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राष्ट्रपति मुर्मू राफेल लड़ाकू विमान में कल हरियाणा के अंबाला वायुसेना अड्डे से उड़ान भरेंगी।

On: December 25, 2025 2:37 PM
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राष्ट्रपति मुर्मू राफेल लड़ाकू विमान में कल अंबाला वायुसेना अड्डे से उड़ान भरेंगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बुधवार को हरियाणा के अंबाला वायुसेना अड्डे से राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरेंगी। राष्ट्रपति भवन की ओर से मंगलवार को जारी एक बयान में कहा गया, “भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू हरियाणा के अंबाला जाएँगी जहाँ वह राफेल में उड़ान भरेंगी।” 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए नृशंस आतंकवादी हमले के जवाब में भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल जेट का इस्तेमाल किया गया था।

राष्ट्रपति भवन और रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मू की यह उड़ान पूर्व निर्धारित कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसमें वे अंबाला एयरबेस पर तैनात राफेल स्क्वाड्रन की कार्यक्षमता, तकनीकी क्षमताओं और संचालन तैयारियों की समीक्षा भी करेंगी। यह पहला अवसर होगा जब भारत की कोई मौजूदा राष्ट्रपति राफेल जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान में उड़ान भरेंगी।

राष्ट्रपति मुर्मू राफेल लड़ाकू विमान
Image Source- presidentofindia.gov.in

राष्ट्रपति मुर्मू ने सुखोई 30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने क्रमशः 8 जून 2006 और 25 नवंबर 2009 को पुणे के पास लोहेगांव स्थित वायुसेना स्टेशन पर सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी।

8 अप्रैल, 2023 को, भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर मुर्मू, असम के तेजपुर वायु सेना स्टेशन पर सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरने वाले तीसरे राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बने।

राफेल: भारतीय वायुसेना की ताकत

राफेल लड़ाकू विमान को भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाता है। फ्रांस से खरीदे गए इन बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों को अंबाला और हाशीमारा एयरबेस पर तैनात किया गया है। राफेल विमान अपनी अत्याधुनिक रडार प्रणाली, लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों और उच्च स्तर की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता के लिए जाना जाता है।

फ्रांसीसी एयरोस्पेस प्रमुख डसॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित, राफेल लड़ाकू विमान को औपचारिक रूप से सितंबर 2020 में वायु सेना स्टेशन, अंबाला में भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया था। पहले पांच राफेल विमान, जो 27 जुलाई, 2020 को फ्रांस से आए थे, उन्हें 17 स्क्वाड्रन, ‘गोल्डन एरो’ में शामिल किया गया था।

राफेल विमानों का इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर में किया गया था, जो 7 मई को पाकिस्तान के नियंत्रण वाले इलाकों में कई आतंकी ढाँचों को नष्ट करने के लिए शुरू किया गया था। इन हमलों के बाद चार दिनों तक भीषण झड़पें हुईं, जो 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति के साथ समाप्त हुईं।

राष्ट्रपति की यह उड़ान ऐसे समय में हो रही है, जब क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। ऐसे में यह कदम भारत की सैन्य तैयारियों और आत्मविश्वास को दर्शाता है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार राष्ट्रपति मुर्मू राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरकर भारतीय वायुसेना के मनोबल को नई मजबूती देंगी।

महिला नेतृत्व और प्रेरणादायक संदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यह उड़ान महिला सशक्तिकरण के दृष्टिकोण से भी बेहद अहम मानी जा रही है। इससे पहले वे सशस्त्र बलों के जवानों और अधिकारियों से संवाद के दौरान महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना कर चुकी हैं। उनका यह कदम युवाओं, विशेषकर महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति का इस तरह का कदम केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह देश की सेनाओं के मनोबल को भी बढ़ाता है। इससे यह संदेश जाता है कि देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद भी सशस्त्र बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।

देशभर में चर्चा

राष्ट्रपति मुर्मू की राफेल उड़ान को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग इसे गर्व का क्षण बता रहे हैं। कई रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के कदम आम जनता को सशस्त्र बलों के करीब लाने में मदद करते हैं और देश की रक्षा क्षमताओं को लेकर विश्वास को मजबूत करते हैं।

सुरक्षा और प्रशिक्षण मानकों पर विशेष ध्यान

राष्ट्रपति की राफेल उड़ान से पहले सुरक्षा और प्रशिक्षण मानकों पर विशेष जोर दिया गया है। वायुसेना अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की उड़ानों से पहले विस्तृत मेडिकल जांच, सिम्युलेटर अभ्यास और मौसम की स्थिति का गहन आकलन किया जाता है। राष्ट्रपति को भी उड़ान से पहले सभी जरूरी प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया है। यह अभ्यास इस बात का उदाहरण है कि भारतीय वायुसेना हर स्तर पर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां न केवल पारदर्शिता को दर्शाती हैं, बल्कि वायुसेना की पेशेवर कार्यप्रणाली पर जनता का भरोसा भी मजबूत करती हैं।

कुल मिलाकर राष्ट्रपति मुर्मू राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान के जरिए देश की सैन्य शक्ति और नेतृत्व का सशक्त संदेश देंगी।

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