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Uttarakhand News: मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में अधिकारियों को दिए प्रभावी आपदा प्रबंधन के निर्देश

On: July 2, 2026 4:37 PM
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Uttarakhand News: मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में अधिकारियों को दिए प्रभावी आपदा प्रबंधन के निर्देश
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Uttarakhand News In Hindi: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के आईटी पार्क में आयोजित राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल के दौरान अधिकारियों को हाई-टेक आपदा प्रबंधन के कड़े निर्देश दिए। इस ऐतिहासिक अवसर पर सीएम धामी ने मदरसा बोर्ड की समाप्ति के बाद अब आपदा प्रबंधन को पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए राज्य (SDMP) और सभी 13 जिलों की आपदा प्रबंधन योजनाओं (DDMP) का विमोचन किया। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के सीबीआरएनई (CBRNE) व अंडरवाटर ड्रोन जैसे आधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी के बीच सभी जिलाधिकारियों को 72 घंटे के भीतर समीक्षा रिपोर्ट सौंपने का अल्टीमेटम दिया गया है। जानिए इस विशेष ग्राउंड रिपोर्ट को।

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photo- Uttarakhand Cm Dhami

उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से संवेदनशील और आपदा संभावित राज्य में मानसून की दस्तक के साथ ही प्रशासनिक तैयारियां चरम पर पहुंच चुकी हैं। इसी कड़ी में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को राजधानी देहरादून के आईटी पार्क में आयोजित भव्य राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में शिरकत की। इस उच्च स्तरीय अभ्यास के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तराखंड के लिए आपदा प्रबंधन केवल एक सामान्य प्रशासनिक जिम्मेदारी या कागजी कोरम नहीं है, बल्कि यह हमारी सरकार की सबसे सर्वोच्च और संवेनदनशील प्राथमिकता है। उन्होंने दो टूक हिदायत दी कि मानसून के दौरान पर्वतीय क्षेत्रों में आने वाली किसी भी संभावित प्राकृतिक चुनौती, भूस्खलन या अतिवृष्टि से इंसानी जान को बचाने के लिए पूर्व तैयारी, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता, विभिन्न विभागों के बीच मजबूत आपसी समन्वय और सबसे महत्वपूर्ण बात—आधुनिक स्पेस और सैटेलाइट तकनीकों का शत-प्रतिशत व्यावहारिक उपयोग अत्यंत आवश्यक है।

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photo- Uttarakhand Cm Dhami

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आईटी पार्क में आयोजित इस राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह महा-अभ्यास हमारे संपूर्ण आपदा प्रबंधन तंत्र की वास्तविक क्षमता को परखने और उसे और अधिक धारदार व सुदृढ़ करने की दिशा में एक युगांतकारी पहल है। यह कोई साधारण प्रदर्शन या अभ्यास नहीं है, बल्कि संकट के समय सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों के बीच आपसी संचार व्यवस्था, वायरलेस प्रणालियों की गूंज, सैटेलाइट फोन की कनेक्टिविटी, राहत सामग्री और मानव संसाधनों की वास्तविक धरातलीय उपलब्धता का एक बहुत बड़ा लाइव टेस्ट है। उन्होंने मौके पर मौजूद आला अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए कि आपदा प्रबंधन को अब केवल घटना के बाद ‘राहत और बचाव’ (सर्च एंड रेस्क्यू) के पुराने ढर्रे तक सीमित न रखा जाए। इसके बजाय, अब पूरा फोकस आपदा के जोखिम को पहले ही कम करने (रिस्क रिडक्शन), एडवांस पूर्व तैयारी और पूरी तरह से अत्याधुनिक तकनीक आधारित रियल-टाइम मैनेजमेंट पर केंद्रित किया जाना चाहिए।

तकनीकी क्रांति को आपदा प्रबंधन से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि देवभूमि उत्तराखंड के सुदूरवर्ती और संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसआधारित ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ (समय से पहले चेतावनी देने वाली प्रणाली), डिजिटल लाइव मॉनिटरिंग सिस्टम, ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट ट्रैकिंग और डेटा आधारित एडवांस जोखिम आकलन जैसी दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीकों को सीधे कंट्रोल रूम से जोड़ दिया गया है। इन तकनीकों का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पहाड़ों में बादल फटने या नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने जैसी विनाशकारी घटनाओं का समय रहते बिल्कुल सटीक और एडवांस अनुमान लगाया जा सकेगा, जिससे संवेदनशील बस्तियों को समय पर खाली कराकर जन-धन की बड़ी हानि को शून्य या न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके। आपातकालीन परिस्थितियों में बिना किसी देरी के त्वरित रिस्पॉन्स के लिए राज्य की रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को आधुनिक वाहनों और हथियारों से लैस कर बेहद शक्तिशाली बनाया गया है, ताकि वे बंद रास्तों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच भी सबसे पहले पहुंचकर कमान संभाल सकें।

पर्यावरण और आपदा के अंतर्संबंधों पर बात करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने एक बेहद दूरदर्शी दृष्टिकोण सामने रखा। उन्होंने कहा कि केवल मशीनों के भरोसे आपदाओं पर काबू नहीं पाया जा सकता; इसके लिए प्रकृति का संरक्षण अनिवार्य है। राज्य सरकार वर्तमान में पारंपरिक जल स्रोतों (धारों-नौलों) के संरक्षण, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों के वैज्ञानिक अध्ययन, व्यापक स्तर पर पौधारोपण और जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से समूचे हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए मिशन मोड पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि बड़े पैमाने पर वनीकरण और पर्यावरण का संरक्षण ही प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को जड़ से कम करने का सबसे अचूक और प्रभावी माध्यम है। इसके साथ ही, उन्होंने हाल के वर्षों में उत्तराखंड में चलाए गए विभिन्न ऐतिहासिक और जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन्स का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी टीमों ने विपरीत परिस्थितियों में वैज्ञानिक सोच, त्वरित निर्णय क्षमता और बेहतरीन टीमवर्क की पूरी दुनिया के सामने एक उत्कृष्ट मिसाल पेश की है।

अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंच से एक बेहद कड़ा अल्टीमेटम भी जारी किया। उन्होंने निर्देश दिए कि इस राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल के दौरान जो भी तकनीकी कमियां, संचार संबंधी बाधाएं या समय की देरी जैसी चुनौतियां सामने आई हैं, उनका बंद कमरों में बेहद गंभीरता से फॉरेंसिक और प्रशासनिक विश्लेषण किया जाए। उन्होंने राज्य के सभी 13 जनपदों के जिलाधिकारियों (DM) को सख्त हिदायत दी कि वे अगले 72 घंटे के भीतर अपने-अपने जिलों की विस्तृत समीक्षा और कमियों को सुधारने की रिपोर्ट ‘उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण’ (USDMA) को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने पूरे प्रदेश में जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए ताकि गांव-गांव के अंतिम छोर पर बैठे प्रत्येक नागरिक और स्कूल के बच्चों को आपदा से बचने के सुरक्षा उपायों, आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों और प्राथमिक चिकित्सा सावधानियों की पूरी व्यावहारिक जानकारी उंगलियों पर याद हो।

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photo- Uttarakhand Cm Dhami

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण और गौरवशाली क्षण वह रहा, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंच से ‘उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन योजना’ (SDMP) तथा राज्य के सभी 13 जनपदों की व्यक्तिगत ‘जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं’ के महा-दस्तावेजों का विधिवत विमोचन किया। इन मास्टर योजनाओं के महत्व को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य स्तर की योजना (SDMP) जहां आपदा जोखिम को कम करने, पूर्व चेतावनी तंत्र को लागू करने, राहत, बचाव, त्वरित पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए शासन के सभी विभागों की भूमिका और उनकी कानूनी जवाबदेही को तय करती है; वहीं दूसरी ओर जिला स्तर की योजना (DDMP) प्रत्येक जनपद की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों, वहां के स्थानीय खतरों, उपलब्ध संसाधनों और त्वरित एक्शन प्लान का एक ऐसा मुकम्मल खाका प्रदान करती है जिससे आपदा की स्थिति में जिला प्रशासन बिना किसी भ्रम के तुरंत और बेहद समन्वित ढंग से काम कर सके। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के कड़े वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप तैयार किए गए ये दोनों दस्तावेज भविष्य में राज्य और जिला स्तर पर आधुनिक तकनीक के समावेश और समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन (Community Based Management) को मजबूत करने में सबसे बड़े मार्गदर्शक सिद्ध होंगे।

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समारोह के अंतिम चरण में, मुख्यमंत्री धामी ने कड़ाके की धूप और उमस के बीच आईटी पार्क परिसर में राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिवादन बल और अग्निशमन विभाग द्वारा लगाए गए अत्याधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों की विशाल प्रदर्शनी का बहुत ही बारीकी से स्थलीय अवलोकन किया। इस दौरान कमान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को प्रत्येक आधुनिक मशीन के संचालन, उसकी मारक क्षमता और मलबे व पानी के भीतर उपयोगिता की विस्तृत लाइव डेमो देकर जानकारी दी। इस भव्य प्रदर्शनी में विशेष रूप से एनडीआरएफ द्वारा प्रदर्शित किए गए ‘सीबीआरएनई’ रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु एवं विस्फोटक) आपदाओं से निपटने वाले अत्याधुनिक और रोबोटिक सूट व डिटेक्टर उपकरण पूरे पंडाल में आकर्षण और कौतूहल का मुख्य केंद्र रहे। इसके अतिरिक्त, गहरे पानी में डूबे जहाजों और शवों को खोजने वाले डीप डाइविंग सेट, रात के घने अंधेरे में मीलों दूर देखने वाले नाइट विजन कैमरे, मलबे के भीतर दबे इंसानों के शरीर की गर्मी को भांपने वाले थर्मल इमेजिंग कैमरे, कंक्रीट और लोहे को सेकंडों में काटने वाले विभिन्न प्रकार के भारी हाइड्रोलिक कटर, पानी के भीतर रेस्क्यू टीमों से संपर्क साधने वाला अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम, पानी के नीचे गोता लगाने वाले हाई-टेक अंडरवाटर ड्रोन तथा समुद्र व झीलों की गहराई नापने वाले सोनार सिस्टम (Sonar System) सहित सैकड़ों करोड़ों की लागत वाले आधुनिक उपकरणों को देखकर मुख्यमंत्री बेहद गद्गद हुए। उन्होंने जांबाजों की हौसलाअफजाई करते हुए कहा कि हमारी सरकार का अंतिम उद्देश्य केवल आपदा आने के बाद राहत सामग्री बांटना नहीं है, बल्कि उत्तराखंड को पूरे देश का सबसे सक्षम, पूरी तरह तकनीक से लैस और अटूट जनभागीदारी पर आधारित एक ऐसा ‘रोल मॉडल’ बनाना है, जिसकी मिसाल पूरी दुनिया दे।

(For more news apart from Chief Minister directs officials for effective disaster management during state-level pre-monsoon mock drill Latest News in hindi, stay tuned to Mdano News In Hindi)

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