Uttarakhand Police News: मंगलवार को उत्तराखंड के ऋषिकेश में पुलिस विभाग के बड़े अधिकारी की दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। बता दे कि इस हादसे में शिवपुरी पुलिस चौकी के प्रभारी विनोद कुमार शर्मा की मृत्यु होने के बाद पुलिस विभाग में अशोक की लहर देखने को मिली हालांकि इस हादसे के बाद परिवार का भी रो-रो कर बुरा हाल है।
कैसे हुआ हादसा
मामले में पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक रानी पोखरी निवासी पुलिस अधिकारी विनोद कुमार शर्मा बीती रात इस हादसे का शिकार हुए। जानकारी में सामने आया कि उनका वाहन देर रात गहरी खाई में गिर गया था जब वह शिवपुरी चौकी की ओर जा रहे थे अपने काम को खत्म करने के बाद वहां शिवपुरी चौकी के पास बेकाबू होकर हादसे का शिकार हो गया और गहरी खाई में जा गिरा।
विनोद कुमार शर्मा का कैसा रहा जीवन
पुलिस करनी विनोद कुमार शर्मा न केवल पुलिस विभाग में अपने शानदार कार्यों के लिए जाने जाते थे बल्कि वह आम जनता के बीच भी काफी लोकप्रिय थे। ऐसे में आपको सुनकर हैरानी होगी कि विनोद कुमार शर्मा एक भारतीय सेवा से रिटायर होने के बाद पुलिस विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे थे। ऐसे में उनके निधन के बाद से ही परिवार का र-रो कर बुरा हाल है। उन्होंने भारतीय सेवा के साथ-साथ पुलिस विभाग में अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभाई है। जिसमें उन्होंने कैलाश गेट चौकी पर प्रभारी के तौर पर कार्य भी किया है।

पैतृक गांव में पहुंचा शव परिवार का रो-रो कर बुरा हाल
बता दे की ऋषिकेश की शिवपुरी चौकी में तैनात चौकी प्रभारी विनोद शर्मा की ड्यूटी से लौटते वक्त हुई मौत के बाद परिवार का रो रो कर बुरा हाल था वही आज पत्रक शरीर जैसे ही उनकी आवाज स्थान पर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया वहीं आसपास के कई लोगों ने मौके पर पहुंचकर परिवार को सांत्वना दी।
राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
बता दें कि उनको पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। वहीं विनोद शर्मा डोईवाला की रानी पोखरी के निवासी थे। वहीं इस हादसे की अगर लोगों को जल्द ही जानकारी मिल पाती तो शायद इस हादसे में उनका जान बच पाती, लेकिन इस हादसे की जानकारी राहगीरों की सूचना पर सुबह घटना का चला पता, जिसके बाद पुलिस ने खाई से शव निकालकर AIIMS ऋषिकेश भेजा। बता दें कि इस हादसे के बाद से ही पुलिस महकमे में शोक की लहर है।

हादसे के बाद से परिवार में मातम
चौकी प्रभारी विनोद शर्मा को देखकर कोई नहीं कह सकता की वे इस तरह से दुनिया को अचानक छोड़कर जा सकते है। ऐसे में उनकी आखरी तस्वीर को भी अगर आप गौर से देखेंगे तो आप पाएंगे की उनको अपने देश और अपने काम से बेहद लगाव था। वहीं देश की सेवा करने के बाद से वे घर पर नहीं बैठे बल्कि अपने देश को सेवाएं देने के लिए पुलिस विभाग में शामिल हुए, जिसके बाद से वे ऋषिकेश की शिवपुरी पुलिस चौकी में तैनात, वहीं परिवार और उनके चाहने वालों को क्या पता था की यहां पर कार्य के दौरान वे अचान सङी को छोड़ कर चले जाएंगे। वहीं आज जब उनके घर उनका पार्थीव देह को लाया गया तो परिवार का हर शख्स रो रो कर बेहाल नजर आया, वहीं जानकारी के मुताबिक वे अपने पीछे अपने बच्चे पत्नी और माता पिता को छोड़ गए है। ऐसे में उनके बुजुर्ग माता पिता भी इस दौरान बिलख-बिलख कर रोते नजर आए, जिनको अपनी संवेदनाए देने के लिए पुलिस विभाग के साथ कई लोग वहा मौजूद नजर आए।
विनोद कुमार शर्मा में थी देशभक्ति
भारतीय सेना की गौरवशाली गढ़वाल राइफल्स में 15 वर्षों तक देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले विनोद कुमार शर्मा की कहानी कर्तव्य, समर्पण और अटूट देशभक्ति की एक अनुपम मिसाल है। सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनके भीतर का सिपाही शांत नहीं बैठा, बल्कि उन्होंने जनसेवा का एक नया मार्ग चुना। साल 2016 में वह देवभूमि की सुरक्षा का संकल्प लेकर उत्तराखंड पुलिस में उप निरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) के पद पर भर्ती हुए। एक फौजी से पुलिस अधिकारी बनने का उनका यह सफर समाज के प्रति उनके गहरे लगाव और निष्ठा को दर्शाता है।

सेना से पुलिस तक का सफर
विनोद कुमार शर्मा का शुरुआती जीवन और सेना में बिताए गए 15 साल अनुशासन, कठोर प्रशिक्षण और विषम परिस्थितियों से जूझने की कला से भरे रहे। गढ़वाल राइफल्स, जो अपनी बहादुरी और गौरवशाली इतिहास के लिए जानी जाती है, ने उन्हें एक ऐसा दृष्टिकोण दिया जहां ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ ही जीवन का एकमात्र ध्येय बन गया। देश के दुर्गम बॉर्डर इलाकों में मुस्तैदी से अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद जब वह सेना से सेवानिवृत्त हुए, तो अधिकांश लोग एक शांत और आरामदेह जीवन की तलाश करते हैं। लेकिन विनोद शर्मा ने अपनी ऊर्जा और अनुभव को उत्तराखंड राज्य की कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने में लगाने का फैसला किया।
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साल 2016 उत्तराखंड पुलिस के लिए भी एक महत्वपूर्ण वर्ष था, जब विनोद कुमार शर्मा जैसे अनुभवी और अनुशासित पूर्व सैनिक ने उप निरीक्षक के रूप में खाकी वर्दी को धारण किया। सेना की ‘काली टोपी’ से पुलिस की ‘नीली-लाल कैप’ तक का यह बदलाव केवल वर्दी का नहीं, बल्कि कार्यशैली का भी था। जहां सेना में दुश्मन के खिलाफ सीधी रणनीति बनानी होती है, वहीं पुलिस सेवा में समाज के भीतर रहकर नागरिकों की सुरक्षा, कानून व्यवस्था बनाए रखना और अपराधों की रोकथाम करना मुख्य चुनौती होती है।
समाज के लिए प्रेरणास्रोत
विनोद कुमार शर्मा का यह सफर केवल एक नौकरी से दूसरी नौकरी में जाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह उन युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो देश और समाज की सेवा करना चाहते हैं। वह यह साबित करते हैं कि वर्दी का रंग चाहे कोई भी हो—चाहे वह सेना की ऑलिव ग्रीन हो या पुलिस की खाकी—मूल भावना हमेशा एक ही रहती है, और वह है ‘सुरक्षा और सेवा’। 15 साल देश की सरहद की हिफाजत करने के बाद, साल 2016 से उत्तराखंड की आंतरिक सुरक्षा में तैनात रहकर वह आज भी पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी सेवा दे रहे हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि देश की सेवा करने की कोई उम्र या सीमा नहीं होती, बस दिल में जज्बा होना चाहिए।







