Uttarakhand News: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की सड़कें मंगलवार को युवाओं के भारी आक्रोश और नारेबाजी से गूंज उठीं। प्रदेश भर से आए हजारों बेरोजगार युवाओं ने ‘उत्तराखंड बेरोजगार संघ’ के बैनर तले अपनी जायज मांगों को लेकर परेड ग्राउंड से राज्य सचिवालय तक एक विशाल जनआंदोलन और पैदल मार्च आयोजित किया। लंबे समय से अटकी भर्तियों, परीक्षा तंत्र की सुस्ती और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति में हो रही देरी के खिलाफ युवाओं का यह गुस्सा सड़कों पर साफ देखने को मिला। परेड ग्राउंड से शुरू हुआ यह कूच जैसे ही सचिवालय की ओर बढ़ा, पूरे इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया और माहौल बेहद संवेदनशील हो गया।
सचिवालय घेराव की प्रमुख मांगें और परीक्षा कैलेंडर का मुद्दा
इस विशाल प्रदर्शन के माध्यम से बेरोजगार संघ और प्रदेश के युवाओं ने राज्य सरकार के समक्ष अपनी कई पुरानी और लंबित मांगें प्रमुखता से रखी हैं। युवाओं की सबसे प्राथमिक मांग यह है कि सरकार राज्य के विभिन्न विभागों में खाली पड़े हजारों पदों पर अविलंब नई भर्तियों की विज्ञप्तियां जारी करे। इसके साथ ही, बार-बार परीक्षाओं के स्थगित होने और अनिश्चितता के माहौल को खत्म करने के लिए एक पारदर्शी ‘वार्षिक परीक्षा कैलेंडर’ घोषित करने की मांग की गई है। युवाओं का कहना है कि सरकार को तय समय-सीमा के भीतर परीक्षाएं आयोजित करानी चाहिए और जो अभ्यर्थी पहले ही अपनी परीक्षा पास कर चुके हैं, उन्हें बिना किसी प्रशासनिक देरी के शीघ्र नियुक्ति पत्र सौंपे जाने चाहिए।
बेरोजगार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल का सख्त रुख और तीन दिन का अल्टीमेटम
सचिवालय कूच का नेतृत्व कर रहे उत्तराखंड बेरोजगार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल ने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। धरना स्थल और कूच के दौरान युवाओं को संबोधित करते हुए राम कंडवाल ने कहा कि राज्य का युवा सालों से हाड़-तोड़ मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है, लेकिन सरकार की ढुलमुल नीतियों के कारण कई महत्वपूर्ण भर्तियों की विज्ञप्तियां महीनों से दबाकर रखी गई हैं। इसके चलते राज्य के लाखों होनहार युवाओं का भविष्य पूरी तरह से अधर में लटका हुआ है।
अपनी बात को मजबूती से रखते हुए राम कंडवाल ने प्रदेश सरकार को स्पष्ट रूप से ‘तीन दिन का अल्टीमेटम’ दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन तीन दिनों के भीतर सरकार ने युवाओं की मांगों पर कोई सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया, तो इस आंदोलन को केवल देहरादून तक सीमित न रखकर पूरे प्रदेश के कोने-कोने में और अधिक उग्र रूप में फैलाया जाएगा।
आगामी चुनाव से पहले व्यापक जनआंदोलन की चेतावनी
बेरोजगार संघ की इस चेतावनी ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है। संगठन के नेताओं ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार युवाओं के सब्र का इम्तिहान लेना जारी रखती है और उनकी न्यायसंगत मांगों को अनदेखा करती है, तो आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पूरे उत्तराखंड में सरकार के खिलाफ एक व्यापक और ऐतिहासिक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। युवाओं का कहना है कि जो सरकार प्रदेश के नौजवानों को रोजगार नहीं दे सकती और उनके भविष्य की सुरक्षा नहीं कर सकती, उसे इसका परिणाम आने वाले चुनावों में भुगतना पड़ेगा।
प्रशासनिक तैयारियां और युवाओं का अटूट संकल्प
सचिवालय कूच को देखते हुए देहरादून जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। सचिवालय की ओर जाने वाले मुख्य रास्तों पर भारी बैरिकेडिंग की गई थी और कई जगह पुलिस बल तैनात था। हालांकि, कड़ाके की धूप और प्रशासनिक सख्ती के बावजूद युवाओं के उत्साह और संकल्प में कोई कमी नजर नहीं आई। दूर-दराज के पहाड़ी जिलों से आए छात्र और अभ्यर्थी अपनी मांगों की तख्तियां हाथों में थामे देर तक सरकार विरोधी नारे लगाते रहे।
क्या युवाओं की आवाज सुनेगी सरकार?
परेड ग्राउंड से सचिवालय तक हुआ यह कूच केवल एक दिन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के उस हर परिवार की पीड़ा है जिसका युवा सदस्य सालों से एक अदद सरकारी नौकरी के इंतजार में अपनी उम्र सीमा पार कर रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बेरोजगार संघ द्वारा दिए गए तीन दिन के अल्टीमेटम पर राज्य सरकार क्या कदम उठाती है। क्या सरकार जल्द ही नया परीक्षा कैलेंडर और रुकी हुई भर्तियां जारी करके युवाओं का विश्वास बहाल करेगी, या फिर उत्तराखंड की यह शांत वादियां आने वाले दिनों में एक बड़े और व्यापक आंदोलन की गवाह बनेंगी? इस पूरे मामले में देखना अहम होगा की जिन बच्चों को दिल्ली में जमकर मारा गया उन प्रदर्शन कारियों को कब तक इंसाफ मिल पाता है।
गौर हो कि उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के नेतृत्व में प्रदेशभर से आए बेरोज़गार युवाओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर देहरादून के परेड ग्राउंड से सचिवालय तक कूच किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से लंबित भर्तियां जल्द जारी करने, परीक्षा कैलेंडर घोषित करने, समय पर परीक्षाएं कराने और चयनित अभ्यर्थियों को शीघ्र नियुक्ति देने की मांग उठाई। बेरोज़गार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल ने कहा कि लंबे समय से कई भर्तियों की विज्ञप्तियां जारी नहीं की जा रही हैं और युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। उन्होंने सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मांगें पूरी नहीं होने पर विधानसभा चुनाव से पहले सरकार के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा।
वहीं इस पूरे मामले में लंबे समय से अटकी भर्तियों, परीक्षा तंत्र की सुस्ती और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति में हो रही देरी के खिलाफ युवाओं का यह गुस्सा सड़कों पर साफ देखने को मिला। परेड ग्राउंड से शुरू हुआ यह कूच जैसे ही सचिवालय की ओर बढ़ा, पूरे इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया और माहौल बेहद संवेदनशील हो गया। वही देशभर में युवा प्रदर्शन कर अपनी मांगों को लेकर सरकार को घेर रहे है। वहीं इस पूरे मामले में सरकार अपना पक्ष नहीं रख पाई है, जिसको ध्यान में रखते हुए देखना होगी की इस पूरे मामले में क्या क्या निकल कर सामने आता है।









