Nainital DSA Cancels Eid Namaz Ground News: उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल नैनीताल से एक बड़ा और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ के ऐतिहासिक फ्लैट्स मैदान में ईद-उल-जुहा (बकरीद) की नमाज अदा करने को लेकर पैदा हुआ विवाद अब तूल पकड़ चुका है। नैनीताल की खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र माने जाने वाले इस मैदान में नमाज पढ़ने को लेकर पहले जिला क्रीड़ा संघ यानी डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स एसोसिएशन (डीएसए) ने मुस्लिम समुदाय को आधिकारिक तौर पर अनुमति दे दी थी। हालांकि, स्थानीय जनता, खेल प्रेमियों और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के भारी विरोध के बाद प्रशासन और डीएसए बैकफुट पर आ गए। इस चौतरफा दबाव के चलते अनुमति मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर डीएसए ने अपने कदम पीछे खींच लिए और नमाज के लिए दी गई मंजूरी को खुद ही निरस्त कर दिया। इस फैसले के बाद से शहर में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया गया है और स्थानीय स्तर पर इस पर चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद और डीएसए का पहला कदम
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब नैनीताल के मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों और ईदगाह कमेटी ने आगामी ईद-उल-जुहा की नमाज के लिए जगह की कमी का हवाला देते हुए जिला क्रीड़ा संघ (डीएसए) से संपर्क किया था। कमेटी का तर्क था कि त्यौहार के दिन नमाजियों की संख्या काफी अधिक हो जाती है, जिसके कारण पारंपरिक मस्जिदों और ईदगाह परिसर में जगह छोटी पड़ जाती है। ऐसे में नमाजियों की सुविधा और शहर में ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए उन्होंने फ्लैट्स मैदान के एक हिस्से का उपयोग करने की अनुमति मांगी थी। खेल और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली संस्था डीएसए ने इस प्रार्थना पत्र पर विचार करते हुए मानवीय आधार और सामाजिक सौहार्द का हवाला देकर मैदान में नमाज अदा करने की लिखित अनुमति जारी कर दी। जैसे ही अनुमति पत्र सार्वजनिक हुआ, वैसे ही यह खबर पूरे नैनीताल शहर में आग की तरह फैल गई।
स्थानीय जनता और खेल प्रेमियों का तीखा विरोध
डीएसए द्वारा नमाज की अनुमति दिए जाने की खबर मिलते ही स्थानीय नागरिकों, खेल प्रेमियों और विभिन्न हिंदूवादी व सामाजिक संगठनों ने इस पर अपनी तीव्र आपत्ति दर्ज कराई। विरोध कर रहे लोगों और खिलाड़ियों का कहना था कि फ्लैट्स मैदान शुद्ध रूप से खेल गतिविधियों, बच्चों के अभ्यास और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए आरक्षित है। इस मैदान का रख-रखाव खिलाड़ियों के भविष्य को ध्यान में रखकर किया जाता है, इसलिए इसे किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजनों या सामूहिक प्रार्थनाओं के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। विरोध प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि खेल के मैदान का राजनीतिकरण या धार्मिक उपयोग शुरू हुआ, तो इससे शहर का माहौल और शांत वादियों की कानून व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। खेल प्रेमियों ने तर्क दिया कि पूर्व में भी इस मैदान को केवल खेल आयोजनों तक ही सीमित रखने की मांग की जाती रही है, ऐसे में अचानक लिया गया यह फैसला परंपराओं के विपरीत है।
कुछ ही घंटों में बैकफुट पर आया प्रशासन और लिया यू-टर्न
मैदान के बाहर और सोशल मीडिया पर बढ़ते जनाक्रोश तथा विरोध प्रदर्शनों की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमा भी सतर्क हो गया। खुफिया विभाग और स्थानीय पुलिस ने कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताते हुए अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी। बढ़ते दबाव और माहौल की संवेदनशीलता को भांपते हुए जिला क्रीड़ा संघ की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई। बैठक में जनता के विरोध और शहर की शांति व्यवस्था को सर्वोपरि मानते हुए डीएसए ने अपने पहले के आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया। अनुमति जारी होने के महज कुछ ही घंटों के भीतर डीएसए ने दूसरा पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि अपरिहार्य कारणों और स्थानीय विरोध को देखते हुए फ्लैट्स मैदान में ईद की नमाज के लिए दी गई अनुमति को वापस लिया जाता है। इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय से अपील की गई कि वे नमाज के लिए किसी अन्य पारंपरिक या वैकल्पिक स्थान का चयन करें।
शहर में सुरक्षा व्यवस्था सख्त और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील
इस पूरे विवाद और यू-टर्न के बाद नैनीताल शहर में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। संवेदनशील इलाकों और फ्लैट्स मैदान के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल और पीएसी की तैनाती कर दी गई है। कोतवाली पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार दोनों पक्षों के संपर्क में हैं ताकि आगामी त्यौहार को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया जा सके। पुलिस क्षेत्राधिकारी और कोतवाल ने स्थानीय लोगों, व्यापारी मंडलों और धार्मिक कमेटियों के साथ बैठकें की हैं और सभी से अफवाहों पर ध्यान न देने तथा सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। सोशल मीडिया सेल को भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की भ्रामक या भड़काऊ पोस्ट साझा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके। प्रशासन का कहना है कि नैनीताल हमेशा से शांतिप्रिय पर्यटन स्थल रहा है और यहाँ की कानून व्यवस्था को किसी भी कीमत पर बिगड़ने नहीं दिया जाएगा।
मुस्लिम समुदाय की प्रतिक्रिया और शांतिपूर्ण नमाज का संकल्प
डीएसए द्वारा अचानक अनुमति वापस लिए जाने के फैसले पर मुस्लिम समुदाय और ईदगाह कमेटी ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। कमेटी के पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने केवल नमाजियों की बढ़ती संख्या और व्यवस्था को ध्यान में रखकर ही मैदान के उपयोग की मांग की थी, उनका उद्देश्य किसी भी तरह का विवाद पैदा करना या किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। अनुमति निरस्त होने के बाद अब समुदाय के प्रबुद्ध जनों ने निर्णय लिया है कि वे प्रशासन के फैसले का सम्मान करेंगे और शहर की शांति को प्राथमिकता देंगे। ईद-उल-जुहा की नमाज अब पूर्व की भांति स्थानीय मस्जिदों, तल्लीताल और मल्लीताल स्थित ईदगाह परिसरों में ही पालियों (शिफ्टों) में अदा की जाएगी ताकि जगह की कमी न हो और यातायात व्यवस्था भी बाधित न हो। समुदाय के नेताओं ने सभी युवाओं से शांति बनाए रखने और त्यौहार को आपसी भाईचारे के साथ मनाने की अपील की है।










