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Uttarakhand Trout Fish Export News: उत्तराखंड को बड़ी उपलब्धि, पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में ट्राउट मछली का निर्यात

On: June 26, 2026 6:08 PM
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Uttarakhand Trout Fish Export News: उत्तराखंड को बड़ी उपलब्धि, पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में ट्राउट मछली का निर्यात
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Uttarakhand Trout Fish Export News: उत्तराखंड के मत्स्य पालन क्षेत्र ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है। राज्य में उत्पादित हिमालयन ट्राउट मछली का पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार (नेपाल) में सफलतापूर्वक निर्यात किया गया है। कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने प्रेस वार्ता में विभाग के बजटीय विस्तार, महिला मत्स्य पालकों की बढ़ती संख्या और गल्फ फूड एक्सपो दुबई के माध्यम से वैश्विक स्तर पर होने वाले आगामी समझौतों की विस्तृत जानकारी साझा की।

उत्तराखंड के कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के इतिहास में एक बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और जड़ी-बूटियों के लिए दुनिया भर में मशहूर देवभूमि उत्तराखंड ने अब मत्स्य पालन (Fिशरीज) के क्षेत्र में एक ऐसी बड़ी छलांग लगाई है, जिसने राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वैश्विक मंच पर स्थापित कर दिया है। प्रदेश में पहली बार यहां के शुद्ध हिमालयी जल में उत्पादित होने वाली बहुमूल्य ‘हिमालयन ट्राउट मछली’ (Himalayan Trout Fish) का सफलतापूर्वक अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात किया गया है। इस अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कदम से न केवल राज्य के सुदूरवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले मत्स्य पालकों को सीधा और बड़ा आर्थिक लाभ मिलना शुरू हुआ है, बल्कि उत्तराखंड की ब्रांड वैल्यू को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई और विशिष्ट पहचान भी हासिल हुई है। यह सफलता दर्शाती है कि अगर सही नीति और सरकारी प्रोत्साहन मिले, तो पहाड़ों का पानी और जवानी दोनों ही राज्य के विकास में गेमचेंजर साबित हो सकते हैं।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि की विस्तृत और प्रामाणिक जानकारी देने के लिए राजधानी देहरादून स्थित मीडिया सेंटर में एक विशेष प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बेहद उत्साह के साथ बताया कि यह अंतरराष्ट्रीय निर्यात राज्य की तीन प्रमुख मत्स्यजीवी सहकारी समितियों के सामूहिक प्रयासों और उनके द्वारा उत्पादित उच्च गुणवत्ता वाली ट्राउट मछली के कारण संभव हो पाया है। उन्होंने इस पूरे सफर की प्रक्रिया को समझाते हुए कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय तालाबों से निकाली गई इन मछलियों को सबसे पहले विशेष कोल्ड-चेन परिवहन के माध्यम से गुजरात के तटीय शहर वेरावल भेजा गया। वेरावल में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अत्याधुनिक प्रोसेसिंग और पैकेजिंग की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसके बाद इसे नेपाल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में सफलतापूर्वक निर्यात कर दिया गया।

कैबिनेट मंत्री ने इस निर्यात से जुड़े आर्थिक आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि इस पहले ही अंतरराष्ट्रीय कंसाइनमेंट से राज्य के तैंतीस (33) स्थानीय मत्स्य पालकों को लगभग साढ़े तेईस लाख (23.50 लाख) रुपये की भारी-भरकम शुद्ध आय सीधे प्राप्त हुई है। इस पहले प्रयास को पूरी तरह सफल और सुगम बनाने के लिए उत्तराखंड के मत्स्य विभाग ने भी अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी। विभाग ने मत्स्य पालकों को प्रोत्साहित करने और उनके वित्तीय जोखिम को कम करने के लिए मछलियों की हार्वेस्टिंग (तालाब से निकालने), उनकी विशेष पैकेजिंग और सुरक्षित परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन) पर पांच लाख चालीस हजार (5.40 लाख) रुपये की सीधी वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई। सरकार की इस समयबद्ध मदद के कारण ही मत्स्य पालक बिना किसी आर्थिक मानसिक दबाव के अपनी उपज को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में कामयाब रहे।

सौरभ बहुगुणा ने भविष्य की रणनीतियों पर प्रकाश डालते हुए एक और अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर में आयोजित हुए विश्व प्रसिद्ध ‘गल्फ फूड एक्सपो’ (Gulf Food Expo) के दौरान उत्तराखंड के मत्स्य विभाग की एक उच्च स्तरीय टीम ने शिरकत की थी। इस वैश्विक प्रदर्शनी के दौरान विभाग ने दुनिया भर से आए बड़े अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, होटल इंडस्ट्री के दिग्गजों और फूड चेन संचालकों से सीधा संपर्क स्थापित किया है। अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने उत्तराखंड की ठंडे पानी में पलने वाली जैविक ट्राउट मछली में गहरी रुचि दिखाई है, जिससे आने वाले समय में खाड़ी देशों (मिडिल ईस्ट) और यूरोपीय बाजारों में भी राज्य से मछली निर्यात की संभावनाएं बेहद मजबूत हो गई हैं।

इसके साथ ही, मंत्री ने राज्य के भीतर मौजूद घरेलू बाजार और सुरक्षा बलों के साथ चल रहे पुराने समझौतों की प्रगति का भी ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के साथ हुए एक ऐतिहासिक समझौते के तहत उत्तराखंड का मत्स्य विभाग लगातार सीमा पर तैनात जवानों के लिए पौष्टिक भोजन के रूप में ट्राउट मछली की निर्बाध आपूर्ति कर रहा है। इस दीर्घकालिक समझौते के तहत अब तक दो करोड़ दस लाख (2.10 करोड़) रुपये से अधिक मूल्य की कुल पैंतालीस दशमलव दस (45.10) मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाली ट्राउट मछली की सफल आपूर्ति की जा चुकी है, जो देश की सेवा में लगे जवानों के स्वास्थ्य और स्थानीय आर्थिकी दोनों के लिए एक बेहतरीन मिसाल है।

कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा द्वारा प्रस्तुत किए गए विकास के तुलनात्मक आंकड़े यह साफ तौर पर दिखाते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक मूक क्रांति हुई है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 तक समूचे राज्य में महज एक हजार ग्यारह (1,011) पंजीकृत मत्स्य पालक थे, लेकिन सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण और सब्सिडी कार्यक्रमों के कारण यह संख्या आज की तारीख में असाधारण रूप से बढ़कर पंद्रह हजार छह सौ सत्तावन (15,657) के पार पहुंच गई है। इस आंकड़े में सबसे सुखद और क्रांतिकारी पहलू यह है कि इनमें तीन हजार पांच सौ चौरासी (3,584) महिला मत्स्य पालक भी शामिल हैं। पहाड़ों में महिलाओं का इस व्यवसाय से जुड़ना सीधे तौर पर महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण परिवारों की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

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इस व्यापक जनभागीदारी का सीधा असर राज्य के कुल मत्स्य उत्पादन और उसकी विकास दर पर भी देखने को मिला है। कुछ वर्ष पहले तक जहां राज्य में मत्स्य उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर महज दो (2) प्रतिशत के आसपास हुआ करती थी, वह अब कई गुना छलांग लगाकर ग्यारह (11) प्रतिशत के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। हालिया वित्तीय वर्ष 2026-27 के संकलित आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल ग्यारह हजार आठ सौ पांच (11,805) मीट्रिक टन मत्स्य का बंपर उत्पादन दर्ज किया गया है, जिसका अनुमानित बाजार मूल्य लगभग एक सौ पैंसठ करोड़ (165 करोड़) रुपये आंका गया है। यह टर्नओवर यह साबित करने के लिए काफी है कि मत्स्य पालन अब उत्तराखंड में एक मुख्यधारा का बड़ा उद्योग बन चुका है।

इस पूरी सफलता के पीछे राज्य सरकार द्वारा विभाग को दिए गए भारी बजटीय समर्थन का भी बहुत बड़ा हाथ रहा है। जहां वर्ष 2021-22 में मत्स्य विभाग का कुल वार्षिक बजट महज पचपन दशमलव छिहत्तर करोड़ (55.76 करोड़) रुपये हुआ करता था, वहीं वर्तमान सरकार के विजनरी प्रयासों के चलते वर्ष 2026-27 में यह बजट पांच गुना से भी अधिक बढ़कर दो सौ इकसठ करोड़ (261 करोड़) रुपये से अधिक के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। बजट में हुई इस भारी वृद्धि के कारण ही राज्य में आधुनिक हैचरी, कोल्ड स्टोरेज और मत्स्य तालाबों का जाल बिछाना संभव हो पाया है। पिछले चार वर्षों के भीतर इस क्षेत्र ने रोजगार सृजन के मामले में भी नए रिकॉर्ड बनाए हैं, जिसके तहत कुल पांच हजार छह सौ छियालीस (5,646) स्थानीय लोगों को मत्स्य पालन के क्षेत्र में सीधा रोजगार मिला है, जबकि विभाग के सुचारू संचालन के लिए तैंतीस (33) नियमित सरकारी नियुक्तियां भी की गई हैं। जिला प्रशासन और सरकार का लक्ष्य अब इस गति को और तेज करना है ताकि उत्तराखंड देश का अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्य बन सके।

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