Dehradun News: देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने राजधानी में भारी बारिश और संभावित आपदा की परिस्थितियों को देखते हुए कड़े कदम उठाए हैं। आपदा कंट्रोल रूम के औचक निरीक्षण के बाद उन्होंने एनआईसी सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी उप जिलाधिकारियों और लोनिवि, पीएमजीएसवाई व एनएच के अधिकारियों के साथ आपातकालीन समीक्षा बैठक की। नदियों में 1 जुलाई से 30 सितंबर तक खनन पर पूरी तरह रोक लगाने, सड़कों के गड्ढे भरने, नदी किनारे के 29 संवेदनशील क्षेत्रों के 3700 परिवारों की मॉनिटरिंग और दुर्गम क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को एडवांस में सुरक्षित शिफ्ट करने जैसे बेहद कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। जानिए सुशासन की इस पूरी विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट को।
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून सहित पूरे जनपद में मानसून की भारी बारिश के शुरू होते ही जिला प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। पहाड़ों और मैदानी इलाकों में अतिवृष्टि के कारण पैदा होने वाली संभावित आपदाओं, जलभराव और भूस्खलन की गंभीर परिस्थितियों से निपटने के लिए देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने खुद कमान संभाल ली है। जिलाधिकारी ने आज बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक जिला आपदा कंट्रोल रूम का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान उन्होंने वहां तैनात कर्मचारियों की मुस्तैदी, वायरलेस सेट, सैटेलाइट संचार प्रणालियों और आपातकालीन व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को सख्त लहजे में हिदायत दी कि आपदा कंट्रोल रूम को प्रतिदिन चौबीसों घंटे पूरी सक्रियता और अलर्टनेस के साथ संचालित किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि जिले के किसी भी कोने से आपदा या जलभराव की कोई भी सूचना प्राप्त होती है, तो उस पर बिना एक सेकंड गंवाए तत्काल प्रभावी और धरातलीय कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, इसमें किसी भी प्रकार की कोताही असहनीय होगी।
कंट्रोल रूम का मुआयना करने के तुरंत बाद जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान सीधे एनआईसी (NIC) सभागार पहुंचे, जहां से उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद के सभी संबंधित रेखीय विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों तथा सभी तहसीलों के उप जिलाधिकारियों (SDMs) के साथ एक लंबी और महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस आपातकालीन बैठक में बारिश के कारण बंद होने वाली सड़कों की स्थिति, ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में पेयजल की निर्बाध आपूर्ति, बिजली लाइनों की सुरक्षा, शहरी इलाकों में होने वाले जलभराव की निकासी, आपदा प्रबंधन की रणनीतियों तथा अन्य आवश्यक मूलभूत व्यवस्थाओं की एक-एक कर विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने धरातल पर काम कर रहे सभी अभियंताओं और अधिकारियों को मानसून के दौरान जनता की समस्याओं को प्राथमिकता पर हल करने के आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
सड़कों की खस्ताहाली और गड्ढों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग (PWD), पीएमजीएसवाई, राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) और अन्य सभी निर्माणदायी संस्थाओं को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहर और ग्रामीण इलाकों में सीवरेज, पेयजल या अन्य विकास कार्यों के लिए जो भी सड़कें खोदी गई थीं, उनकी तत्काल प्रभाव से युद्धस्तर पर मरम्मत की जाए और उन्हें हर हाल में सुरक्षित व सुगम बनाया जाए। जिलाधिकारी ने साफ चेतावनी दी कि मानसून के इस दौर में किसी भी मुख्य या संपर्क मार्ग पर खतरनाक गड्ढे या असुरक्षित स्थिति बिल्कुल नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक लहजे में सचेत करते हुए कहा कि यदि किसी भी विभागीय लापरवाही या अधूरी छोड़ी गई सड़क के कारण कोई अप्रिय दुर्घटना घटित होती है, तो इसके लिए संबंधित विभाग के अधिकारी और कार्यदायी संस्था को सीधे तौर पर जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ कठोरतम विधिक और दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इस उच्च स्तरीय बैठक में जिलाधिकारी ने पर्यावरण संरक्षण और मानसून के दौरान नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए एक और बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया। उन्होंने जिले के सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे तुरंत अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में संचालित होने वाले सभी स्टोन क्रशरों की स्थिति का स्थलीय सत्यापन (क्रॉस-चेक) करें और यह लिखित रूप से प्रमाणित करें कि ये क्रशर वर्तमान में पूरी तरह बंद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देवभूमि की नदियों की सुरक्षा और बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए आगामी 01 जुलाई से लेकर 30 सितंबर तक पूरे तीन महीनों के लिए नदियों में किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि (माइनिंग एक्टिविटी) पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी। जिलाधिकारी ने पुलिस और परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि यदि इस प्रतिबंधित अवधि में कोई भी वाहन अवैध रूप से खनिज या रेत-बजरी का परिवहन करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ तत्काल विधिक मुकदमा दर्ज कर संबंधित वाहन को सीज करने की सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पहाड़ी गधेरों और नदियों के किनारे बने पर्यटन स्थलों पर वीकेंड के दौरान उमड़ने वाली पर्यटकों की भारी भीड़ को देखते हुए जिलाधिकारी ने सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी नदी तटीय पर्यटन स्थलों पर तत्काल ‘वार्निंग सायरन’ और अत्याधुनिक सीसीटीवी (CCTV) कैमरे स्थापित किए जाएं। इन कैमरों की सीधी मॉनिटरिंग नजदीकी पुलिस थाने और कंट्रोल रूम से की जाए ताकि पहाड़ों में होने वाली भारी बारिश के कारण यदि अचानक नदियों का जलस्तर बढ़ता है, तो समय रहते वार्निंग सायरन बजाकर पर्यटकों और स्थानीय दुकानदारों को सतर्क किया जा सके और उन्हें सुरक्षित निकाला जा सके।
बैठक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने मानवीय संवेदनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को एक बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जनपद के दूरदराज और बेहद दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाली ऐसी सभी गर्भवती महिलाओं को पहले से ही चिन्हित किया जाए, जिनकी डिलीवरी (प्रसव) की संभावित तिथि आगामी एक सप्ताह से लेकर दस दिनों के भीतर की है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि ऐसी सभी माताओं को भारी बारिश के कारण रास्ते बंद होने की स्थिति से बचाने के लिए, प्रसव की तिथि से पहले ही सुरक्षित एम्बुलेंस के माध्यम से किसी नजदीकी सरकारी अस्पताल या सुरक्षित स्थान पर ठहराने की शत-प्रतिशत पुख्ता व्यवस्था की जाए, ताकि ऐन वक्त पर आपातकालीन स्थिति में किसी भी प्रसूता या नवजात को कोई कठिनाई न झेलनी पड़े।
बरसात के मौसम में पनपने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए जिलाधिकारी ने नगर निगम देहरादून, ऋषिकेश सहित जनपद के सभी छोटे-बड़े नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों को कड़ा अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए सभी वार्डों और मोहल्लों में रोस्टर बनाकर नियमित रूप से एंटी-लावा फोगिंग और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराया जाए। इसके साथ ही, सुरक्षा और कानून व्यवस्था के दृष्टिगत उन्होंने निर्देश दिए कि रात के अंधेरे में किसी भी गली या सड़क पर अंधेरा न रहे, इसके लिए सभी खराब स्ट्रीट लाइटों को तत्काल बदला जाए और जिन संवेदनशील व अंधेरे क्षेत्रों में अभी तक लाइटें उपलब्ध नहीं हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर नए पोल और नई स्ट्रीट लाइटें स्थापित की जाएं।
बाढ़ और जलभराव के लिहाज से बेहद संवेदनशील बस्तियों का जिक्र करते हुए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को अग्रिम मोर्चे पर काम करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि नदी और बड़े बरसाती नालों के किनारे झुग्गी-झोपड़ियों और कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों का तुरंत वार्डवार चिन्हीकरण कर उनकी एक प्रामाणिक सूची तैयार की जाए। भारी वर्षा या जलस्तर बढ़ने की स्थिति में इन लोगों को बिना किसी अफरा-तफरी के सुरक्षित राहत शिविरों या सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित करने की पूरी तैयारी पहले से मुकम्मल होनी चाहिए। गौरतलब है कि जिला प्रशासन और नगर निगम ने संभावित आपदा के दृष्टिगत जलभराव की मार झेलने वाले और नदी किनारे स्थित ऐसे कुल 29 अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित किया है। इन 29 इलाकों के भीतर लगभग 3700 मध्यम व गरीब परिवार निवास करते हैं और कुल 900 पक्के व कच्चे घर शामिल हैं। जिला प्रशासन द्वारा इन सभी 29 संवेदनशील क्षेत्रों की चौबीसों घंटे विशेष रूप से सैटेलाइट और मैन्युअल मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि किसी भी अनहोनी को समय रहते टाला जा सके।
बैठक के अंतिम सत्र में, मानसून की बारिश के दौरान भी मानकों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से किए जा रहे सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों की प्राप्त जन-शिकायतों को जिलाधिकारी ने अत्यधिक गंभीरता से लिया। उन्होंने लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई और राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिशासी अभियंताओं को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देशित किया कि वर्षा काल के दौरान यदि कहीं भी मानकों के विपरीत, घटिया सामग्री का उपयोग कर या भारी बारिश के बीच डामरीकरण (सड़क निर्माण) संबंधी कोई भी शिकायत या वीडियो साक्ष्य प्राप्त होता है, तो संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदार कनिष्ठ अभियंता (JE), सहायक अभियंता (AE) और ठेकेदार कार्यदायी संस्था के विरुद्ध सीधे तौर पर कठोर दंडात्मक और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि विकास कार्यों में गुणवत्ता और जनता के पैसे का दुरुपयोग किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।







