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लैंड फॉर जॉब स्कैम: लालू परिवार को कोर्ट से बड़ा झटका, जानें पूरा अपडेट

On: January 10, 2026 7:17 AM
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बिहार की राजनीति और देश के चर्चित 'लैंड फॉर जॉब' (नौकरी के बदले जमीन) घोटाले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं।
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बिहार की राजनीति और देश के चर्चित ‘लैंड फॉर जॉब’ (नौकरी के बदले जमीन) घोटाले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और बेटियों मीसा भारती व हेमा यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय (Charges Framed) करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अपनी सख्त टिप्पणी में कहा कि प्रथम दृष्टया यह पूरा मामला एक ‘आपराधिक सिंडिकेट’ (Criminal Syndicate) की तरह चलाया जा रहा था।

यह फैसला आरजेडी (RJD) सुप्रीमो और उनके राजनीतिक वारिसों के लिए एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

A Delhi court on Friday charged Rashtriya Janata Dal (RJD) President Lalu  Prasad Yadav, his wife Rabri Devi, children Tejashwi Yadav, Tej Pratap  Yadav, Misa Bharti and several others with corruption and

9 जनवरी 2026: कोर्ट रूम में क्या हुआ?

राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआई (CBI) द्वारा पेश किए गए सबूतों और दलीलों को स्वीकार किया। कोर्ट ने कहा कि लालू प्रसाद यादव जब रेल मंत्री थे, तब रेल मंत्रालय को एक “निजी जागीर” (Personal Fiefdom) की तरह इस्तेमाल किया गया।

Delhi court frames charges against Lalu, kin in land-for-jobs scam case|  India News

फैसले की मुख्य बातें:

  1. आरोप तय: कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और हेमा यादव सहित कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है।
  2. 52 आरोपी बरी: इसी मामले में सबूतों के अभाव में कोर्ट ने 52 अन्य आरोपियों को बरी (Discharge) कर दिया है। इनमें ज्यादातर वे लोग शामिल थे जो या तो रेलवे के निचले स्तर के अधिकारी थे या जिनके खिलाफ सीधे सबूत नहीं मिल सके।
  3. सख्त टिप्पणी: जज ने कहा कि यह केवल भ्रष्टाचार का साधारण मामला नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है जिसमें सरकारी नौकरी को एक “बार्गेनिंग चिप” (सौदेबाजी का साधन) की तरह इस्तेमाल किया गया ताकि यादव परिवार के लिए बेशकीमती जमीनें हासिल की जा सकें।

कोर्ट ने अब मामले में औपचारिक आरोप तय करने के लिए 29 जनवरी 2026 की तारीख मुकर्रर की है, जब सभी आरोपियों को यह बताना होगा कि वे इन आरोपों को स्वीकार करते हैं या ट्रायल (मुकदमा) का सामना करेंगे।

किन धाराओं में चलेगा मुकदमा?

अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दी है:

  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(d) और 13(2): पद का दुरुपयोग कर अवैध लाभ कमाना।
  • IPC धारा 120B: आपराधिक साजिश रचना।
  • IPC धारा 420: धोखाधड़ी करना।

ये धाराएं गैर-जमानती अपराधों की श्रेणी में आती हैं और अगर इनमें दोष साबित होता है, तो आरोपियों को लंबी जेल की सजा हो सकती है, जो उनके राजनीतिक करियर पर पूर्णविराम लगा सकती है।

क्या है ‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाला? (मामले की पृष्ठभूमि)

यह पूरा मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र की यूपीए-1 सरकार में रेल मंत्री थे।

घोटाले का मुख्य आरोप: सीबीआई (CBI) का आरोप है कि रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने भारतीय रेलवे के विभिन्न जोनों (जैसे मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर) में ‘ग्रुप-डी’ (Group-D) के पदों पर कई लोगों को नौकरियां दीं। लेकिन इन नौकरियों के बदले में रिश्वत के तौर पर पैसे नहीं, बल्कि जमीनें ली गईं।

Delhi court to hold day-to-day hearings in money laundering case against  Lalu Yadav and family

मोडस ऑपरेंडी (अपराध का तरीका):

  1. नौकरी के बदले जमीन: जिन लोगों को रेलवे में ‘सब्सिट्यूट’ (Substitute) के तौर पर नौकरी दी गई, उन्होंने या उनके परिवार ने अपनी बेशकीमती जमीनें लालू परिवार या उनकी बेनामी कंपनियों (जैसे एके इन्फोसिस्टम्स) के नाम कर दीं।
  2. कौड़ियों के भाव सौदा: आरोप है कि ये जमीनें बाजार भाव से बेहद कम कीमत पर या तो गिफ्ट डीड के जरिए या बहुत मामूली रकम दिखाकर लिखवाई गईं।
  3. नियमों की अनदेखी: सीबीआई के मुताबिक, इन भर्तियों के लिए रेलवे ने कोई सार्वजनिक विज्ञापन (Advertisement) नहीं निकाला था और न ही कोई पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई थी। जल्दबाजी में आवेदनों को मंजूरी दी गई।

ईडी (ED) की एंट्री और मनी लॉन्ड्रिंग का एंगल

सीबीआई के अलावा, इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी जांच कर रहा है। ईडी का आरोप है कि इस घोटाले से हासिल की गई ‘अपराध की कमाई’ (Proceeds of Crime) करीब 600 करोड़ रुपये है। ईडी ने अपनी चार्जशीट में दिल्ली की पॉश न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित एक बंगले (D-1088) का भी जिक्र किया है, जिसे कथित तौर पर इसी घोटाले के पैसों से जुड़ी कंपनी के जरिए हासिल किया गया था और जिसका इस्तेमाल तेजस्वी यादव कर रहे थे।

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लालू परिवार की दलीलें और राजनीतिक प्रतिक्रिया

कोर्ट के इस फैसले के बाद आरजेडी और लालू परिवार ने इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” (Political Vendetta) करार दिया है।

  • लालू परिवार का पक्ष: आरजेडी का कहना है कि लालू यादव ने रेलवे को मुनाफे में लाया था और उन पर लगे सभी आरोप बेबुनियाद हैं। उनका कहना है कि यह भाजपा सरकार द्वारा विपक्षी नेताओं को खत्म करने की साजिश है।
  • एनडीए (NDA) का हमला: दूसरी ओर, बिहार में सत्ताधारी एनडीए (जेडीयू और बीजेपी) ने नैतिकता के आधार पर तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी से इस्तीफे की मांग की है। जेडीयू प्रवक्ताओं ने कहा कि कोर्ट द्वारा ‘क्रिमिनल सिंडिकेट’ शब्द का इस्तेमाल यह साबित करता है कि आरजेडी ने सामाजिक न्याय के नाम पर केवल भ्रष्टाचार किया है।

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तेजस्वी और तेज प्रताप का भविष्य खतरे में?

यह फैसला बिहार की भविष्य की राजनीति के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।

  1. तेजस्वी यादव: बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और आरजेडी के मुख्यमंत्री पद के चेहरे तेजस्वी यादव पर आरोप तय होने से उनकी छवि को धक्का लगा है। अगर ट्रायल में उन्हें दोषी ठहराया जाता है और 2 साल से ज्यादा की सजा होती है, तो वे चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य (Disqualified) हो सकते हैं।
  2. तेज प्रताप और मीसा: लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप और बेटी मीसा भारती (जो सांसद भी हैं) का नाम भी चार्जशीट में प्रमुखता से है, जिससे पूरा परिवार एक साथ कानूनी पचड़े में फंस गया है।
Court Summons Lalu Prasad, Family In Land-For-Job Scam

आगे क्या होगा?

अब 29 जनवरी 2026 को कोर्ट औपचारिक रूप से आरोप तय करेगा। इसके बाद गवाहों की पेशी और जिरह (Cross-examination) का लंबा दौर शुरू होगा। हालांकि, 52 लोगों के बरी होने से लालू परिवार को थोड़ी राहत जरूर मिल सकती थी, लेकिन मुख्य साजिशकर्ता के रूप में परिवार के सदस्यों का नाम बरकरार रहने से उनकी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।

सीबीआई आने वाले दिनों में और भी दस्तावेजी सबूत पेश कर सकती है। वहीं, लालू परिवार इस आदेश के खिलाफ ऊपरी अदालत (हाई कोर्ट) में अपील कर सकता है।

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