Uttarakhand News: उत्तराखंड की धरती ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब बात प्रतिभा, जज्बे और संकल्प की आती है, तो देवभूमि की बेटियां किसी से पीछे नहीं हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और उत्तराखंड का परचम लहराने वाली राज्य की तीन होनहार महिला मुक्केबाजों से मुलाकात की और उन्हें उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने पिथौरागढ़ की रहने वाली निकिता चंद, काजल फर्स्वाण और आरती धारियाल की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों की मुक्तकंठ से सराहना की। इस खास मौके पर केवल खिलाड़ियों का ही नहीं, बल्कि उनके पीछे दिन-रात मेहनत करने वाले गुरुओं और प्रशिक्षकों बृजेंद्र मल तथा ललित कुँवर को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने सभी खिलाड़ियों और उनके कोचों को सम्मानित करते हुए उनके उज्ज्वल और स्वर्णिम भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं दीं।
इंडोनेशिया की धरती पर निकिता और काजल का रजत पंच
हाल ही में इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में 3 से 15 जुलाई 2026 तक आयोजित हुई प्रतिष्ठित अंडर-23 एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उत्तराखंड की बेटियों ने अपनी ताकत का लोहा मनवाया। इस प्रतियोगिता में पिथौरागढ़ की निकिता चंद ने 60 किलोग्राम भार वर्ग में उतरकर देश के लिए रजत पदक जीता। वहीं, काजल फर्स्वाण ने 65 किलोग्राम भार वर्ग की कड़ी स्पर्धा में शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए भारत की झोली में एक और रजत पदक डाला। रिंग के भीतर दोनों मुक्केबाजों की आक्रामकता, तकनीक और दृढ़ निश्चय ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इन दोनों खिलाड़ियों की इस ऐतिहासिक सफलता ने न केवल वैश्विक मंच पर तिरंगा फहराया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत से किसी भी सपने को साकार किया जा सकता है।
चैंपियन निकिता चंद: स्वर्णिम सफलताओं का निरंतर सफर
पिथौरागढ़ जिले के छोटे से गांव बड़ालू की रहने वाली निकिता चंद के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह उनकी मेहनत का निरंतर परिणाम है। निकिता इससे पहले भी वर्ष 2021, 2022 और 2023 में लगातार एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित कर चुकी हैं। रिंग के भीतर उनकी फुर्ती और विरोधी को भांपने की क्षमता उन्हें अपनी श्रेणी में सबसे अलग बनाती है। वर्तमान में निकिता देश के बेहतरीन कोचों में शुमार श्री बृजेंद्र मल और श्री भास्कर भट्ट के कुशल मार्गदर्शन में अपनी बारीकियों को और तराश रही हैं। उनकी यह सफलता राज्य के उन अनगिनत युवाओं के लिए एक जीवंत मिसाल है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने की हिम्मत करते हैं।
पहाड़ों से राष्ट्रीय कैंप तक काजल फर्स्वाण का प्रेरणादायी सफर
मुनस्यारी के दूरस्थ भदेली गांव की बेटी काजल फर्स्वाण की कहानी खेल के प्रति अटूट समर्पण की कहानी है। काजल ने अपने मुक्केबाजी के सफर की शुरुआती बारीकियां खेल विभाग के तहत संचालित पिथौरागढ़ स्थित महिला आवासीय छात्रावास में सीखीं। वहां उन्हें प्रशिक्षक सुनीता मेहता रावत और कप्तान देवीचंद का बेहतरीन मार्गदर्शन मिला, जिसने उनके आधार को बेहद मजबूत बनाया। इसके बाद काजल ने स्मॉल खेलो इंडिया सेंटर में कोच निखिल महर की देखरेख में अपनी तकनीकों को सुधारा। उनकी प्रतिभा को देखते हुए जल्द ही उनका चयन एनबीए, रोहतक के लिए हुआ और आज वह पटियाला स्थित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग कैंप में देश के शीर्ष एथलीटों के साथ पसीना बहा रही हैं। इससे पहले भी काजल अंडर-19 एएसबीसी एशियन चैंपियनशिप में रजत, अंडर-23 एशियन चैंपियनशिप में कांस्य और 38वें नेशनल गेम्स-2025 में रजत पदक जीतकर अपनी चमक बिखेर चुकी हैं।
रोमानिया में चमकीं आरती धारियाल: गोल्ड बेल्ट में भारत का स्वर्णिम परचम
उत्तराखंड के मुक्केबाजी परिदृश्य में एक और जगमगाता नाम पिथौरागढ़ के गौड़ीहाट की निवासी आरती धारियाल का है। आरती ने 12 से 16 जुलाई 2026 तक रोमानिया में आयोजित प्रतिष्ठित ‘गोल्ड बेल्ट बॉक्सिंग प्रतियोगिता’ में अपनी प्रतिभा का सर्वोच्च प्रदर्शन किया। 54 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए आरती ने अपने सभी विरोधियों को शिकस्त दी और शानदार स्वर्ण पदक अपने नाम किया। आरती की यह सफलता अचानक नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे वर्षों का कड़ा अभ्यास है। वह वर्ष 2024 और 2025 की एलीट महिला राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप में लगातार कांस्य पदक जीत चुकी हैं। अपनी इसी निरंतरता और रिंग के भीतर बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर उन्होंने पटियाला स्थित राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग कैंप में अपनी जगह पक्की की है, जहां वह अंतरराष्ट्रीय स्तर की नई चुनौतियों के लिए खुद को तैयार कर रही हैं।

स्मॉल खेलो इंडिया सेंटर और स्थानीय प्रशिक्षकों की अहम भूमिका
इन तीनों मुक्केबाजों की अभूतपूर्व सफलता इस बात का भी प्रमाण है कि यदि धरातल पर खेल बुनियादी ढांचा मजबूत हो, तो प्रतिभाएं अपने आप निखर कर सामने आती हैं। आरती धारियाल और काजल फर्स्वाण दोनों ने जिला खेल कार्यालय के तत्वावधान में संचालित ‘स्मॉल खेलो इंडिया सेंटर’ में कोच श्री निखिल महर की देखरेख में मुक्केबाजी के प्राथमिक और उन्नत दांव-पेच सीखे। स्थानीय स्तर पर बने ये सेंटर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से प्रतिभाओं को खोजने और उन्हें तराशने में रीढ़ की हड्डी साबित हो रहे हैं। प्रशिक्षकों द्वारा दी गई अनुशासित ट्रेनिंग, सही समय पर मिला मार्गदर्शन और खिलाड़ियों का अपना अटूट जज्बा मिलकर आज उत्तराखंड को देश के मुक्केबाजी नक्शे पर एक नए पावरहाउस के रूप में स्थापित कर रहा है।
बेटियों के सामर्थ्य पर बोले मुख्यमंत्री: ‘उत्तराखंड की बेटियां हर क्षेत्र में आगे’
सम्मान समारोह के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बेटियों की इन सफलताओं पर गहरा गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की बेटियों ने अपनी मेहनत, अदम्य साहस और प्रतिभा के बल पर न केवल अपना और अपने परिवार का, बल्कि पूरे राज्य और देश का नाम दुनिया भर में ऊंचा किया है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि निकिता, काजल और आरती की ये उपलब्धियां इस बात का सबसे बड़ा सबूत हैं कि देवभूमि की बेटियां जब किसी लक्ष्य को पाने का ठान लेती हैं, तो कोई भी बाधा उन्हें रोक नहीं सकती। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा फहराना केवल एक खिलाड़ी का प्रयास नहीं होता, बल्कि यह खिलाड़ी के रात-दिन के परिश्रम, प्रशिक्षकों की दूरदर्शी रणनीति और उनके परिवारों के असीम त्याग का संयुक्त परिणाम होता है।
राज्य में खेल संस्कृति को बढ़ावा और भविष्य की नीतियां
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राज्य सरकार की खेल प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सरकार उत्तराखंड को खेलों के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए प्रदेश भर में आधुनिक खेल सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों से छिपी हुई खेल प्रतिभाओं को बाहर लाने के लिए नई नीतियां लागू की जा रही हैं। मेधावी खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता, बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और छात्रवृत्ति देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य एक ऐसा खेल तंत्र विकसित करना है जहां किसी भी प्रतिभावान खिलाड़ी को संसाधनों की कमी के कारण अपनी प्रतिभा से समझौता न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे इस प्रोत्साहन से आने वाले समय में उत्तराखंड से और भी कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकलेंगे।
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नई पीढ़ी के लिए प्रेरणापुंज बनीं देवभूमि की ‘बॉक्सर गर्ल्स’
निकिता चंद, काजल फर्स्वाण और आरती धारियाल की यह सफलता केवल मेडल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक गहरा सामाजिक प्रभाव भी है। उत्तराखंड के पहाड़ों में कठिन परिस्थितियों में जीवन जीने वाले युवाओं, विशेषकर बालिकाओं के लिए यह तीनों मुक्केबाज एक बहुत बड़ी प्रेरणा बनकर उभरी हैं। उनके इस सफर ने यह संदेश दिया है कि गांव की पगडंडियों से शुरू हुआ सफर भी दुनिया के सबसे बड़े खेल आरेना तक पहुंच सकता है। आज राज्य के छोटे-छोटे कस्बों और गांवों में लड़कियां इन मुक्केबाजों को देखकर स्पोर्ट्स शूज पहनकर मैदान में उतर रही हैं। यह बदलाव उत्तराखंड के खेल परिदृश्य को एक नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है, जहां खेल अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि करियर और आत्मसम्मान का एक मजबूत जरिया बन चुका है।
स्वर्णिम भविष्य की ओर बढ़ता उत्तराखंड का मुक्केबाजी परिदृश्य
अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग रिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए जिस तरह से इन मुक्केबाजों ने प्रदर्शन किया है, उससे यह साफ है कि आने वाले समय में ओलंपिक और एशियन गेम्स जैसे महाकुंभ में भी उत्तराखंड के मुक्केबाजों का दबदबा देखने को मिलेगा। पटियाला के राष्ट्रीय कैंप में इन मुक्केबाजों का लगातार अभ्यास करना इस बात का संकेत है कि वे भविष्य की बड़ी चुनौतियों के लिए पूरी तरह से तैयार हो रही हैं। राज्य सरकार और खेल विभाग का निरंतर सहयोग, प्रशिक्षकों की मेहनत और खिलाड़ियों की लगन का यह मेल आने वाले वर्षों में भारतीय खेलों में उत्तराखंड की एक नई और मजबूत पहचान गढ़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा मिला यह सम्मान निश्चित रूप से इन खिलाड़ियों के मनोबल को और ऊंचा करेगा और वे आगामी प्रतियोगिताओं में नए कीर्तिमान स्थापित कर देश का नाम रोशन करती रहेंगी।








