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Yamunotri Highway Landslide News: यमुनोत्री हाईवे पर आसमानी आफत, एसडीआरएफ ने 100 तीर्थयात्रियों की जान

On: July 12, 2026 7:17 AM
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Yamunotri Highway Landslide News: यमुनोत्री हाईवे पर आसमानी आफत, एसडीआरएफ ने 100 तीर्थयात्रियों की जान
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Yamunotri Highway Landslide News: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में पिछले कई दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के चलते यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित स्यानाचट्टी में भारी भूस्खलन हुआ है। मलबे के कारण सड़क मार्ग पूरी तरह ठप हो जाने से सैकड़ों चारधाम श्रद्धालु बीच रास्ते में फंस गए। आपातकालीन स्थिति को देखते हुए उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य खुद आपदा प्रभावित क्षेत्र के जमीनी मुआयने पर पहुंचे और अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर पुल निर्माण व नदी चैनलाइजेशन पूरा करने के कड़े निर्देश दिए। वहीं, दूसरी ओर एसडीआरएफ की टीमों ने उफनते मलबे के बीच ‘रोप फिक्सिंग’ तकनीक के जरिए 100 से अधिक यात्रियों का हैरतअंगेज रेस्क्यू किया। जानिए इस पूरी विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट को।

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photo- Yamunotri Highway Landslide

स्यानाचट्टी में मूसलाधार बारिश का कहर और बंद यमुनोत्री मार्ग

पहाड़ों में मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ ही उत्तरकाशी जिले के अंतर्गत आने वाले सीमांत क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। यमुनोत्री धाम को जोड़ने वाले मुख्य हाईवे पर स्थित स्यानाचट्टी संभाग में पिछले 24 घंटों से हो रही मूसलाधार और मटमैली बारिश के कारण अचानक एक बहुत बड़ा भूस्खलन हो गया। पहाड़ का एक विशाल हिस्सा टूटकर सीधे मुख्य सड़क पर आ गिरा, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग का एक बड़ा हिस्सा मलबे और भारी बोल्डरों के नीचे पूरी तरह दब गया। रास्ता बंद होते ही यमुनोत्री धाम के दर्शन कर लौट रहे और दर्शन के लिए जा रहे देश-विदेश के सैकड़ों श्रद्धालुओं के वाहनों के पहिए जहाँ के तहाँ थम गए। चारों तरफ घने जंगलों, उफनती यमुना नदी और आसमान से बरसते पत्थरों के बीच फंसे यात्रियों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। यह घटना इस बात का सीधा प्रमाण है कि मानसून के इस दौर में हिमालयी रास्ते किस कदर संवेदनशील और खतरनाक हो जाते हैं।

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photo- Yamunotri Highway Landslide

भूस्खलन के बीच ग्राउंड जीरो पर पहुंचे जिलाधिकारी प्रशांत आर्य

आपदा और मार्ग अवरुद्ध होने की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने दफ्तर की सुख-सुविधाओं को छोड़कर सीधे ग्राउंड जीरो का रुख किया। वे लगातार हो रही तेज बारिश के बीच खुद स्यानाचट्टी के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे और पूरे आपदा प्रभावित संभाग का बेहद बारीकी से स्थलीय निरीक्षण (जायजा) किया। जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), लोक निर्माण विभाग और आपदा प्रबंधन के अभियंताओं के साथ नक्शे पर स्थिति का मूल्यांकन किया। उन्होंने स्पष्ट और कड़े लहजे में निर्देश दिए कि जब तक मुख्य मार्ग से भारी मलबा नहीं हट जाता, तब तक यातायात को वैकल्पिक रूप से सुचारू रखने के लिए एक नए बाईपास या वैकल्पिक मार्ग के निर्माण कार्य में रात-दिन काम करके तेजी लाई जाए। जिलाधिकारी ने बिना एक पल गंवाए सभी आवश्यक भारी मशीनरी, पोकलैंड और तकनीकी संसाधनों को तत्काल मौके पर पहुंचाने के प्रशासनिक आदेश जारी किए ताकि काम में एक मिनट की भी ढिलाई न हो।

यमुनोत्री पुल और नदी चैनलाइजेशन के लिए सिंचाई विभाग को एक हफ्ते का अल्टीमेटम

स्थलीय निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने स्यानाचट्टी में यमुना नदी पर निर्माणाधीन नए कंक्रीट पुल के कार्य की सुस्त रफ्तार को देखकर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए एक बेहद सख्त और अंतिम डेडलाइन (अल्टीमेटम) जारी की। उन्होंने निर्देश दिया कि निर्माणाधीन पुल के बचे हुए सभी तकनीकी और सिविल कार्यों को हर हाल में एक सप्ताह के भीतर शत-प्रतिशत पूरा किया जाए, ताकि भारी वाहनों का आवागमन सुरक्षित तरीके से शुरू हो सके। इसके साथ ही, यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर और तटीय कटान को रोकने के लिए जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग (Irrigation Department) के आला अधिकारियों को मौके पर तलब किया। उन्होंने नदी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए ‘चैनलाइजेशन’ (Channelization) कार्य में तेजी लाने और मलबे को नदी की मुख्य धारा से तुरंत हटाने के लिए अतिरिक्त पोकलैंड व डंपर मशीनें लगाने के कड़े निर्देश दिए ताकि तटीय गांवों पर बाढ़ का खतरा न मंडराए।

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वीआईपी संस्कृति से ऊपर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता

प्रशासनिक अमले को कड़ा संदेश देते हुए जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने साफ तौर पर कहा कि किसी भी सरकारी योजना या वीआईपी मूवमेंट से कहीं ऊपर हमारे देश-विदेश से आए चारधाम यात्रियों और स्थानीय पहाड़ी नागरिकों की सुरक्षा ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में राहत, बचाव और पुनर्निर्माण के कार्यों में किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन संवेदनशील और कच्चे पैदल मार्गों से होकर लोग गुजर रहे हैं, वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। इन खतरनाक रास्तों पर मजबूत रस्सियां (सेफ्टी रोप) बांधी जाएं, रात के समय यात्रियों की सहूलियत के लिए सोलर लाइटें लगाई जाएं और आपदा मित्रों की तैनाती की जाए। इसके साथ ही, जिलाधिकारी ने एक छोर से दूसरे छोर तक यात्रियों के सामान और आपातकालीन आवाजाही के लिए ‘ट्रांसशिपमेंट व्यवस्था’ को और अधिक वैज्ञानिक तथा प्रभावी बनाने पर जोर दिया ताकि बुजुर्गों और बच्चों को पैदल चलने में न्यूनतम परेशानी का सामना करना पड़े।

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photo- Yamunotri Highway Landslide

जांबाज एसडीआरएफ का हैरतअंगेज रेस्क्यू ऑपरेशन: मौत के मुंह से निकाले 100 यात्री

एक तरफ जहां प्रशासनिक स्तर पर नीतियां बनाई जा रही थीं, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर मौत और जिंदगी के बीच एक बड़ी जंग चल रही थी। स्यानाचट्टी में यमुनोत्री मार्ग पर भारी मलबा आने के कारण सड़क पूरी तरह गायब हो चुकी थी और दलदल के बीच लगभग 100 से अधिक श्रद्धालु फँसे हुए थे, जिनमें महिलाएं और मासूम बच्चे भी शामिल थे। जैसे ही इस गंभीर आपातकालीन घटना की सटीक सूचना जिला आपदा परिचालन केंद्र को मिली, राज्य आपदा प्रतिवादन बल पूरी तरह से सक्रिय हो गया। एसडीआरएफ पोस्ट बड़कोट से मुख्य आरक्षी दुर्गेश रतूड़ी के नेतृत्व में एक बेहद कुशल और आधुनिक आपदा उपकरणों से लैस रेस्क्यू टीम तुरंत घटना स्थल के लिए रवाना हुई। मामले की भयावहता को देखते हुए दूसरी तरफ से एसडीआरएफ पोस्ट जानकीचट्टी से भी मुख्य आरक्षी राजेश कुमार के नेतृत्व में एक अन्य बैकअप टीम भी बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंच गई।

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photo- Yamunotri Highway Landslide

जब दोनों जांबाज टीमें मौके पर पहुंचीं, तो वहां का नजारा बेहद डरावना था। पहाड़ से लगातार कीचड़ और मलबे का सैलाब नीचे की ओर बह रहा था, जिससे सामान्य रूप से पैदल चलना भी सीधे तौर पर जान गंवाने जैसा था। ऐसे में मुख्य आरक्षी दुर्गेश रतूड़ी और राजेश कुमार की टीम ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने उफनती ढलान और चट्टानों के बीच एक सुरक्षित कॉर्डन तैयार किया और ‘रोप फिक्सिंग’ तकनीक का इस्तेमाल करते हुए एक छोर से दूसरे छोर तक बेहद मजबूत पर्वतारोहण रस्सियों को पक्के एंकर के सहारे बांध दिया। इसके बाद, मूसलाधार बारिश और गिरते पत्थरों के बीच, एसडीआरएफ के जवानों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए एक-एक कर सभी डरे हुए 100 तीर्थयात्रियों को अपनी बाहों में लिया, उन्हें हौसला दिया और बहुत ही सावधानी व कुशलता के साथ सुरक्षित तरीके से मलबे के उस पार पहुंचाया। सुरक्षित किनारे पर पहुंचते ही यात्रियों ने नम आंखों से देवभूमि की पुलिस और इन जांबाज जवानों की पीठ थपथपाई और भगवान यमुनोत्री व केदारनाथ का आभार व्यक्त किया।

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