Haridwar Police News: उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में पुलिस ने संगठित साइबर अपराध के एक बेहद जटिल और फैले हुए नेटवर्क पर कड़ा प्रहार किया है। श्यामपुर कोतवाली पुलिस की एक नियमित वाहन चेकिंग मुहिम उस वक्त एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के खुलासे में बदल गई, जब पुलिसकर्मियों ने एक संदिग्ध स्विफ्ट कार को रोककर उसकी तलाशी ली। कार के भीतर मौजूद युवकों की घबराहट और उनके पास से मिले बैंकिंग तथा इलेक्ट्रॉनिक साजो-सामान ने पुलिस को चौंका दिया। जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि पकड़े गए आरोपी बिहार के कुख्यात साइबर हब नालंदा और नवादा से जुड़े हैं, जिन्हें अपराध जगत में ‘मगध साइबर गैंग’ के तौर पर जाना जाता है। इस गिरोह में स्थानीय हरिद्वार के युवक भी शामिल थे, जो ठगी के इस पूरे तंत्र को जमीन पर स्थानीय मदद मुहैया करा रहे थे।
पुलिस ने मौके से पांच आरोपियों को हिरासत में लेकर जब गहन तलाशी ली, तो उनके पास से पैंतीस विभिन्न बैंकों के एटीएम और डेबिट कार्ड, चौदह बैंक पासबुकें, सत्रह सक्रिय सिम कार्ड, अठारह स्मार्टफोन, दो आधुनिक लैपटॉप और सैंतीस हजार पांच सौ रुपये की नकदी बरामद हुई। इतनी बड़ी तादाद में दूसरे लोगों के नाम पर जारी बैंकिंग दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का मिलना इस बात का सीधा प्रमाण था कि यह कोई साधारण ठगी का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत सुनियोजित और पेशेवर सिंडिकेट काम कर रहा है।
बरामद डिजिटल उपकरणों और बैंक दस्तावेजों के शुरुआती विश्लेषण में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों से जुड़े अलग-अलग बैंक खातों के जरिए दो करोड़ पचहत्तर लाख रुपये से भी अधिक के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन के पुख्ता सुराग मिले हैं। यह रकम केवल एक शुरुआती आंकड़ा है, जो आरोपियों के पास मौजूद कुछ प्राथमिक खातों के संक्षिप्त विवरण से सामने आया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जब सभी जब्त खातों की विस्तृत स्टेटमेंट और ऑडिट रिपोर्ट तैयार होगी, तो ठगी का यह आंकड़ा कई गुना ज्यादा बड़ा निकल सकता है।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि यह गिरोह साइबर ठगी की दुनिया में बेहद प्रचलित ‘म्यूल अकाउंट नेटवर्क’ यानी किराये या फर्जी दस्तावेजों पर खोले गए खातों के जरिए काम करता था। देश के अलग-अलग हिस्सों में आम नागरिकों को विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन झांसे देकर उनसे ठगी की जाती थी। ठगी की यह रकम सीधे मुख्य आरोपियों के खाते में जाने के बजाय दर्जनों लेयर्स में इन म्यूल खातों में मंगाई जाती थी। इसके बाद व्हाट्सएप चैट और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड माध्यमों पर क्यूआर कोड और यूपीआई आईडी साझा कर रकम को तेजी से दूसरे खातों में घुमाया जाता था, ताकि जांच एजेंसियों के लिए पैसे के मूल स्रोत तक पहुंचना नामुमकिन हो जाए।
इस सिंडिकेट का सबसे अहम काम था अंतिम छोर पर डिजिटल रकम को नकदी में बदलना। गिरोह के सदस्य अलग-अलग इलाकों के एटीएम बूथों पर जाकर दर्जनों डेबिट कार्डों की मदद से भारी मात्रा में कैश निकाल लेते थे। नकदी बाहर आते ही साइबर ट्रेल पूरी तरह टूट जाता था और ठगी का पैसा सुरक्षित रूप से मुख्य सरगनाओं तक कमीशन काटकर पहुंचा दिया जाता था। बरामद मोबाइल फोनों से मिली चैट, वॉइस नोट्स, बैंक ट्रांसफर के स्क्रीनशॉट और क्यूआर कोड इस संगठित कार्यप्रणाली की गवाही दे रहे हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में बिहार के नालंदा और नवादा जिलों के शातिर साइबर अपराधियों के साथ-साथ हरिद्वार के स्थानीय युवक भी शामिल हैं। स्थानीय युवकों की भूमिका मुख्य रूप से शहर में सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने, अलग-अलग एटीएम से बिना किसी शक के नकदी निकालने और स्थानीय स्तर पर फर्जी पतों या भोले-भाले लोगों को पैसों का लालच देकर उनके बैंक खाते खुलवाने तक सीमित थी। इस तरह का अंतरराज्यीय गठजोड़ यह दिखाता है कि कैसे साइबर ठगी के संगठित गिरोह अब अलग-अलग राज्यों में स्थानीय युवाओं को लालच देकर अपने साथ जोड़ रहे हैं।
हरिद्वार पुलिस अब इस पूरे मामले को बहुत गहराई से खंगाल रही है। जब्त किए गए सभी लैपटॉप, मोबाइल फोन और सिम कार्डों को फॉरेंसिक लैब भेजा जा रहा है ताकि डिलीट किए गए डेटा, चैट हिस्ट्री और कॉल रिकॉर्ड्स को दोबारा हासिल किया जा सके। इसके साथ ही संबंधित बैंकों से इन सभी संदिग्ध खातों की मुकम्मल ट्रांजैक्शन हिस्ट्री, खाताधारकों के केवाईसी दस्तावेज और आईपी लॉग्स मांगे गए हैं। पुलिस की विशेष साइबर टीमें इस बात की पड़ताल में जुटी हैं कि देश के किन-किन राज्यों में दर्ज मुकदमों से इस गिरोह के तार जुड़े हैं।
पुलिस का स्पष्ट कहना है कि यह केवल एक शुरुआती सफलता है। तकनीकी और फॉरेंसिक जांच पूरी होने के बाद न केवल ठगी की वास्तविक कुल राशि का सही-सही आकलन हो सकेगा, बल्कि पर्दे के पीछे बैठकर पूरे गिरोह को नियंत्रित करने वाले मास्टरमाइंड और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मददगारों के चेहरे भी बेनकाब होंगे। धर्मनगरी की पुलिस द्वारा की गई इस मुस्तैद कार्रवाई ने निश्चित रूप से एक बड़े साइबर अपराध चक्र को बड़ा झटका दिया है।

हरिद्वार पुलिस ने साइबर क्राइम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नालंदा और नौगांवा के ‘मगध साइबर गैंग’ का पर्दाफाश किया है। श्यामुपुर पुलिस ने एक संदिग्ध स्विफ्ट कार की चेकिंग के दौरान पांच आरोपियों को पकड़ा। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से 35 ATM और डेबिट कार्ड, 14 बैंक पासबुक, 17 सिम कार्ड, 18 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप और 37,500 रुपये नकद बरामद किए गए। ज़ब्त किए गए । बैंकिंग दस्तावेज़ों और डिजिटल डिवाइस की शुरुआती जांच से पता चला है कि अलग-अलग अकाउंट्स के ज़रिए 2.75 करोड़ रुपये से ज़्यादा के संदिग्ध डिजिटल ट्रांज़ैक्शन हुए हैं। पुलिस ने बताया कि मोबाइल फोन में WhatsApp चैट, QR कोड, बैंक अकाउंट और ट्रांज़ैक्शन से जुड़ी जानकारी मिली है। शुरुआती जांच से एक ऐसे नेटवर्क का पता चला है जो कथित तौर पर साइबर स्कैम का पैसा ‘म्यूल अकाउंट्स’ में जमा करता था, उसे UPI के ज़रिए आगे भेजता था और ATM से नकद निकालता था। वहीं गिरफ्तार आरोपियों में बिहार के नालंदा और नवादा के साथ हरिद्वार के रहने वाले युवक भी शामिल हैं। पुलिस अब बैंक खातों की पूरी ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच के जरिए इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद संदिग्ध रकम और पूरे साइबर नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।








