आंध्र प्रदेश के डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा जिले में सोमवार दोपहर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के एक तेल कुएं में मरम्मत कार्य के दौरान अचानक भीषण गैस रिसाव (Gas Leak) शुरू हो गया। देखते ही देखते एक जोरदार धमाके के साथ कुएं में आग लग गई। आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि कई किलोमीटर दूर से देखी जा सकती थीं। इस घटना के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के तीन गांवों को तत्काल प्रभाव से खाली करा लिया है। गनीमत रही कि अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है।

मरम्मत के दौरान हुआ हादसा: कैसे शुरू हुई तबाही?
घटना जिले के मलिकिपुरम मंडल के तहत आने वाले इरुसुमंदा गांव की है। यहां स्थित ONGC के ‘मोरी-5’ (Mori-5) नामक कुएं पर उत्पादन बढ़ाने के लिए मरम्मत का काम चल रहा था। यह काम ONGC की ठेकेदार कंपनी ‘दीप इंडस्ट्रीज लिमिटेड’ द्वारा किया जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों के अनुसार, दोपहर करीब 12:30 बजे काम के दौरान अचानक कुएं के वाल्व से नियंत्रण हट गया और एक ‘ब्लोआउट’ (Blowout) हुआ।
यह भी पढ़ें: मुस्तफिजुर विवाद की आग: टी-20 वर्ल्ड कप खेलने भारत नहीं आएगी बांग्लादेशी टीम, BCB ने ICC को लिखा पत्र
इस ब्लोआउट के कारण जमीन के नीचे से कच्चे तेल के साथ मिश्रित गैस का गुबार बेहद तेज दबाव के साथ बाहर निकला। गैस के हवा के संपर्क में आते ही वहां जोरदार धमाका हुआ और आग लग गई। चश्मदीदों का कहना है कि धमाका इतना तेज था कि आसपास की जमीन थर्रा गई। कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और काले धुएं का एक विशाल गुबार आसमान में छा गया, जिससे दिन में ही अंधेरा जैसा महसूस होने लगा।

दहशत में ग्रामीण: घर छोड़ भागे लोग
गैस रिसाव और आग लगने की खबर जंगल की आग की तरह फैली। इरुसुमंदा और उसके आसपास के गांवों—कदाली और चिंतलमोटी—में अफरा-तफरी मच गई। हवा में गैस की गंध और धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन महसूस होने लगी। अनहोनी की आशंका से घबराए लोग अपना घर-बार और मवेशियों को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
स्थानीय प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत ‘हाई अलर्ट’ घोषित कर दिया। पुलिस और राजस्व विभाग की टीमों ने लाउडस्पीकर के जरिए घोषणा करते हुए लोगों को गांव खाली करने का निर्देश दिया। प्रशासन ने 3 से 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले रिहायशी इलाकों को पूरी तरह से खाली करा लिया है।
एक स्थानीय निवासी ने बताया, “हम अपने घरों में थे तभी एक तेज आवाज सुनाई दी, जैसे कोई बम फटा हो। बाहर निकलकर देखा तो आग की लपटें नारियल के पेड़ों से भी ऊंची उठ रही थीं। हमें तुरंत गांव छोड़ने को कहा गया। हम अपने जानवरों को भी साथ नहीं ले जा पाए, बस जान बचाकर भागे।”
नारियल के बागों को भारी नुकसान
कोनासीमा क्षेत्र अपनी हरियाली और नारियल की खेती के लिए प्रसिद्ध है। इस आग की चपेट में आने से कुएं के आसपास स्थित सैकड़ों नारियल के पेड़ जलकर खाक हो गए हैं। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, करीब 500 से ज्यादा नारियल के पेड़ पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं, जिससे स्थानीय किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। इसके अलावा, पास के एक्वा (Aqua) तालाबों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, जो इस क्षेत्र की आजीविका का मुख्य साधन हैं।

प्रशासन और ONGC का रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही राजमुंदरी और आसपास के क्षेत्रों से ONGC की ‘क्राइसिस मैनेजमेंट टीम’ (Crisis Management Team) और अग्निशमन दल (Fire Brigade) की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। आग की भयावहता को देखते हुए विशेष फोम टेंडर और आधुनिक आग बुझाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
जिला कलेक्टर महेश कुमार और पुलिस अधीक्षक (SP) भी मौके पर पहुंच गए हैं और राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। जिला कलेक्टर ने बताया, “हमारी पहली प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा है। आसपास के तीन गांवों को खाली करा लिया गया है और उन्हें राहत शिविरों में भेजा जा रहा है। ONGC के तकनीकी विशेषज्ञ आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल किसी की जान जाने की खबर नहीं है।”
ONGC के अधिकारियों ने बताया कि कुएं से निकल रही गैस को नियंत्रित करने के लिए ‘कैपिंग’ (Capping) की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद भी ली जा सकती है। फिलहाल, कुएं के आसपास के इलाके को ‘नो-गो ज़ोन’ (No-Go Zone) घोषित कर दिया गया है।

सावधानी और चेतावनी
गैस रिसाव के खतरों को देखते हुए प्रशासन ने आसपास के इलाकों में बिजली की आपूर्ति पूरी तरह से काट दी है। लोगों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे:
- अपने घरों में गैस का चूल्हा या माचिस न जलाएं।
- मोबाइल फोन या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का उपयोग खुले में न करें।
- सिगरेट या बीड़ी न पीएं, क्योंकि हवा में मौजूद गैस जरा सी चिंगारी से भड़क सकती है।
गैस रिसाव की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय
आंध्र प्रदेश में गैस रिसाव की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी विशाखापत्तनम और अन्य तटीय इलाकों में औद्योगिक गैस रिसाव की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। कोनासीमा क्षेत्र, जो तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार के लिए जाना जाता है, वहां अक्सर ऐसे हादसों का डर बना रहता है। स्थानीय लोग लंबे समय से तेल कंपनियों से सुरक्षा मानकों को और कड़ा करने की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल, प्रशासन और ONGC की टीमें आग बुझाने में जुटी हैं, लेकिन जिस तरह से यह हादसा हुआ, उसने एक बार फिर तेल एवं गैस उत्खनन क्षेत्रों में सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि यह हादसा तकनीकी खराबी थी या मानवीय चूक। तब तक, हजारों ग्रामीणों की रातें डर और खुले आसमान के नीचे गुजर रही हैं।










