IMA holds its 127th graduation ceremony News In Hindi: देहरादून की वादियों में स्थित देश की प्रतिष्ठित सैन्य अकादमी, भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए), इन दिनों गौरव, अनुशासन और अटूट समर्पण के एक नए अध्याय की गवाह बन रही है। अकादमी में पासिंग आउट परेड (पीओपी) को लेकर तैयारियां अपने अंतिम और सबसे भव्य चरण में पहुंच चुकी हैं। इस बार की परेड न केवल देश के इन युवा जांबाजों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए बेहद खास होने जा रही है, क्योंकि आगामी 13 जून को आयोजित होने वाली इस भव्य मुख्य परेड में देश की राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगी। राष्ट्रपति की मौजूदगी युवा कैडेटों के हौसलों को एक नई उड़ान देने वाली है, जिसके लिए पूरे अकादमी परिसर को बेहद खूबसूरती और सैन्य गरिमा के साथ सजाया जा रहा है।

ऐतिहासिक और गौरवमयी सिलसिले की शुरुआत
इसी ऐतिहासिक और गौरवमयी सिलसिले की शुरुआत के रूप में, आईएमए की विश्व प्रसिद्ध और ऐतिहासिक चेटवुड बिल्डिंग के भव्य सभागार में सेना के अधिकारियों, गणमान्य अतिथियों और कैडेट्स के परिजनों की उपस्थिति में 127वीं ग्रेजुएशन सेरेमनी यानी दीक्षांत समारोह का बेहद गरिमामय आयोजन किया गया। इस विशेष समारोह में आर्मी कैडेट कॉलेज (एसीसी) विंग के कुल 73 जांबाज कैडेट्स को उनकी कड़ी मेहनत और शैक्षणिक लगन के लिए स्नातक की उपाधि से नवाजा गया। भारतीय सैन्य अकादमी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नागेंद्र सिंह ने इस दीक्षांत समारोह की गरिमा को बढ़ाते हुए सभी सफल कैडेट्स को देश के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की स्नातक डिग्रियां प्रदान कर उन्हें विधिवत दीक्षित किया। इस वर्ष स्नातक की उपाधि प्राप्त करने वाले इन 73 जांबाज युवाओं में से 32 कैडेट्स ने विज्ञान वर्ग में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, जबकि 41 कैडेट्स ने मानविकी यानी आर्ट्स वर्ग से अपनी शिक्षा पूरी कर यह मुकाम हासिल किया।
दीक्षांत समारोह का माहौल भावनात्मक और गर्व से भरा रहा
इस दीक्षांत समारोह का माहौल उस समय और भी अधिक भावनात्मक और गर्व से भर गया जब देश सेवा के लिए खुद को समर्पित करने वाले इन कैडेट्स को उनकी विशिष्ट प्रतिभा और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पदक प्रदान किए गए। कड़े प्रशिक्षण और पढ़ाई के बीच अपने असाधारण प्रदर्शन की बदौलत विंग कैडेट कैप्टन नवीन ने सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया, जिसके लिए उन्हें प्रतिष्ठित ‘चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ गोल्ड मेडल’ से सम्मानित किया गया। वहीं, उनके सहपाठी कंपनी कैडेट कैप्टन अवनीश कुमार मिश्रा ने रजत पदक (सिल्वर मेडल) पर अपना कब्जा जमाया और विंग कैडेट क्वार्टर मास्टर हर्षराज को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और प्रदर्शन के लिए कांस्य पदक (ब्रॉन्ज मेडल) से नवाजा गया। इसके अतिरिक्त, सैन्य विषयों और मानविकी वर्ग की पढ़ाई में लगातार बेहतरीन और सराहनीय प्रदर्शन करने के लिए युवा कैडेट अमनप्रीत सिंह को भी विशेष सम्मान व पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पदक हासिल करने वाले इन युवाओं के चेहरों पर जहां एक तरफ अपने माता-पिता का नाम रोशन करने की चमक थी, वहीं दूसरी तरफ देश के लिए कुछ कर गुजरने का एक गहरा संकल्प भी साफ दिखाई दे रहा था।

73 कैडेट्स अगले एक वर्ष तक कठिन, कड़े सैन्य प्रशिक्षण से गुजरेंगे
डिग्री और पदक हासिल करने वाले ये सभी भाग्यशाली कैडेट्स अब अपने जीवन के एक और सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण दौर में प्रवेश कर चुके हैं। एसीसी विंग से स्नातक की यह महत्वपूर्ण सीढ़ी पार करने के बाद, अब ये सभी 73 कैडेट्स अगले एक वर्ष तक भारतीय सैन्य अकादमी के भीतर ही बेहद कठिन, कड़े और उच्च स्तरीय सैन्य प्रशिक्षण से गुजरेंगे। इस एक साल के दौरान इन्हें आधुनिक युद्ध कला, रणनीतिक कौशल, नेतृत्व क्षमता और शारीरिक व मानसिक रूप से अत्यंत मजबूत बनाने के लिए तैयार किया जाएगा। इस कठोर सैन्य प्रशिक्षण की अग्निपरीक्षा को सफलतापूर्वक पूरा करने के तुरंत बाद, इन सभी जांबाजों को भारतीय सेना में अधिकारी यानी ‘लेफ्टिनेंट’ के रूप में प्रतिष्ठित कमीशन प्राप्त होगा, जिसके बाद वे देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अग्रिम मोर्चों पर तैनात किए जाएंगे।

एक सैनिक के जीवन में राष्ट्रसेवा ही सर्वोपरि
दीक्षांत समारोह के इस पावन और गौरवमयी अवसर पर कैडेट्स को संबोधित करते हुए आईएमए के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नागेंद्र सिंह ने बेहद प्रेरणादायक और ओजस्वी विचार साझा किए। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि एक सच्चे और सफल सैन्य अधिकारी की असली पहचान केवल उसकी वर्दी से नहीं, बल्कि उसके अडिग चरित्र, कड़े आत्म-अनुशासन, अदम्य साहस, हमेशा सकारात्मक सोचने की क्षमता और अपने काम के प्रति सर्वोच्च पेशेवर दक्षता से होती है। उन्होंने युवा कैडेट्स को चेताते हुए और प्रेरित करते हुए कहा कि आने वाला समय तकनीक और युद्ध के मैदान में तेजी से बदल रहे तौर-तरीकों का है, इसलिए उन्हें हर पल भविष्य की अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करने के लिए खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रखना होगा। उन्होंने कैडेट्स के भीतर राष्ट्रप्रेम की अलख जगाते हुए यह मूलमंत्र दिया कि एक सैनिक के जीवन में राष्ट्रसेवा ही सर्वोपरि होनी चाहिए और अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर देश की संप्रभुता तथा अखंडता की रक्षा करना ही उनका पहला और अंतिम कर्तव्य होना चाहिए।
आईएमए के कैडेट्स ने अपने सैन्य जीवन की एक बेहद महत्वपूर्ण
गर्व, अनुशासन, जोश और देश के प्रति बिना किसी शर्त के समर्पण के इस अद्भुत माहौल के बीच, आईएमए के इन युवा कैडेट्स ने अपने सैन्य जीवन की एक बेहद महत्वपूर्ण और यादगार उपलब्धि को अपने नाम दर्ज करा लिया है। चेटवुड हॉल की ऐतिहासिक दीवारें इन युवाओं के बुलंद हौसलों और भारत माता की जय के नारों से गूंज उठीं। अब देश की निस्वार्थ सेवा का एक पवित्र और बड़ा सपना अपनी आंखों में संजोए ये सभी जांबाज कैडेट्स अपने अंतिम व सबसे कठिन सैन्य प्रशिक्षण के मार्ग पर पूरी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ चुके हैं। पूरा देश अब उस पल का गवाह बनने का इंतजार कर रहा है जब ये युवा अपनी अंतिम बाधाओं को पार करके जल्द ही भारतीय सेना में सैन्य अधिकारी के रूप में शामिल होंगे और देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने की एक अत्यंत महत्वपूर्ण तथा नई जिम्मेदारी अपने कंधों पर संभालेंगे।







