Uttarakhand News: उत्तराखंड में वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति द्वारा संचालित प्रदेशव्यापी उपभोक्ता जागरूकता अभियान के तहत देहरादून के रायपुर विकासखंड में एक भव्य शिविर का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि आरबीआई की कार्यकारी निदेशक सोनाली सेन गुप्ता की मौजूदगी में ग्रामीणों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, री-केवाईसी, डिजिटल बैंकिंग और साइबर ठगी से बचाव की विस्तृत जानकारी दी गई। जानिए 15 जुलाई 2026 तक चलने वाले इस महा-अभियान की पूरी जमीनी रिपोर्ट।
उत्तराखंड के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और बैंकिंग प्रणाली की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार और बैंकिंग नियामक संस्थाएं पूरी प्रतिबद्धता के साथ धरातल पर उतर चुकी हैं। प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक वित्तीय सेवाओं का सीधा लाभ पहुंचाने और उन्हें आर्थिक रूप से साक्षर बनाने के पावन उद्देश्य से ‘राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति’ उत्तराखंड द्वारा इन दिनों पूरे प्रदेश में एक व्यापक और सघन ‘उपभोक्ता जागरूकता अभियान’ चलाया जा रहा है। इसी महत्वपूर्ण अभियान की अगली कड़ी के रूप में शुक्रवार को राजधानी देहरादून के रायपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले श्याम्भू रिजॉर्ट में एक विशाल और बेहद ज्ञानवर्धक वित्तीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य फोकस न केवल ग्रामीणों के बैंक खाते खोलना था, बल्कि उन्हें डिजिटल युग में सुरक्षित और सुलभ बैंकिंग करने के व्यावहारिक तरीके सिखाना भी रहा।
इस गरिमापूर्ण और बड़े कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में देश के केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की केंद्रीय कार्यकारी निदेशक सोनाली सेन गुप्ता ने विशेष रूप से शिरकत की। उनके आगमन से कार्यक्रम की महत्ता और अधिक बढ़ गई। इस विशाल जागरूकता शिविर में भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ-साथ भारत सरकार के वित्तीय सेवा विभाग , राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) तथा प्रदेश में सक्रिय विभिन्न सरकारी व निजी बैंकों के शीर्ष नीति-निर्माताओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। शिविर के दौरान रायपुर विकासखंड के विभिन्न गांवों से आए सैकड़ों ग्रामीणों, महिला स्वयं सहायता समूहों और बैंक उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री जनधन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और बुढ़ापे का सहारा बनने वाली अटल पेंशन योजना की बारीकियों से बेहद सरल और स्थानीय भाषा में रूबरू कराया गया।
अधिकारियों ने मंच से बोलते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया कि कोई भी पात्र नागरिक सामाजिक सुरक्षा के इस मजबूत घेरे से बाहर न छूटे। इसके साथ ही, वर्तमान दौर की सबसे बड़ी जरूरत यानी डिजिटल बैंकिंग, सुरक्षित ऑनलाइन लेनदेन, बैंकों की आंतरिक शिकायत निवारण प्रणाली तथा बरसों से खातों में पड़े निष्क्रिय फंड यानी ‘अनक्लेम्ड डिपॉजिट’ और बंद पड़े निष्क्रिय खातों को दोबारा चालू कराने से जुड़ी कानूनी व व्यावहारिक प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी विस्तार से दी गई। शिविर में मौजूद तकनीकी विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को अपने बैंक खातों की समय पर ‘री-केवाईसी’ (Re-KYC) प्रक्रिया पूरी कराने की अहमियत समझाई। उन्होंने बताया कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की सब्सिडी और अन्य आर्थिक लाभ सीधे, पारदर्शी तरीके से और बिना किसी बिचौलिए के सीधे खातों में (DBT के माध्यम से) पहुंच सकें, इसके लिए बैंक खातों को पहचान दस्तावेजों से पूरी तरह अपडेट और लिंक कराना बेहद अनिवार्य है।

इस राज्यव्यापी महा-अभियान की समय-सीमा और इसके भविष्य के रोडमैप को साझा करते हुए बैंक अधिकारियों ने मंच से बताया कि यह विशेष साक्षरता अभियान बीते 15 जून से पूरे उत्साह के साथ शुरू हो चुका है, जो आगामी 15 जुलाई 2026 तक उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों के विभिन्न विकासखंडों, सुदूरवर्ती पर्वतीय गांवों और ग्राम पंचायतों में लगातार पूरी सक्रियता के साथ संचालित किया जाता रहेगा। इस अभियान का एकमात्र और परम उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी गरीब या सीमांत नागरिक बैंकिंग सुविधाओं से वंचित न रहे, हर घर तक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का कवच पहुंचे और लोगों के भीतर डिजिटल वित्तीय साक्षरता का तेजी से विकास हो सके।
चूंकि वर्तमान समय में जैसे-जैसे डिजिटल बैंकिंग का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे भोले-भाले ग्रामीणों के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी सामने आ रहे हैं। इसी गंभीर चुनौती को देखते हुए कार्यक्रम में उपस्थित साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने लोगों को ‘साइबर ठगी से बचाव’ के अचूक और व्यावहारिक उपाय बहुत ही आसान तरीके से समझाए। उन्होंने ग्रामीणों को कड़े शब्दों में आगाह किया कि बैंक का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी कभी भी फोन पर आपसे आपकी गोपनीय व्यक्तिगत जानकारी नहीं मांगता है। इसलिए किसी भी अनजान या संदिग्ध कॉल, लॉटरी के लुभावने मैसेज, अज्ञात लिंक पर क्लिक करने या अपने मोबाइल पर आने वाले गुप्त वन-टाइम पासवर्ड (OTP) को किसी भी अजनबी व्यक्ति के साथ साझा करने की भूल कतई न करें। विशेषज्ञों ने बेहद सटीक बात कही कि आज के युग में वित्तीय समावेशन केवल किसी नागरिक का बैंक खाता खुलवा देने भर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को साइबर खतरों से पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए सुलभ और पारदर्शी बैंकिंग सेवाओं से जोड़े रखना ही इस अभियान का सबसे प्रमुख और वास्तविक लक्ष्य है। देश के कोने-कोने में चल रहे इस राष्ट्रीय अभियान के तहत ग्राम स्तर पर ऐसे चौपाल नुमा शिविर आयोजित कर लोगों को सुरक्षित और आधुनिक बैंकिंग के प्रति जागरूक किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में उत्तराखंड का ग्रामीण अर्थतंत्र और अधिक सुदृढ़ व आत्मनिर्भर बनकर उभरेगा।








