Cockroach Janta Party Protest News In Hindi: सोशल मीडिया पर करोड़ों युवाओं की आवाज बन चुकी ‘कॉकरोच जनता पार्टी‘ (CJP) अब पूरी तरह से जमीनी आंदोलन का रूप लेने जा रही है। वर्चुअल दुनिया में मीम्स और व्यंग्य के जरिए सुर्खियां बटोरने के बाद इस अनूठे संगठन ने राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वे आगामी 6 जून को अमेरिका से भारत लौट रहे हैं। उन्होंने देश भर के छात्रों और अपने फॉलोअर्स से एक भावुक अपील करते हुए कहा है कि वे 6 जून की सुबह उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर मिलें, जहां से वे सब मिलकर सीधे विरोध प्रदर्शन के लिए आगे बढ़ेंगे।
नीट पेपर लीक और देश की परीक्षा प्रणाली के खिलाफ बड़ा मोर्चा
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) और इंस्टाग्राम पर एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनके भारत लौटने और इस बड़े आंदोलन को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य देश के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोकना है। कॉकरोच जनता पार्टी इस प्रदर्शन के जरिए देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल राजीनामे की मांग कर रही है।
अभिजीत ने कहा कि पिछले कुछ समय में नीट (NEET) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा के पेपर लीक होने, परिणाम में धांधली होने और इसके कारण कई परेशान छात्रों द्वारा आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम उठाने की खबरों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर इतने दिनों से आवाज उठाने के बाद भी जब सरकार की तरफ से कोई ठोस जवाबदेही तय नहीं की गई, तब उन्होंने खुद भारत आकर इस लड़ाई को जमीनी स्तर पर लड़ने का फैसला किया।
एक करोड़ से अधिक छात्रों के भविष्य का सवाल
अपने वीडियो संबोधन में अभिजीत दिपके ने देश के विभिन्न परीक्षा बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं का डेटा साझा करते हुए व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ कुछ हजार बच्चों की नहीं है, बल्कि देश के एक करोड़ से अधिक युवाओं के भविष्य से जुड़ी हुई है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया:
- नीट (NEET): परीक्षा में शामिल होने वाले 22 लाख चिकित्सा अभ्यर्थी इस समय भयंकर मानसिक तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।
- सीबीएसई (CBSE): बोर्ड परीक्षाओं के 17 लाख छात्र भी प्रशासनिक लचरता के कारण परेशान हैं।
- सीयूईटी (CUET): विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा के 16 लाख छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
- एसएससी-जीडी (SSC-GD): देश की सेवा में जाने का सपना देख रहे 40 लाख भर्ती उम्मीदवार सालों से व्यवस्था की कमियों का दंश झेल रहे हैं।
फाउंडर का कहना है कि जब इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की जिंदगी के साथ मजाक किया जा रहा हो और इतनी बड़ी गलतियों के बाद भी शिक्षा मंत्रालय का कोई व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने को तैयार न हो, तो यह साबित होता है कि देश में जवाबदेही पूरी तरह खत्म हो चुकी है।
‘एयरपोर्ट पर मिलो और फिर पार्लियामेंट स्ट्रीट चलेंगे’
आंदोलन की रूपरेखा तय करते हुए अभिजीत ने अपने फॉलोअर्स को एक स्पष्ट और व्यवस्थित संदेश दिया है। उन्होंने कहा, “मैंने तय किया है कि मैं 6 जून, शनिवार की सुबह दिल्ली पहुंच रहा हूं। आप सभी समर्थक और छात्र मुझे दिल्ली एयरपोर्ट पर मिलें। वहां एकत्रित होने के बाद हम सब मिलकर सबसे पहले पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे और लोकतांत्रिक तरीके से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की आधिकारिक अनुमति मांगेंगे।”
अभिजीत ने साफ किया कि उनका यह पूरा आंदोलन पूरी तरह से गैर-हिंसक, संवैधानिक और गांधीवादी विचारधारा पर आधारित होगा। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को गलत नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाने का अधिकार देता है। इसी अधिकार का उपयोग करते हुए वे शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को बुलंद करेंगे।

गिरफ्तारी का डर नहीं, अमेरिका के आकर्षक जॉब ऑफर्स को ठुकराया
वीडियो में अभिजीत ने अपनी व्यक्तिगत चिंताओं और देश के प्रति अपने प्रेम को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके दोस्त और विशेषकर उनके माता-पिता इस बात से बेहद डरे हुए हैं कि जैसे ही वे भारत की धरती पर कदम रखेंगे, सरकार उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज सकती है।
इस डर का जवाब देते हुए अभिजीत ने कहा, “मेरा परिवार भयभीत है कि मुझे जेल में डाल दिया जाएगा। लेकिन मैं महात्मा गांधी, डॉ. बी.आर. आंबेडकर, शहीद भगत सिंह और जवाहरलाल नेहरू का बड़ा प्रशंसक हूं। मुझे भारत के संविधान और लोकतंत्र पर अटूट भरोसा है। आखिर हम कब तक डर के साए में जीते रहेंगे? यह देश किसी एक राजनीतिक दल की जागीर नहीं है, यह हम सबका है।”

अभिजीत ने यह भी खुलासा किया कि बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में अपनी मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद उन्हें अमेरिका में कई बेहतरीन और ऊंचे पैकेज वाले जॉब ऑफर्स मिल रहे थे। लेकिन उन्होंने उन सभी आकर्षक प्रस्तावों को ठुकरा दिया क्योंकि वे इस संकट की घड़ी में अपने देश के छात्रों के साथ खड़ा होना चाहते थे। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि वे जाति, धर्म और राजनीति से ऊपर उठकर इस छात्र आंदोलन का हिस्सा बनें।












