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Uttarakhand News:धामी सरकार शुरू करेगी ‘सेवा संकल्प अभियान’

On: September 12, 2026 9:53 AM
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Uttarakhand News:धामी सरकार शुरू करेगी 'सेवा संकल्प अभियान'
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Uttarakhand News: उत्तराखंड की शांत वादियों और पावन देवस्थलों के बीच जब शासन और सेवा का समन्वय बनता है, तो वह केवल प्रशासनिक औपचारिकता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोक-कल्याण का एक जीवंत माध्यम बन जाता है। हाल ही में देहरादून स्थित राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से की गई प्रेस वार्ता इसी सोच और कार्यसंस्कृति को रेखांकित करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से लेकर अगले पूरे एक महीने तक राज्य में चलने वाले ‘सेवा संकल्प और नवाचार’ अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री ने जिस संवेदनशीलता और विजन को सामने रखा, वह उत्तराखंड की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध होने जा रहा है।

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Photo- Cm Dhami meeting News in hindi

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और यथार्थवादी टिप्पणी की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मभूमि भले ही गुजरात रही हो और कर्मभूमि काशी हो, लेकिन उनकी मनभूमि सदैव देवभूमि उत्तराखंड रही है। यह केवल एक राजनीतिक या औपचारिक कथन नहीं है, बल्कि केदारनाथ की गुफाओं में प्रधानमंत्री की साधना से लेकर चारधाम ऑल-वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन और सीमांत गांवों को ‘प्रथम गांव’ का दर्जा देने जैसी ऐतिहासिक पहलों में यह आत्मीयता प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देती है। जब राज्य का नेतृत्व और केंद्र का विजन एक समान धरातल पर मिलकर काम करते हैं, तो नीतियां केवल फाइलों में बंद नहीं रहतीं, बल्कि वे सुदूर पहाड़ी ढलानों पर बसे आम नागरिक के जीवन को सुगम बनाने लगती हैं।

प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन और शासन के पच्चीस वर्षों के सेवा सफर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि पिछले ढाई दशकों में भारत ने सुशासन और लोक-कल्याण की जो नई परिभाषा गढ़ी है, उसका प्रभाव आज देश के हर हिस्से में देखा जा सकता है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रशासनिक दक्षता से लेकर देश के प्रधानमंत्री के रूप में वैश्विक मंच पर भारत का मान बढ़ाने तक का यह सफर केवल सत्ता का संचालन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक अनवरत यज्ञ रहा है। उत्तराखंड के संदर्भ में देखें तो इस कालखंड ने राज्य को आपदाओं से उबरने का संबल दिया, अधोसंरचना को पंख लगाए और स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।

इस माहव्यापी अभियान का नाम ‘सेवा संकल्प और नवाचार’ रखा जाना अपने आप में इसकी प्रकृति और दिशा को स्पष्ट करता है। सेवा का अर्थ केवल किसी की सहायता करना नहीं, बल्कि नागरिक के आत्मसम्मान को सुरक्षित रखते हुए उसे विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। नवाचार का तात्पर्य आधुनिक तकनीकों, नए विचारों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को शासन तथा जनजीवन में समाहित करना है। जब सेवा और नवाचार एक साथ आते हैं, तो समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सुविधाएं बिना किसी बाधा और देरी के पहुंचती हैं। सचिवालय से लेकर न्याय पंचायत स्तर तक इस अभियान का खाका जिस संरचित तरीके से तैयार किया गया है, उससे यह साफ होता है कि सरकार केवल बड़े आयोजनों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वास्तविक धरातल पर सकारात्मक परिवर्तन लाना चाहती है।

उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से विषम राज्य में विकास की चुनौतियां मैदानी राज्यों की तुलना में काफी अलग हैं। यहां के ऊंचे पहाड़, कठिन घाटियां, मौसमी आपदाएं और पलायन जैसी गंभीर समस्याएं लंबे समय से नीति-निर्माताओं के सामने प्रश्नचिह्न खड़ी करती रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस बात को भलीभांति समझा है कि जब तक जनभागीदारी को शासन का आधार नहीं बनाया जाएगा, तब तक स्थायी समाधान संभव नहीं है। यही कारण है कि आगामी एक माह तक चलने वाले कार्यक्रमों में स्वास्थ्य शिविरों, स्वच्छता अभियानों, पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन और युवाओं के कौशल संवर्धन को मुख्य केंद्र में रखा गया है।

अभियान के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार एक अत्यंत संवेदनशील पहलू है। पर्वतीय क्षेत्रों में सुदूर गांवों तक आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना सदैव एक कठिन कार्य रहा है। इस सेवा अभियान के अंतर्गत राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपस्थिति में स्वास्थ्य परीक्षण, रक्तदान शिविर और निःशुल्क दवा वितरण के जो प्रयास किए जाएंगे, वे सीधे तौर पर ग्रामीण परिवारों को राहत पहुंचाएंगे। इसी तरह, आयुष्मान भारत योजना के शत-प्रतिशत आच्छादन और आभा कार्ड निर्माण की गति को तेज करने से उन निर्धन परिवारों को सुरक्षा कवच मिलेगा जो गंभीर बीमारी के समय आर्थिक संकट में घिर जाते थे।

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण उत्तराखंड के अस्तित्व से जुड़े विषय हैं। गंगा, यमुना जैसी पावन नदियों का उद्गम स्थल होने के नाते देवभूमि का दायित्व केवल अपने राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के जल और पर्यावरण चक्र को सुरक्षित रखने से जुड़ा है। ‘सेवा संकल्प’ अभियान के तहत नदियों, गाड़-गदेरों और जल स्रोतों की स्वच्छता के लिए चलने वाले श्रमदान कार्यक्रम जनता के भीतर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाएंगे। सिंगल यूज प्लास्टिक के विरुद्ध जनचेतना और हिमालयी पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देना इस अभियान का एक सशक्त अंग बनकर उभरेगा।

नवाचार के मोर्चे पर, उत्तराखंड सरकार ने राज्य के युवाओं, महिलाओं और स्थानीय उद्यमियों को केंद्र में रखा है। मुख्यमंत्री का यह मानना है कि विकास की गति केवल सरकारी नौकरियों से नहीं, बल्कि स्वरोजगार, स्टार्टअप्स और नवाचार से तीव्र होगी। ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को आत्मसात करते हुए राज्य के पारंपरिक उत्पादों, जैसे मंडुआ, झंगोरा, दालें, हस्तशिल्प और पहाड़ी फलों के मूल्य संवर्धन और विपणन के लिए विशेष मंच उपलब्ध कराए जाएंगे। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आधुनिक तकनीक, पैकेजिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जोड़ने के प्रयास इस एक महीने के दौरान और अधिक तीव्रता से आगे बढ़ाए जाएंगे। यह प्रयास राज्य की मातृशक्ति को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन को प्रमुखता से रेखांकित किया। स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत को एक पूर्णतः विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने का जो सपना प्रधानमंत्री ने देखा है, उसकी सिद्धि में हर राज्य की समान जिम्मेदारी है। धामी ने ठीक ही कहा कि जब तक देश के हर नागरिक का संकल्प और पुरुषार्थ इस महायज्ञ में नहीं जुड़ेगा, तब तक यह लक्ष्य अधूरा रहेगा। उत्तराखंड इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तत्पर दिख रहा है। पर्यटन, तीर्थाटन, योग, आयुर्वेद, जैविक कृषि और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तराखंड पूरे देश का मार्गदर्शन करने की क्षमता रखता है।

इस पूरे अभियान का सबसे सुंदर पक्ष इसका जन-आंदोलन में बदलना है। लोकतंत्र में जब सरकार और जनता के बीच की दूरी समाप्त हो जाती है और दोनों एक साझा लक्ष्य के लिए मिलकर काम करते हैं, तो परिणाम अभूतपूर्व होते हैं। उत्तराखंड के सचिवालय में सीएम धामी की प्रेस वार्ता महज एक सरकारी घोषणा नहीं थी, बल्कि यह राज्य के हर नागरिक, अधिकारी, कर्मचारी, युवा और बुजुर्ग को अपने गांव, अपने शहर और अपने राज्य की बेहतरी के लिए आगे आने का खुला आमंत्रण थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन का मूल मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ रहा है। आगामी एक माह तक चलने वाला ‘सेवा संकल्प और नवाचार’ अभियान इसी मंत्र को देवभूमि की मिट्टी में व्यावहारिक रूप से रोपने का सशक्त प्रयास है। जब जन-जन के मन में सेवा का भाव जगेगा और नवाचार की सोच कर्म में बदलेगी, तभी उत्तराखंड अपने विकास के उस शिखर को छू सकेगा जिसकी कल्पना इस पावन भूमि के लिए की गई है। यह समय दलगत सीमाओं, व्यक्तिगत स्वार्थों और तात्कालिक लाभों से ऊपर उठकर एक सशक्त, समृद्ध और स्वाभिमानी उत्तराखंड के निर्माण के लिए स्वयं को समर्पित करने का है।


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