वितीय पहचान स्थापित करेंगे।
खेल के इस उत्साहपूर्ण माहौल के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आयोजन के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान केंद्रित किया, जो आज के समय में हमारे समाज की सबसे बड़ी चिंता बन चुका है। वह पहलू है युवाओं को नशे की गहरी और अंधकारमय गर्त से बचाना। मैदान में उपस्थित हजारों खिलाड़ियों और दर्शकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने एक स्वर में नशे के विरुद्ध शपथ दिलाई। स्टेडियम में गूंजता ‘नशे को ना, खेल को हां’ का संकल्प केवल एक औपचारिक नारा नहीं था, बल्कि वह हर एक नौजवान के भीतर से निकली वह पुकार थी जो अपने वर्तमान को सुरक्षित और भविष्य को स्वर्णिम बनाना चाहती है। मुख्यमंत्री ने युवाओं को चेताते हुए कहा कि आज नशा हमारे समाज की जड़ों को खोखला कर रहा है, और इस विपत्ति से लड़ने का सबसे प्रभावी हथियार मैदान का खेल और फिटनेस का अनुशासन ही है।
मुख्यमंत्री ने युवाओं के सीधे दिल को छूने वाले शब्दों में कहा कि मानव जीवन का स्वभाव है कि उसे किसी न किसी उत्साह, किसी न किसी आदत की दरकार होती है। ऐसे में यदि जीवन में कोई लत लगानी ही है, तो वह लत खेल के मैदान की, नियमित व्यायाम की और अपने शरीर को फौलाद बनाने की होनी चाहिए। यदि दिल में कोई आग जलानी है, कोई जुनून पालना है, तो वह जुनून अपने सपनों को सच करने और राष्ट्र निर्माण में अपनी आहुति देने का होना चाहिए। युवाओं की असीम शक्ति और उनका स्वर्णिम काल किसी नशे के धुएं या रासायनिक पदार्थों की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। युवा शक्ति वह प्रचंड धारा है जो यदि सही दिशा पा जाए तो पहाड़ों का सीना चीरकर रास्ते बना सकती है, किंतु यदि यह दिशाहीन होकर नशे की ओर मुड़ जाए तो परिवार के परिवार तबाह हो जाते हैं। इसलिए अपनी ऊर्जा को रचनात्मकता, सामाजिक दायित्व और खेल के मैदान में लगाना ही जीवन की सच्ची सार्थकता है।
खेल के बहुआयामी महत्व की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि खेल केवल मांसपेशियों को मजबूत करने या शरीर का वजन नियंत्रित रखने का साधन नहीं है। यह उससे कहीं बढ़कर मनुष्य के अंतर्मन को तराशने की एक जीवंत पाठशाला है। खेल के मैदान में उतरने वाला व्यक्ति यह सीखता है कि जीत मिलने पर कैसे विनम्र रहा जाता है और हार मिलने पर किस प्रकार बिना विचलित हुए अपनी गलतियों से सीख लेकर दोबारा दोगुने वेग से उठ खड़ा होना होता है। मैदान का हर क्षण धैर्य, नेतृत्व क्षमता, त्वरित निर्णय लेने की कला और दबाव की स्थिति में भी शांत रहने की मानसिक शक्ति सिखाता है। जो युवा खेल की इस कठिन तपस्या से गुजरता है, वह जीवन के किसी भी कार्यक्षेत्र में जाए, चाहे वह शिक्षा हो, व्यापार हो, सेना हो या राजनीति, वह कभी परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेकता।
देश में बदलते खेल परिदृश्य का उल्लेख करते हुए धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में भारत में खेलों को लेकर जो माहौल बना है, वह अभूतपूर्व है। पहले जहां खेलों को केवल समय बिताने या शौकिया गतिविधि के रूप में देखा जाता था, वहीं आज केंद्र सरकार की ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ जैसी युगांतरकारी योजनाओं ने इसे एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दे दिया है। इन पहलों के माध्यम से देश के सुदूर गांवों, कस्बों और सामान्य परिवारों से आने वाले प्रतिभावान बच्चों को पहचान कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसका प्रत्यक्ष परिणाम आज ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियन गेम्स और अन्य वैश्विक प्रतियोगिताओं में भारत के पदकों की बढ़ती संख्या और विश्व पटल पर बजते भारत के डंके के रूप में सबके सामने है।
इस संदर्भ में उन्होंने हरियाणा की गौरवशाली खेल परंपरा को विशेष रूप से नमन किया। हरियाणा की मिट्टी की तासीर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रदेश ने देश को अनगिनत ऐसे सूरमा दिए हैं जिन्होंने विश्व स्तर पर भारत का तिरंगा शान से लहराया है। चाहे कुश्ती हो, मुक्केबाजी हो, एथलेटिक्स हो या निशानेबाजी, हरियाणा के धाकड़ खिलाड़ियों ने अपनी अपार मेहनत, त्याग और समर्पण से यह सिद्ध कर दिया है कि अगर लगन सच्ची हो तो संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बन सकती। उन्होंने कहा कि किसी भी खिलाड़ी के गले में जब कोई पदक चमकता है, तो दुनिया केवल उस पल की चमक देखती है, किंतु उस चमक के पीछे वर्षों की वह तपस्या छिपी होती है जिसमें कड़ाके की ठंड में तड़के उठना, चोटों के दर्द को सहना और अपनी तमाम व्यक्तिगत इच्छाओं को लक्ष्य के लिए न्योछावर कर देना शामिल होता है।
सामाजिक मानसिकता में आए बदलाव को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने उस पुरानी कहावत को भी याद किया जो दशकों तक भारतीय घरों में बच्चों को डराने के लिए दोहराई जाती थी—‘पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो होगे खराब’। उन्होंने कहा कि आज के नए भारत ने इस दकियानूसी सोच को पूरी तरह से पलट कर रख दिया है। आज देश का नौजवान सीना ठोक कर कह रहा है कि ‘खेलोगे-कूदोगे तो बनोगे लाजवाब’। आज खेल केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक सुरक्षित, गरिमापूर्ण और उज्ज्वल भविष्य का मजबूत आधार बन चुका है। माता-पिता भी अब अपने बच्चों को मैदान की ओर जाने से रोकते नहीं, बल्कि उनका हौसला बढ़ाते हैं। यह सामाजिक जागृति ही भारत को आने वाले समय में विश्व की सबसे बड़ी खेल महाशक्ति बनाने की रीढ़ बनेगी।
भाषण के अंतिम पड़ाव पर मुख्यमंत्री ने नशे के सामाजिक दुष्प्रभाव पर एक गहरा मर्मस्पर्शी संदेश दिया। उन्होंने अत्यंत भावुक स्वर में समझाया कि जब कोई एक नौजवान नशे की लत का शिकार होता है, तो केवल वही नष्ट नहीं होता, बल्कि उसके साथ उसका पूरा परिवार तिल-तिल कर बिखर जाता है। माता-पिता के अरमान, बहनों की उम्मीदें और पूरे घर की खुशियां नशे की भेंट चढ़ जाती हैं। इसके विपरीत, जब हम किसी एक युवा को खेल के मैदान से जोड़कर नशे के जाल से बाहर निकालते हैं, तो हम वास्तव में केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार को उजड़ने से बचाते हैं। एक सुरक्षित और खुशहाल परिवार मिलकर एक सशक्त समाज की रचना करता है, और ऐसा अनुशासित, ऊर्जावान समाज ही अंततः एक आत्मनिर्भर, अखंड और परम वैभवशाली राष्ट्र की आधारशिला रखता है।
पंचकूला के मैदान पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति, युवाओं के साथ उनका दोस्ताना क्रिकेट खेलना और उसके तुरंत बाद नशे के विरुद्ध सामूहिक प्रतिज्ञा दिलाना, इस पूरे आयोजन को केवल एक खेल टूर्नामेंट से ऊपर उठाकर एक सामाजिक पुनर्जागरण के पर्व में तब्दील कर गया। स्टेडियम से विदा लेते समय हर एक युवा के चेहरे पर आत्मविश्वास का तेज था और मन में यह पक्का निश्चय था कि वे न केवल स्वयं नशे से कोसों दूर रहेंगे, बल्कि अपनी गलियों, मोहल्लों और शिक्षण संस्थानों में खेल की अलख जगाकर अपने अन्य साथियों को भी एक स्वस्थ, सकारात्मक और कर्मठ जीवनशैली की ओर मोड़ने का काम करेंगे। खेल और स्वास्थ्य के इस संगम ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि जब युवा ऊर्जा को सही दिशा मिलती है, तो राष्ट्र का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित और गौरवपूर्ण हाथों में होता है।
Tehri Aanganwadi: बच्चों का स्वस्थ बचपन ही है प्रदेश के मजबूत भविष्य की नींव-रेखा आर्या









