Uttarakhand military families: देश की सीमाओं पर जब बर्फीली हवाएं हड्डियों को कंपा रही होती हैं या तपते रेगिस्तान में रेत का हर कण आग उगल रहा होता है, तब भारतीय सेना का जवान बिना पलक झपकाए मातृभूमि की रक्षा में तत्पर रहता है। अपना वर्तमान देश के सुरक्षित भविष्य के नाम करने वाले इन वीर सपूतों और उनके परिवारों के प्रति समाज व शिक्षण संस्थानों की भी गहरी जवाबदेही बनती है। सीमा पर अदम्य साहस का परिचय देने वाले जवानों और अपने प्राणों की आहुति देने वाले बलिदानी सैनिकों के बच्चों के लिए अक्सर उच्च और व्यावसायिक शिक्षा का मार्ग आर्थिक सीमाओं के कारण चुनौतीपूर्ण बन जाता है।
इसी सामाजिक और राष्ट्रीय कर्तव्य की पूर्ति की दिशा में एक बेहद सराहनीय और दूरगामी पहल देखने को मिली है। सैनिक परिवारों को आर्थिक चिंताओं से मुक्त कर उनके बच्चों के सुनहरे भविष्य की मजबूत नींव रखने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘सुपर-300 मिशन एजुकेशन स्कीम’ ने उत्तराखंड सहित पूरे देश के सैनिक परिवारों में एक नई आशा और उत्साह का संचार किया है। सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी और गढ़वाल राइफल्स के बीच ऐतिहासिक समझौता उच्च और व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज तथा अदम्य शौर्य की प्रतीक गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर (जीआरआरसी) के बीच हुआ औपचारिक समझौता इस पुनीत कार्य का आधार बना है।
दोनों संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुए इस द्विपक्षीय समझौते (एमओयू) का सीधा लाभ उन परिवारों तक पहुंचेगा जिन्होंने राष्ट्र की अस्मिता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया है। यह गठबंधन केवल दो प्रशासनिक संस्थाओं का कागजी तालमेल नहीं है, बल्कि यह देश की रक्षा करने वाले जांबाजों के प्रति शिक्षा जगत की कृतज्ञता और सम्मान का सबसे व्यावहारिक प्रकटीकरण है। इस पहल के माध्यम से सैनिक परिवारों के युवाओं को यह भरोसा दिलाया गया है कि कठिन से कठिन समय में भी देश और समाज उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
वीर नारियों, आश्रितों और अग्निवीरों के लिए शत-प्रतिशत फीस छूट का वरदान सुपर-300 मिशन एजुकेशन स्कीम का सबसे संवेदनशील और सशक्त पहलू इसका व्यापक दायरा और रियायतों का ढांचा है। इस योजना के अंतर्गत वीर नारियों, वीर माताओं, बलिदानी सैनिकों के आश्रितों तथा भारतीय सेना में चार वर्ष की समर्पित सेवा पूरी कर नागरिक जीवन में लौटने वाले अग्निवीरों एवं उनके आश्रितों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इन सभी श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले पात्र विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की ट्यूशन फीस में पूरे 100 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी।
इसका सीधा अर्थ यह है कि जिन परिवारों ने अपने चिराग देश के लिए कुर्बान कर दिए, उनके शेष बच्चों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अपनी जमीन, गहने या जमा-पूंजी दांव पर नहीं लगानी पड़ेगी। वहीं अल्पावधि सेवा के बाद आगे की पढ़ाई और अपने करियर को नई दिशा देने की आकांक्षा रखने वाले अग्निवीरों के लिए यह निर्णय एक बहुत बड़ा संबल बनकर उभरा है। सेवारत और सेवानिवृत्त जवानों के बच्चों को भी बड़ी आर्थिक राहत इस योजना की उदारता केवल बलिदानी परिवारों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश की सेवा में दिन-रात मुस्तैद सेवारत सैनिकों तथा जीवन का स्वर्णिम काल सेना को समर्पित कर चुके सेवानिवृत्त पूर्व सैनिकों के योगदान को भी बराबर का सम्मान दिया गया है। योजना के प्रावधानों के तहत सेवारत व सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके आश्रितों को संस्थान के स्वीकृत पाठ्यक्रमों की ट्यूशन फीस में सीधे 40 प्रतिशत की ठोस छूट दी जाएगी।

निजी व्यावसायिक संस्थानों में आज के दौर में बढ़ती शिक्षा लागत को देखते हुए 40 प्रतिशत की यह कटौती किसी भी मध्यमवर्गीय सैनिक परिवार के लिए एक बहुत बड़ी वित्तीय राहत सिद्ध होगी। इससे सैनिक अभिभावक अपने बच्चों को बिना किसी आर्थिक तनाव के देश के श्रेष्ठ व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिलाने के लिए प्रेरित होंगे। व्यावसायिक और तकनीकी पाठ्यक्रमों का विस्तृत फलक अक्सर यह देखा जाता है कि छात्रवृत्तियां या शुल्क रियायतें केवल पारंपरिक और सीमित पाठ्यक्रमों तक सीमित रह जाती हैं, परंतु सुपर-300 मिशन एजुकेशन स्कीम की रूपरेखा आधुनिक रोजगार बाजार की व्यावहारिक मांगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
इस योजना के तहत चिकित्सा शिक्षा और पैरामेडिकल साइंसेज जैसे जीवनरक्षक क्षेत्रों से लेकर आधुनिक प्रबंधन (मैनेजमेंट), कंप्यूटर साइंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी, हॉस्पिटैलिटी व होटल मैनेजमेंट, और विधि (लॉ) जैसे विभिन्न उच्च स्तरीय व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं। इन रोजगारपरक विषयों में शिक्षण और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सैनिक परिवारों के नौजवान न केवल अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार देश-विदेश के कॉरपोरेट या पब्लिक सेक्टर में अपना स्थान सुनिश्चित कर सकेंगे, बल्कि वे स्वतंत्र उद्यम और स्वरोजगार के क्षेत्र में भी मजबूती से कदम बढ़ा सकेंगे। सैन्य नेतृत्व और शिक्षाविदों का साझा दृष्टिकोण इस महत्वपूर्ण अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर के कमांडेंट ब्रिगेडियर विनोद नेगी ने इस पहल की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि किसी भी फौजी के लिए उसका परिवार और उसके बच्चों का सुरक्षित भविष्य सबसे बड़ी चिंता होती है।

जब कोई प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान आगे आकर जवानों के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी साझा करता है, तो मोर्चे पर तैनात सैनिक का मनोबल कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि सैनिकों के अमूल्य योगदान के प्रति कृतज्ञता जताने का इससे अधिक सार्थक, ठोस और टिकाऊ माध्यम दूसरा नहीं हो सकता कि उनकी संतानों को उत्कृष्ट शिक्षा के साधन उपलब्ध कराए जाएं। दूसरी ओर, सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के चेयरमैन एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने इस समझौते की मूल भावना को स्पष्ट करते हुए कहा कि सैनिकों के प्रति हमारा सम्मान केवल राष्ट्रीय पर्वों पर भाषण देने और सोशल मीडिया पर संदेश साझा करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सैनिकों का परिवार पूरे समाज का परिवार है, और उनकी अगली पीढ़ी को जीवन में समान अवसर, उन्नत शिक्षा और गरिमापूर्ण जीवनशैली देना हर नागरिक और संस्था का नैतिक दायित्व है। इसी सामाजिक दायित्व बोध और संवेदनशीलता के कारण उनके संस्थान ने लाभ-हानि के गणित से परे हटकर सैनिक परिवारों के लिए अपने दरवाजे पूरी तरह खोलने का निर्णय लिया है। नशामुक्त युवा अभियान से जुड़ा राष्ट्र निर्माण का संकल्प इस ऐतिहासिक एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम का एक अन्य अत्यंत प्रेरक आयाम युवाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से सुदृढ़ बनाने का सामाजिक संकल्प रहा। कार्यक्रम के दौरान ‘सजग इंडिया’ के राष्ट्रव्यापी नशामुक्त युवा अभियान के तहत उपस्थित सैन्य अधिकारियों, जवानों और युवाओं को नशे की भयावह कुरीतियों के विरुद्ध जागरूक किया गया।
आज जब देश की युवा पीढ़ी आधुनिक जीवनशैली और भटकाव के दौर में नशे के जाल में फंसकर अपनी ऊर्जा बर्बाद कर रही है, तब इस अभियान ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि एक मजबूत, आत्मनिर्भर और सुरक्षित राष्ट्र का निर्माण केवल स्वस्थ, व्यसनमुक्त और शिक्षित युवाओं के दम पर ही संभव है। शारीरिक फिटनेस, उच्च शिक्षा और अटूट अनुशासन का यह समन्वय युवाओं को एक जिम्मेदार नागरिक बनाने का प्रेरक मार्ग प्रशस्त करता है। भविष्य की संभावनाओं को संवारता एक अनुकरणीय कदम संक्षेप में देखा जाए तो गढ़वाल राइफल्स और शिक्षण संस्थान के बीच हुआ यह समझौता मात्र एक औपचारिक प्रशासनिक संधि नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रभक्ति का एक त्रिवेणी संगम है। यह योजना उन माताओं और वीरांगनाओं के आंसुओं को पोंछने का एक विनम्र प्रयास है जिन्होंने देश के लिए अपने सुहाग और बेटे खोए हैं। साथ ही यह उन युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने का खुला आकाश है जो अपने पिता और परिजनों की तरह ही अपने ज्ञान, हुनर और लगन के बल पर देश का मस्तक गर्व से ऊंचा करना चाहते हैं। जब शिक्षा के मंदिर इस प्रकार सैनिकों के त्याग का सम्मान करने आगे आएंगे, तो निश्चित ही राष्ट्र का ताना-बाना और अधिक सुदृढ़, संवेदनशील और आत्मनिर्भर बनेगा।
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