Tehri mobile Network News: टिहरी, उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में भौगोलिक विषमताओं के कारण आज भी कई गांव डिजिटल मुख्यधारा से कटे हुए हैं। टिहरी गढ़वाल के सीमांत और दुर्गम क्षेत्रों में जनसंचार सेवाओं की बदहाली को दूर करने और कनेक्टिविटी को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रशासन ने अब कमर कस ली है। इसी क्रम में जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले के सुदूरवर्ती गांवों में नेटवर्क की समस्या को जड़ से समाप्त करने पर विस्तृत रणनीति तैयार की गई।
दुर्गम क्षेत्रों में नेटवर्क की बदहाली पर जिलाधिकारी सख्त
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने विशेष रूप से विकासखण्ड भिलंगना के अंतर्गत आने वाले अत्यंत दुर्गम गांवों—गंगी, पिनस्वाड़, सेमल्थ, गेवली, सेन्दुल, द्वारी, देवलंगी, मुयालगांव, गेंवाली और नैल बौंसला—में मोबाइल नेटवर्क की दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज के डिजिटल युग में जनसंचार केवल सुविधा नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा:
“जनसंचार व्यवस्था का सुदृढ़ होना केवल बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपदा प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और क्षेत्र के समग्र विकास के लिए रीढ़ की हड्डी के समान है। यदि नेटवर्क नहीं होगा, तो आपदा के समय सूचनाओं का आदान-प्रदान बाधित होगा, जिससे जनहानि का खतरा बढ़ सकता है।”
BSNL को अल्टीमेटम और कार्ययोजना
बैठक में भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों से आए शिकायतकर्ताओं के साथ बिंदुवार चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने बीएसएनएल के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे तत्काल चिन्हित क्षेत्रों में अपनी तकनीकी टीम भेजकर स्थलीय निरीक्षण करें।

बैठक के मुख्य निर्णय:
- समय सीमा: बीएसएनएल को निर्देशित किया गया है कि वे सभी चिन्हित गांवों का सर्वेक्षण कर 30 अप्रैल 2026 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को सौंपें।
- नए टावरों की स्थापना: जिन स्थानों पर मौजूदा बुनियादी ढांचा अपर्याप्त है, वहां नए मोबाइल टावर स्थापित करने के लिए स्थल चयन कर आगामी बैठक में प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा गया है।
- समन्वय: जिलाधिकारी ने केवल सरकारी प्रदाता ही नहीं, बल्कि सभी निजी सेवा प्रदाता कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए ताकि “रोमिंग” और “शेयरिंग” के माध्यम से कनेक्टिविटी सुधारी जा सके।
ग्रामीणों का दर्द: “अपनों से बात करने के लिए तय करनी पड़ती है मीलों की दूरी”
बैठक में पहुंचे ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि नेटवर्क न होने के कारण उनका जीवन किसी अभिशाप से कम नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में सिग्नल न होने के कारण उन्हें अपने सगे-संबंधियों से बात करने या किसी जरूरी काम के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर ऊंची पहाड़ियों या सड़क मार्ग तक आना पड़ता है।
इससे न केवल उनका कीमती समय बर्बाद होता है, बल्कि आर्थिक बोझ भी पड़ता है। ग्रामीणों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि प्रशासन ने जल्द ही संचार व्यवस्था सुचारू नहीं की, तो वे उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि डिजिटल इंडिया के दौर में उनके बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित हैं और बीमार होने पर एम्बुलेंस बुलाना भी नामुमकिन हो जाता है।
विकास और सुरक्षा के लिए कनेक्टिविटी अनिवार्य
टिहरी गढ़वाल का एक बड़ा हिस्सा संवेदनशील और आपदा की दृष्टि से ‘जोन-5’ में आता है। ऐसे में संचार विहीन गांव प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती हैं। जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि जनसंचार सेवाओं में सुधार हेतु समयबद्ध और प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने अधिकारियों को सचेत किया कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार की मंशा है कि “अंतिम मील तक पहुंच” (Last Mile Connectivity) के लक्ष्य को प्राप्त किया जाए, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को भी वही सुविधाएं मिल सकें जो शहरों में उपलब्ध हैं।
विकासखंडों के हजारों ग्रामीणों में एक नई उम्मीद जगी
जिलाधिकारी की इस पहल से टिहरी के भिलंगना सहित अन्य विकासखंडों के हजारों ग्रामीणों में एक नई उम्मीद जगी है। यदि 30 अप्रैल तक सर्वेक्षण कार्य पूर्ण कर टावर स्थापना की प्रक्रिया शुरू होती है, तो यह क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। अब देखना यह है कि तकनीकी विभाग और मोबाइल कंपनियां जिलाधिकारी के इन सख्त निर्देशों पर कितनी तत्परता से अमल करती हैं।
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