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Uttarakhand Monsoon हिमालयी ढलानों पर कुदरत के कड़े तेवर, बर्फबारी, मलबे और कोहरे के साए में थमी देवभूमि की रफ्तार

On: September 26, 2026 4:02 AM
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Uttarakhand Weather Update News In Hindi
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Uttarakhand Monsoon News: पहाड़ों की शांत वादियों में जब मौसम करवट बदलता है, तो उसका प्रभाव केवल पारे के गिरने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समूचे जनजीवन को अपने आगोश में ले लेता है। उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी दोनों ही अंचलों में प्रकृति के इस सख्त मिजाज ने सामान्य दिनचर्या को पूरी तरह से रोक दिया है। कहीं आसमान से सफेद आफत के रूप में भारी बर्फबारी बरस रही है, तो कहीं कमजोर हो चुकी पहाड़ियां दरक कर सीधे सड़कों पर आ गिरी हैं। सरोवर नगरी नैनीताल से लेकर सीमांत चमोली और धर्मनगरी हरिद्वार तक हर जगह इस मौसमी बदलाव की एक अलग और गंभीर तस्वीर देखने को मिल रही है।

चमोली के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लगातार हो रही बर्फबारी के साथ-साथ निचली ढलानों पर सक्रिय हुए भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। कई स्थानों पर विशालकाय बोल्डर और मलबा मुख्य सड़कों पर आ गिरा, जिसकी चपेट में आकर किनारे खड़ी कई गाड़ियां मलबे के नीचे दब गईं। स्थानीय प्रशासन और सीमा सड़क संगठन की टीमें कड़ाके की ठंड और लगातार गिरते पत्थरों के बीच रास्तों को खोलने की जद्दोजहद में जुटी हैं। अचानक हुए इस भूस्खलन ने सीमांत गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से काट दिया है, जिससे रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है।

पहाड़ों के ऊपर जहां बर्फ और मलबे का दोहरा संकट बना हुआ है, वहीं झीलों के शहर नैनीताल में स्थिति बिल्कुल अलग मगर उतनी ही चुनौतीपूर्ण है। नैनीताल और उसके आसपास के ऊपरी इलाकों को घने और सर्द कोहरे की मोटी चादर ने अपने घेरे में ले लिया है। दिन के उजाले में भी दृश्यता घटकर कुछ ही मीटर रह गई है, जिसके चलते सड़कों पर चलने वाले वाहनों की रफ्तार रेंगने जैसी हो गई है। माल रोड से लेकर तल्लीताल और मल्लीताल के बाजारों में सन्नाटा पसरा है। जो पर्यटक इस मौसम का आनंद लेने पहुंचे थे, वे भी कमरों में ही हीटर और अलाव के सहारे बैठने को मजबूर हो गए हैं। स्थानीय दुकानदार ठंड के तीखे झोंकों के सामने अलाव तापकर दिन गुजार रहे हैं।

पर्वतीय क्षेत्रों की यह बर्फीली हवा जब नीचे मैदानी इलाकों में पहुंची, तो उसने मैदानी जनपदों को भी कंपकंपी छुड़ाने वाली ठंड से भर दिया। तीर्थनगरी हरिद्वार में जहां सामान्य दिनों में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता था, वहां की विश्वप्रसिद्ध हरकी पैड़ी के घाट आज खाली नजर आ रहे हैं। गंगा के किनारे चलने वाली बर्फीली पछुआ हवाओं और घने कोहरे के कारण सुबह और शाम की प्रसिद्ध आरती के समय भी बहुत कम संख्या में लोग पहुंच पा रहे हैं। गंगा का जल इतना ठंडा हो चुका है कि श्रद्धालु केवल आचमन करके ही दूर से हाथ जोड़ रहे हैं। घाटों के आसपास की दुकानें ग्राहकों के अभाव में सूनी पड़ी हैं और लोग जगह-जगह लकड़ियों के सहारे हाथ सेकते दिख रहे हैं।

मौसम विभाग द्वारा जारी की गई गंभीर चेतावनी और जमीनी हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए शासन-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। ठंड, भारी बारिश, बर्फबारी और भूस्खलन के खतरे को भांपते हुए चंपावत, बागेश्वर, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी समेत छह जिलों के जिलाधिकारियों ने कल सभी सरकारी व निजी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित कर दिया है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सुबह-सुबह कड़ाके की ठंड और दुर्गम रास्तों के जोखिम के बीच छोटे बच्चों को किसी भी तरह की परेशानी या दुर्घटना का सामना न करना पड़े।

उत्तराखंड के भूगोल में मौसम का यह तीव्र परिवर्तन कोई अप्रत्याशित घटना नहीं है, किंतु इस बार पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता ने ढलानों को बहुत तेजी से अस्थिर किया है। पहाड़ों में लगातार गिरती बर्फ जब पत्थरों की दरारों में पिघलती है, तो ढीली मिट्टी के साथ भारी बोल्डर नीचे की ओर खिसकने लगते हैं। चमोली में दबी गाड़ियों की घटना इसी प्रक्रिया का परिणाम है, जहां यात्रा मार्गों पर अचानक मलबा गिरने से पर्यटकों और स्थानीय वाहन चालकों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। गनीमत यह रही कि कई मामलों में लोग समय रहते वाहनों से बाहर निकल गए, जिससे जान का बड़ा नुकसान होने से टल गया।

इस मौसमी आपदा ने पर्वतीय जिलों के बुनियादी ढांचे को भी कड़ी परीक्षा में डाल दिया है। बर्फबारी के कारण कई संवेदनशील ट्रांसफार्मर और बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे ऊंचाई वाले दर्जनों गांव अंधेरे में डूब गए हैं। पेयजल लाइनों में पानी जम जाने से लोगों को बर्फ पिघलाकर पानी का उपयोग करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों को आपातकालीन दवाओं तथा ऑक्सीजन सिलेंडर का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश जारी किए हैं, क्योंकि भूस्खलन के कारण एंबुलेंस सेवाओं का पहुंचना अत्यंत कठिन हो जाता है।

आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों और विशेष रूप से पर्यटकों से अपील की है कि वे अत्यधिक जरूरी काम न होने पर पहाड़ों के अनावश्यक सफर से बचें। मौसम के इस बदलते दौर में किसी भी समय सड़कों के बाधित होने का जोखिम बना हुआ है। राहत और बचाव कार्य में जुटी मशीनें संवेदनशील पैच पर तैनात हैं, ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाई जा सके। देवभूमि के लोग इस समय प्रकृति के इस प्रचंड रूप के शांत होने और घाटियों में दोबारा धूप खिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ताकि रोजमर्रा की जिंदगी फिर से अपनी पटरी पर लौट सके।

चमोली में कर्णप्रयाग-गैरसैंण हाईवे पर भूस्खलन से सड़क बंद हो गई और मलबे में स्कूटी दब गई। भूस्खलन के दौरान स्कूटी सवार बाल-बाल बच गया। वहीं, बद्रीनाथ-सतोपंथ मार्ग के चक्रतीर्थ क्षेत्र में भारी बर्फबारी हुई। खराब मौसम की संभावना के ही चलते कल नैनीताल, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग, ऊधम सिंह नगर, पिथौरागढ़ और चंपावत के सभी स्कूलों-आंगनबाड़ी केंद्रों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। इधर, बीती देर रात हुई तेज बारिश के कारण हरिद्वार में हरकी पैड़ी के घाट खाली हो गए। यहां मौजूद यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी।

चमोली में कर्णप्रयाग-गैरसैंण नेशनल हाईवे पर सिमली और सिरोली के बीच गुरुवार सुबह करीब 8 बजे अचानक भूस्खलन हो गया। पहाड़ी से पत्थर गिरते देखकर एक स्कूटी सवार ने खतरा भांप लिया और स्कूटी छोड़कर सुरक्षित जगह की ओर दौड़ लगा दी।

कुछ ही देर बाद भारी मलबा सड़क पर आ गिरा और स्कूटी उसमें दब गई। समय रहते हट जाने से स्कूटी सवार बाल-बाल बच गया। भूस्खलन के कारण हाईवे पर यातायात ठप हो गया, जिसे बाद में खोल दिया गया।


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