Uttarakhand Hostels News: उत्तराखंड के विकास और सामाजिक सुरक्षा को एक नई दिशा देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार धरातल पर काम कर रहे हैं। राज्य के हर वर्ग तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा केवल वर्तमान समय की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करना नहीं था, बल्कि राज्य के अगले 25 वर्षों के भविष्य को सुरक्षित और सुगम बनाना था। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में अधिकारियों को हिदायत दी है कि विभाग की नीतियां और योजनाएं इस प्रकार तैयार की जाएं जो आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकताओं को भी पूरा कर सकें। सरकार का यह कदम उत्तराखंड को देश के भीतर एक सुशासन मॉडल और ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के उदाहरण के रूप में स्थापित करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भविष्य की जरूरतों के अनुरूप योजनाओं का खाका और सुशासन का लक्ष्य
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों के सामने एक स्पष्ट विजन रखा। उन्होंने कहा कि समय तेजी से बदल रहा है और इसके साथ ही समाज की चुनौतियां तथा आवश्यकताएं भी बदल रही हैं। इसलिए, समाज कल्याण विभाग को अपनी पुरानी लकीर से हटकर काम करना होगा। अब जितनी भी कल्याणकारी योजनाएं बनाई जाएं, उनका आधार भविष्योन्मुखी होना चाहिए। इसका सीधा मतलब यह है कि आज जो योजना लागू हो रही है, वह अगले ढाई दशकों तक प्रासंगिक और प्रभावी बनी रहे। मुख्यमंत्री ने योजनाओं के एकीकरण यानी इंटीग्रेशन पर विशेष जोर दिया, जिससे विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बेहतर हो सके और संसाधनों की बर्बादी को रोका जा सके। वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करते हुए सरकारी धन का एक-एक पैसा सीधे जनता के काम आए, इसे सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं के लिए आवासीय सुविधाओं में तेजी
शिक्षा और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बैठक में बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना की गहन समीक्षा की गई। यह योजना अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को माध्यमिक, उच्च और विश्वविद्यालय स्तर पर बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के लिए अनुकूल माहौल और आवासीय सुविधाएं प्रदान करती है। मुख्यमंत्री ने इस योजना के तहत निर्माणाधीन तीन प्रमुख छात्रावासों की प्रगति पर असंतोष जताते हुए काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। इनमें देहरादून के डोईवाला स्थित बाबू जगजीवन राम बालक छात्रावास, नैनीताल के पाइनस का बालक छात्रावास और अल्मोड़ा के सोमेश्वर में बन रहा बालिका छात्रावास शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिया है कि इन तीनों छात्रावासों के निर्माण कार्य को हर हाल में अक्टूबर महीने तक पूरा कर लिया जाए। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि गरीब और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को जल्द से जल्द आधुनिक और सुरक्षित आवासीय सुविधाएं मिल सकें ताकि उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए। केंद्र सरकार इस योजना के तहत प्रति छात्र तीन लाख पच्चीस हजार रुपये तक की वित्तीय मदद देती है, लेकिन उत्तराखंड सरकार ने यह निर्णय लिया है कि जहां भी आवश्यकता होगी, राज्य सरकार अपनी तरफ से अतिरिक्त टॉप-अप राशि यानी बजट देगी ताकि इन छात्रावासों की गुणवत्ता और आधुनिक सुविधाओं से कोई समझौता न हो।

पेंशन प्रक्रिया का सरलीकरण: 60 वर्ष की आयु होते ही स्वतः शुरू होगी वृद्धावस्था पेंशन
अक्सर देखा जाता है कि बुजुर्गों को अपनी पेंशन शुरू करवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे उन्हें शारीरिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस व्यवस्था को पूरी तरह बदलने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक ऐतिहासिक और बेहद संवेदनशील निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि जैसे ही राज्य का कोई भी पात्र नागरिक अपनी जिंदगी के साठ वर्ष पूरे करता है, वह तकनीक की मदद से स्वतः ही वृद्धावस्था पेंशन के दायरे में आ जाना चाहिए।
इस स्वचालित व्यवस्था के लागू होने से बुजुर्गों को किसी भी तरह की कागजी कार्रवाई, अनावश्यक दफ्तरों की भागदौड़ या जटिल प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा। सरकार का मानना है कि बुढ़ापे में सामाजिक सुरक्षा पाना नागरिक का अधिकार है और इसे पाने के लिए उन्हें परेशान करना सुशासन के खिलाफ है। तकनीक का लाभ उठाकर डेटा को इस तरह सिंक किया जाएगा कि उम्र सीमा पार करते ही पेंशन सीधे उनके खाते से जुड़ जाए।
Uttarakhand Sports Policy News: जनता की रायशुमारी से तैयार होगी उत्तराखंड की हैं खेल नीति
जून 2026 की पेंशन का डिजिटल हस्तांतरण: एक क्लिक पर पहुंचे 145 करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री आवास के सभागार में आयोजित इस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रत्यक्ष रूप से लाभार्थियों को राहत देते हुए माह जून-2026 की पेंशन राशि को सीधे जनता के खातों में भेजा। आधुनिक तकनीक यानी डिजिटल डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सिर्फ एक क्लिक पर राज्य के नौ लाख अस्सी हजार नौ सौ पचास लाभार्थियों के बैंक खातों में लगभग एक सौ पैंतालीस करोड़ बयालीस लाख रुपये की बड़ी धनराशि हस्तांतरित की गई। इस पूरी राशि में केंद्र सरकार की ओर से लगभग सात करोड़ दो लाख रुपये का योगदान दिया गया, जबकि राज्य सरकार ने अपने बजट से लगभग एक सौ अड़तीस करोड़ चालीस लाख रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की है ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को संबल मिल सके।
विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत लाभार्थियों का विवरण
राज्य सरकार द्वारा दी गई इस आर्थिक सहायता का लाभ समाज के अलग-अलग कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को मिला है। जून महीने के आंकड़ों के अनुसार, सबसे बड़ा हिस्सा वृद्धावस्था पेंशन के रूप में वितरित किया गया, जहां छह लाख ग्यारह हजार दो सौ पैंतालीस बुजुर्गों को इक्यानवे करोड़ चौहत्तर लाख रुपये से अधिक की राशि दी गई। इसके अलावा, दो लाख पैंतीस हजार आठ सौ पचास विधवा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए पैंतीस करोड़ अड़तीस लाख रुपये हस्तांतरित किए गए। शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम तथा दिव्यांग वर्ग के अठासी हजार सात सौ सत्तासी लाभार्थियों को तेरह करोड़ बत्तीस लाख रुपये की सहायता मिली है।

उत्तराखंड के मेहनतकश किसानों को सम्मान देने के लिए सत्ताइस हजार दो सौ सात लाभार्थियों को किसान पेंशन के तहत तीन करोड़ छब्बीस लाख रुपये दिए गए। वहीं, समाज की परित्यक्ता महिलाओं, जिनकी संख्या आठ हजार दो सौ अट्ठावन है, उन्हें निन्यानवे लाख दस हजार रुपये की राशि भेजी गई। बच्चों और आश्रितों के भरण-पोषण अनुदान के रूप में सात हजार दो सौ सत्तानवे लाभार्थियों को इक्यावन करोड़ आठ लाख रुपये दिए गए। राज्य की वीरांगना तीलू रौतेली के नाम पर संचालित पेंशन योजना से दो हजार एक सौ नवासी महिलाओं को छब्बीस लाख पंद्रह लाख रुपये की मदद मिली। इसके साथ ही, बौना पेंशन योजना के तहत एक सौ सत्ताइस लाभार्थियों को एक लाख बावन हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी सुशासन मॉडल बनाने का संकल्प
समीक्षा बैठक के समापन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए एक बहुत ही मार्मिक और जरूरी बात कही। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य केवल कागजों पर योजनाएं बनाना या वाहवाही लूटना नहीं है। वे राज्य में एक ऐसी स्थायी, पारदर्शी और उत्तरदायी व्यवस्था बनाना चाहते हैं जो उनकी सरकार के बाद भी आने वाली पीढ़ियों के काम आती रहे। सामाजिक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मान से जीने का अवसर पाना हर उस नागरिक का अधिकार है जो इसके योग्य है। उत्तराखंड सरकार इस समय तकनीक, संवेदनशीलता और भविष्य की सोच को मिलाकर एक ऐसा सुशासन मॉडल तैयार कर रही है, जो न केवल उत्तराखंड के लोगों का जीवन आसान बनाएगा बल्कि आने वाले समय में देश के अन्य बड़े राज्यों के लिए भी एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा। सरकार के इन कदमों से साफ है कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड में सामाजिक न्याय की जड़ें और मजबूत होने वाली हैं।











