UttaraKhand Protest Nursing Candidates News: देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पिछले तीन दिनों से जारी हाई-प्रोफाइल ड्रामा और नर्सिंग अभ्यर्थियों का कड़ा संघर्ष आखिरकार एक सकारात्मक मोड़ पर समाप्त हुआ। परेड ग्राउंड के पास पानी की टंकी पर चढ़े नर्सिंग कर्मियों और कांग्रेस महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला लगभग 60 घंटे बाद नीचे उतर आए हैं। सरकार की ओर से ठोस आश्वासन मिलने के बाद आंदोलनकारियों ने अपने इस प्रदर्शन को फिलहाल एक माह के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है।
क्या था पूरा मामला?
उत्तराखंड में नर्सिंग भर्ती परीक्षा को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। नर्सिंग अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि प्रदेश में नर्सिंग भर्ती ‘वर्ष वार’ (Year-wise Merit) के आधार पर की जाए। अपनी इस मांग को लेकर ये अभ्यर्थी महीनों से धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक सेवा दी है और वरिष्ठता के आधार पर उनका चयन होना चाहिए।
जब कई दौर की वार्ता के बाद भी शासन और प्रशासन के स्तर पर कोई समाधान नहीं निकला, तो अभ्यर्थियों का धैर्य जवाब दे गया। सोमवार सुबह विरोध के एक चरम कदम के रूप में चार नर्सिंग कर्मी और उनके समर्थन में आईं कांग्रेस महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला परेड ग्राउंड स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गईं।

60 घंटों का भारी तनाव
जैसे ही प्रदर्शनकारी टंकी पर चढ़े, पुलिस और प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। कड़ाके की ठंड और ऊँचाई पर होने के कारण स्वास्थ्य बिगड़ने का डर बना हुआ था। पुलिस प्रशासन ने लगातार उन्हें नीचे उतारने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे। इस दौरान टंकी के नीचे भी भारी संख्या में अभ्यर्थियों का जमावड़ा लगा रहा, जो लगातार सरकार विरोधी नारेबाजी कर रहे थे।
बुधवार शाम तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। अंततः, शासन के प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों के बीच हुई वार्ता में नर्सिंग अभ्यर्थियों को उचित आश्वासन दिया गया। सरकार ने भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा और प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

विपक्ष का साथ और राजनीति
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों के टंकी से उतरने के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने ज्योति रौतेला और नर्सिंग अभ्यर्थियों का स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा:
“यह सत्य की जीत है। महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के साहसी प्रयासों और अभ्यर्थियों के अटूट संकल्प ने सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया। सरकार को युवाओं की जायज मांगों को अनसुना नहीं करना चाहिए था।”
वहीं, ज्योति रौतेला ने कहा कि वह राजनीति से ऊपर उठकर इन बेरोजगार युवाओं की लड़ाई लड़ रही थीं। उन्होंने कहा, “अगर मेरी एक छोटी सी कोशिश से इन नर्सिंग अभ्यर्थियों की आवाज सरकार के कानों तक पहुँची है, तो यह हमारे सामूहिक आंदोलन की बड़ी जीत है।”

एक माह का समय और आभार
सरकार की ओर से मिले आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों ने स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक माह का स्थगन है। यदि एक महीने के भीतर सरकार अपने वादों को अमलीजामा नहीं पहनाती है, तो वे दोबारा उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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फिलहाल, 60 घंटे से चल रहा यह गतिरोध समाप्त होने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है। सभी नर्सिंग कर्मियों को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए भेजा गया है ताकि इतनी देर तक ऊँचाई और प्रतिकूल मौसम में रहने के कारण उनके स्वास्थ्य पर कोई बुरा प्रभाव न पड़ा हो।








