Green Chardham Yatra 2026 Mdano News: उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। वर्ष 2026 की यात्रा को ऐतिहासिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ‘हरित चारधाम यात्रा’ (Green Chardham Yatra) का संकल्प लिया है। इस संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए ‘खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग’ (FDA) ने कमर कस ली है। इस बार यात्रा मार्ग पर न केवल शुद्ध और सात्विक भोजन सुनिश्चित किया जा रहा है, बल्कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

1. मोबाइल फूड सेफ्टी वैन और क्विक रिस्पांस टीमें (QRT)
तीर्थयात्रियों के स्वास्थ्य से कोई समझौता न हो, इसके लिए विभाग ने तकनीक और त्वरित कार्रवाई का सहारा लिया है।
- चलती-फिरती प्रयोगशालाएं: यात्रा मार्ग पर ‘मोबाइल फूड सेफ्टी वैन’ तैनात की गई हैं। ये वैन अत्याधुनिक उपकरणों से लैस हैं जो मौके पर ही खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच कर सकती हैं।
- त्वरित कार्रवाई (QRT): यदि किसी यात्री को भोजन की गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत होती है, तो उसके निवारण के लिए ‘क्विक रिस्पांस टीमें’ सक्रिय रहेंगी।
- टोल-फ्री नंबर: विभाग ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हेल्पलाइन नंबर 18001804246 जारी किया है, जिस पर यात्री अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। Green Chardham Yatra 2026 News
2. ‘ईट राइट’ (Eat Right) अभियान और कारोबारियों का प्रशिक्षण
आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन, सचिन कुर्वे के निर्देशों पर विभाग ने ऋषिकेश से लेकर बद्रीनाथ-केदारनाथ तक के होटल और ढाबा संचालकों के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाएं शुरू की हैं। अब तक उत्तरकाशी, श्रीनगर, देवप्रयाग, चंबा और रुद्रप्रयाग जैसे प्रमुख पड़ावों पर 250 से अधिक कारोबारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। Green Chardham Yatra 2026 News
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु:
- नमक, चीनी और तेल का संतुलित प्रयोग: हृदय रोग और मधुमेह (Diabetes) से जूझ रहे यात्रियों को ध्यान में रखते हुए भोजन में तेल, नमक और चीनी का कम उपयोग करने की सलाह दी जा रही है।
- खाद्य तेल का पुन: उपयोग (RUCO): ‘ईट राइट’ अभियान के तहत होटल मालिकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एक ही तेल को तीन बार से अधिक गर्म न करें। बचे हुए तेल को फेंकने के बजाय उसे ‘बायोफ्यूल’ बनाने के लिए एकत्र किया जाएगा। Green Chardham Yatra 2026 News
3. ‘हरित यात्रा’ और प्लास्टिक मुक्त चारधाम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विजन है कि चारधाम की पवित्रता और वहां की पारिस्थितिकी (Ecology) सुरक्षित रहे। इसके लिए ‘रिड्यूस, रियूज और रिसाइकिल’ (3Rs) के सिद्धांत पर काम किया जा रहा है। Green Chardham Yatra 2026 News
- सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध: यात्रा मार्ग को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। होटल और ढाबों को इको-फ्रेंडली विकल्पों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
- स्वच्छता ऑडिट: केवल भोजन की शुद्धता ही नहीं, बल्कि ढाबों के आसपास की स्वच्छता और कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था की भी नियमित जांच की जा रही है।
4. रोटेशन के आधार पर अधिकारियों की तैनाती
यात्रा के दौरान भारी भीड़ को देखते हुए, विभाग ने मैनपावर का कुशल प्रबंधन किया है। रोटेशन प्रणाली के आधार पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (FSOs) की तैनाती की गई है, जिससे यात्रा के हर पड़ाव पर 24/7 निगरानी सुनिश्चित हो सके। यह टीमें न केवल छापेमारी करेंगी, बल्कि व्यापारियों को स्वच्छता मानकों के प्रति जागरूक भी करेंगी।
उत्तराखंड में एक सुरक्षित और सुखद अनुभव
उत्तराखंड सरकार का यह ‘हरित अभियान’ न केवल पर्यावरण को बचाएगा, बल्कि यात्रियों के बीच राज्य की एक सकारात्मक छवि भी पेश करेगा। जब यात्री को शुद्ध भोजन, स्वच्छ जल और प्रदूषण मुक्त वातावरण मिलेगा, तो उसकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुखद होगी। ‘हरित चारधाम यात्रा’ पर्यटन और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश कर रही है।Green Chardham Yatra 2026 News

मुख्य जानकारी (Quick Highlights)
| विशेषता | विवरण |
| अभियान का नाम | हरित चारधाम यात्रा (Green Chardham Yatra) |
| विभाग | खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) |
| हेल्पलाइन नंबर | 18001804246 |
| प्रमुख लक्ष्य | मिलावट मुक्त भोजन, बायोफ्यूल निर्माण, प्लास्टिक मुक्ति |
| प्रशिक्षण स्थल | उत्तरकाशी, श्रीनगर, देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग, आदि |
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