Uttarakhand Food News: मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं में स्वच्छ जल और पौष्टिक आहार सर्वोपरि स्थान रखते हैं। आधुनिक दौर में जब जीवनशैली अत्यंत व्यस्त हो चुकी है और खान-पान के तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव आया है, तब खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करना किसी भी कल्याणकारी सरकार के लिए एक अत्यंत गंभीर और महत्वपूर्ण दायित्व बन जाता है।
खाद्य सामग्री में किसी भी प्रकार की मिलावट अथवा गुणवत्ता में कमी सीधे तौर पर आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। यही कारण है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के अंतर्गत राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर विशेष प्रवर्तन अभियान चलाकर बाज़ार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों के मानकों की जांच की जाती है। उत्तराखंड राज्य में पर्यटन और आतिथ्य सत्कार का एक समृद्ध इतिहास रहा है।
देवभूमि के रूप में विख्यात यह प्रदेश प्रतिवर्ष करोड़ों देशी-विदेशी पर्यटकों का स्वागत करता है। ऐसे में यहाँ स्थित छोटे-बड़े भोजनालयों, मिठाइयों की दुकानों, डेयरी प्रतिष्ठानों से लेकर बहुराष्ट्रीय और फाइव स्टार होटल ब्रांड्स की यह प्राथमिक जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने यहाँ परोसे जाने वाले भोजन में उच्चतम वैश्विक मानकों का पालन करें। जब प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों में भी मानकों के अनदेखी की शिकायतें या आशंकाएं उत्पन्न होती हैं, तो प्रशासनिक मशीनरी का सक्रिय होना अनिवार्य हो जाता है।
हाल ही में राजधानी देहरादून और मसूरी मार्ग पर स्थित प्रमुख लग्जरी होटलों में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा की गई औचक जांच इसी प्रशासनिक सतर्कता और कटिबद्धता का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है। देहरादून में खाद्य सुरक्षा विभाग की अभूतपूर्व कार्रवाई उत्तराखंड के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त विनय शंकर पांडे के स्पष्ट और कड़े निर्देशों के बाद जनपद देहरादून में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक अति-महत्वपूर्ण और व्यापक जांच अभियान का आगाज़ किया गया।
इस विशेष अभियान का मुख्य ध्येय राज्य के उपभोक्ताओं और यहाँ आने वाले पर्यटकों को पूरी तरह से सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना था। इसके साथ ही, हाल के दिनों में बाजार में कृत्रिम अथवा नकली डेयरी उत्पादों, विशेष रूप से एनालॉग पनीर और गैर-दुग्ध वसा से निर्मित खाद्य पदार्थों की बढ़ती बिक्री और इसके नाम पर की जाने वाली अनियमितताओं पर पूर्ण विराम लगाना इस कार्रवाई का एक प्रमुख स्तंभ रहा। विभाग की उच्चस्तरीय टीमों द्वारा देहरादून शहर और मसूरी मार्ग पर स्थित देश-विदेश के अग्रणी और प्रतिष्ठित फाइव स्टार होटल प्रतिष्ठानों को जांच के दायरे में लाया गया।
इस सघन निरीक्षण अभियान के अंतर्गत ताज होटल, फेयरफील्ड, जेडब्ल्यू मैरियट, हयात सेंट्रिक तथा हयात रीजेंसी जैसे विश्व प्रसिद्ध हॉस्पिटैलिटी ब्रांड्स के परिसरों में जाकर खाद्य सुरक्षा मानकों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की गई। इस स्तर की व्यापक कार्रवाई ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रशासनिक तंत्र की नज़र में कानून और नियमों का अनुपालन प्रत्येक कारोबारी संस्था के लिए एकसमान रूप से अनिवार्य है। रसोई से लेकर कोल्ड स्टोरेज तक का सूक्ष्म परीक्षण खाद्य सुरक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और खाद्य संरक्षकों की संयुक्त टीम ने निरीक्षण प्रक्रिया के दौरान अत्यंत सूक्ष्म और तकनीकी दृष्टिकोण अपनाया। जांच केवल बाहरी सजावट या ऊपरी व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि टीम ने होटलों की मुख्य रसोइयों, कच्चे माल के विशाल भंडारों, ड्राई स्टोर रूम, फ्रीजर तथा पैकेज्ड खाद्य सामग्री के रख-रखाव के स्थानों का बारीकी से परीक्षण किया।
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इस दौरान यह जांचा गया कि भोजन पकाने में इस्तेमाल किए जाने वाले तेल, मसाले, आटा, दालें और डेयरी उत्पाद निर्धारित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं या नहीं। इसके अतिरिक्त खाद्य पदार्थों को संचित करने के तापमान, स्वच्छता व्यवस्था, शेल्फ-लाइफ के नियमों का पालन, उपयोग की अंतिम तिथि, और रसोई कर्मचारियों द्वारा अपनाई जाने वाली व्यक्तिगत स्वच्छता का भी गहन अध्ययन किया गया। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भोजन निर्माण की प्रक्रिया में प्रयुक्त होने वाली प्रत्येक सामग्री का स्रोत प्रमाणित होना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में असुरक्षित अथवा एक्सपायर हो चुके कच्चे माल का भंडारण या प्रयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रयोगशाला परीक्षण हेतु नमूनों का संकलन और विभागीय नोटिस सघन निरीक्षण के दौरान पाई गई सामग्रियों की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए खाद्य सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत विभिन्न प्रतिष्ठानों से विधिक नमूने एकत्र किए गए।
इसी क्रम में हयात रीजेंसी के परिसर से भोजन पकाने में प्रयुक्त होने वाले मसालों के सैंपल लिए गए, जबकि जेडब्ल्यू मैरियट होटल की रसोई से तैयार दाल का नमूना खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप वैज्ञानिक परीक्षण हेतु विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए एकत्र किया गया। एकत्र किए गए इन सभी नमूनों को सीलबंद कर राज्य की अधिकृत खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है, जहाँ रासायनिक और सूक्ष्मजैविक मानकों पर इनकी गुणवत्ता की गहन जांच की जाएगी। प्रयोगशाला की आधिकारिक जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत नियमानुसार अग्रिम कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। केवल सैंपल लेने तक ही यह कार्रवाई सीमित नहीं रही, बल्कि हयात रीजेंसी के स्टोर रूम में पाए गए पैकेज्ड उत्पादों, जैसे कि गुलकंद, इंपोर्टेड ऑर्गेनो और सौंफ के विनिर्माण और गुणवत्ता संबंधी प्रमाणिकता पर भी संज्ञान लिया गया।
इन पैक्ड खाद्य सामग्रियों के संबंध में संबंधित उत्पादक एवं आपूर्तिकर्ता कंपनियों से आवश्यक तकनीकी दस्तावेज, गुणवत्ता प्रमाणपत्र और वैधानिक जानकारियां प्रस्तुत करने हेतु अधिकारियों द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इस पूरे प्रकरण में विभागीय स्तर पर गहन जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया निरंतर जारी है। प्रशासनिक संदेश और आयुक्त विनय शंकर पांडे का कड़ा रुख कार्रवाई के पश्चात खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तराखंड के आयुक्त विनय शंकर पांडे ने विभाग की मंशा और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को पूरी तरह स्पष्ट किया। उन्होंने दोटुक शब्दों में कहा कि उत्तराखंड राज्य की समस्त जनता तथा यहाँ पधारने वाले प्रत्येक श्रद्धालु और पर्यटक को सुरक्षित, शुद्ध और पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च और गैर-समझौतावादी प्राथमिकता है।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, शुद्धता और स्वच्छता के साथ किसी भी स्तर पर किया गया खिलवाड़ किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगा। “प्रदेश की जनता को सुरक्षित, शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। खाद्य प्रतिष्ठान चाहे छोटा हो या बड़ा, सामान्य दुकान हो अथवा फाइव स्टार होटल—खाद्य सुरक्षा के नियम सभी के लिए समान हैं।” — विनय शंकर पांडे, आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तराखंड आयुक्त ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि राज्य में खाद्य सुरक्षा कानूनों का अनुपालन अनिवार्य है और इस विषय में कोई भी प्रतिष्ठान खुद को नियमों से ऊपर नहीं मान सकता। चाहे कोई अत्यंत छोटा रेहड़ी-पटरी व्यापारी हो, स्थानीय मिठाई की दुकान हो, मध्यम श्रेणी का रेस्टोरेंट हो या फिर वैश्विक पहचान रखने वाला फाइव स्टार लग्जरी होटल—कानून की नजर में सभी खाद्य कारोबारी समान उत्तरदायित्व रखते हैं।
यदि कोई संस्थान खाद्य पदार्थों में मिलावट करता पाया जाता है या घटिया सामग्री का उपयोग करता है, तो उसके विरुद्ध अधिनियम के तहत कठोरतम कदम उठाए जाएंगे। एनालॉग पनीर और गैर-दुग्ध उत्पादों का बढ़ता खतरा वर्तमान समय में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में कई ऐसे उत्पाद देखने को मिल रहे हैं जो देखने और स्वाद में पारंपरिक डेयरी उत्पादों जैसे प्रतीत होते हैं, परंतु वास्तव में वे वनस्पति तेलों, स्टार्च और रसायनों के मिश्रण से तैयार किए जाते हैं। इन्हें तकनीकी भाषा में एनालॉग पनीर अथवा गैर-दुग्ध उत्पाद कहा जाता है। यद्यपि कुछ मामलों में इनका व्यापारिक उपयोग नियमों के तहत लेबलिंग के साथ अनुमत हो सकता है, परंतु यदि इन्हें असली दुग्ध निर्मित पनीर या शुद्ध मक्खन के रूप में ग्राहकों को परोसा जाता है, तो यह सीधा धोखाधड़ी और उपभोक्ता अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। आयुक्त विनय शंकर पांडे ने अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देशित किया कि एनालॉग पनीर, नकली खोया, सिंथेटिक दूध तथा अन्य गैर-दुग्ध पदार्थों के अवैध विक्रय और इनके नाम पर की जाने वाली किसी भी प्रकार की मिलावटखोरी पर कड़ी नजर रखी जाए। आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे किसी भी प्रयास को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत ऐसे मामलों में भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ आपराधिक मुकदमे दर्ज करने और व्यावसायिक लाइसेंस रद्द करने तक की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नियमित औचक निरीक्षण और प्रवर्तन प्रक्रिया को गति खाद्य सुरक्षा तंत्र को अधिक चुस्त-दुरुस्त और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से शीर्ष नेतृत्व द्वारा विभागीय अधिकारियों को कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। आयुक्त खाद्य ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षकों की टीम केवल शिकायतों के इंतजार में न रहे, बल्कि क्षेत्र में सक्रिय रहकर होटल, रेस्टोरेंट, डेयरी, मिठाई प्रतिष्ठानों, बेकरी और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का नियमित और औचक निरीक्षण करती रहे।
आकस्मिक जांच से मिलावटखोरों में कानून का भय बना रहता है और प्रतिष्ठान स्वच्छता मानकों के प्रति अधिक सजग रहते हैं। इसके साथ ही नमूना संग्रहण की प्रक्रिया को वैज्ञानिक, निष्पक्ष और समयबद्ध बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। प्रयोगशालाओं में नमूनों की त्वरित जांच सुनिश्चित करने और रिपोर्ट के आधार पर बिना किसी विलंब के कानूनी कार्रवाई को अंजाम देने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि वे खाद्य व्यवसायियों को जागरूक करने के साथ-साथ कड़े प्रवर्तन उपायों को लागू करें, ताकि पूरे राज्य में खाद्य सुरक्षा का एक सकारात्मक और विश्वसनीय वातावरण निर्मित हो सके। जीरो टॉलरेंस नीति: स्वस्थ नागरिक और सुरक्षित खाद्य का संकल्प उत्तराखंड सरकार की नीति राज्य के प्रत्येक नागरिक के सर्वांगीण विकास और कल्याण पर केंद्रित है। एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए सुरक्षित और शुद्ध भोजन की उपलब्धता सबसे प्राथमिक आवश्यकता होती है।
राज्य सरकार ने खाद्य पदार्थों में किसी भी प्रकार की मिलावट, अस्वच्छता और मानकों के उल्लंघन के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ यानी शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई है। इस नीति का सीधा तात्पर्य यह है कि मिलावटखोरी के अपराध में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका प्रभाव या रसूख कितना भी बड़ा क्यों न हो। सरकार की इस स्पष्ट नीति के कारण ही आज खाद्य सुरक्षा विभाग पूरी स्वतंत्रता और निष्पक्षता के साथ बड़े से बड़े कॉरपोरेट प्रतिष्ठानों पर भी प्रभावी कानूनी शिकंजा कसने में सक्षम हुआ है। सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की यह मुहिम न केवल नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करती है, बल्कि उत्तराखंड की एक सुरक्षित और जिम्मेदार पर्यटन केंद्र के रूप में अंतरराष्ट्रीय छवि को भी सुदृढ़ बनाती है। जब पर्यटक यहाँ आते हैं और उन्हें उच्च गुणवत्ता का स्वच्छ भोजन मिलता है, तो राज्य के पर्यटन उद्योग को एक नई दिशा और विश्वसनीयता प्राप्त होती है। निरंतर जारी रहेगा शुद्धता का यह महाअभियान देहरादून और मसूरी के फाइव स्टार होटलों में की गई यह छापेमारी कोई एक दिवसीय सांकेतिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह एक लंबे और निरंतर चलने वाले प्रशासनिक अभियान का प्रारंभिक चरण है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यह जांच प्रक्रिया किसी सीमित दायरे या कुछ चुने हुए प्रतिष्ठानों तक सिमटकर नहीं रहेगी। आने वाले समय में देहरादून जनपद के कोने-कोने में, जिसमें शहरी बाजारों से लेकर ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्र शामिल हैं, खाद्य प्रतिष्ठानों की आकस्मिक जांच, गहन निरीक्षण, सैंपल कलेक्शन और लैब टेस्टिंग की कार्रवाई निर्बाध रूप से जारी रखी जाएगी। प्रयोगशाला से प्राप्त होने वाली वैज्ञानिक रिपोर्टों और जांच के दौरान उजागर होने वाले तथ्यों के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की न्यायिक और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यदि जांच रिपोर्ट में सैंपल फेल होते हैं या हानिकारक रसायनों की उपस्थिति पाई जाती है, तो दोषी प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त विधिक कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन के इस निरंतर और कड़े रुख से यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि उत्तराखंड में जनस्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोपरि है और खाद्य पदार्थों की शुद्धता के साथ समझौता करने वालों के लिए राज्य में कोई स्थान नहीं है।
उपभोक्ता जागरूकता और सामूहिक सहभागिता का महत्व किसी भी प्रशासनिक अभियान की पूर्ण सफलता के लिए जन-सामान्य की जागरूकता और सक्रिय सहभागिता अत्यंत आवश्यक होती है। यद्यपि खाद्य सुरक्षा विभाग अपनी ओर से लगातार निरीक्षण और कानूनी कार्रवाई कर रहा है, परंतु उपभोक्ताओं को भी अपने अधिकारों और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। भोजन खरीदते या किसी प्रतिष्ठान में भोजन करते समय पैकेजिंग की तारीख, एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर, न्यूट्रिशनल वैल्यू और स्वच्छता की स्थिति पर ध्यान देना प्रत्येक जागरूक नागरिक का कर्तव्य बनता है। यदि किसी नागरिक या उपभोक्ता को किसी खाद्य सामग्री में मिलावट, बासीपन, दुर्गंध या अनैतिक व्यापारिक गतिविधियों की आशंका होती है, तो उन्हें तुरंत इसकी शिकायत खाद्य सुरक्षा विभाग के आधिकारिक टोल-फ्री नंबर या पोर्टल पर दर्ज करानी चाहिए। जन-जागरूकता और प्रशासनिक तत्परता के इसी साझा प्रयास से उत्तराखंड को एक पूर्णतः शुद्ध, सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य वातावरण प्रदान किया जा सकता है। देहरादून में हुई यह हालिया कार्रवाई इसी दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी और राज्य में खाद्य मानकों को एक नया तथा उच्च स्तर प्रदान करेगी।








