Dehradun News In Hindi: देहरादून प्रदेश में फल और सब्जियों में कीटनाशकों के बढ़ते अवशेषों (Pesticide Residues) ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। जनस्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) पूरी तरह सख्त हो गया है। विभाग ने न केवल नमूनों की जांच शुरू कर दी है, बल्कि कृषि और उद्यान विभाग के साथ मिलकर एक बड़े पैमाने पर जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
जनस्वास्थ्य के लिए बढ़ता खतरा
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त सचिन कुर्वे ने इस संबंध में सचिव कृषि एवं उद्यान को एक औपचारिक पत्र लिखा है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा समय-समय पर किए गए सर्विलांस अभियानों में यह बात सामने आई है कि खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों के अवशेष पाए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि क्षेत्र में कीटनाशकों का अवैज्ञानिक और अनियंत्रित उपयोग इसका मुख्य कारण है। जब किसान बिना जानकारी के या अधिक पैदावार के लालच में तय मानकों से ज्यादा रसायनों का छिड़काव करते हैं, तो वे रसायन फलों और सब्जियों की बाहरी सतह के साथ-साथ उनके भीतर तक समा जाते हैं। यह स्थिति कैंसर, लिवर की बीमारियों और हार्मोनल असंतुलन जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रही है।
विभागों का संयुक्त मोर्चा
आयुक्त द्वारा लिखे गए पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि केवल कार्रवाई से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए जमीनी स्तर पर काम करना होगा:
- किसान कार्यशालाएं: कृषि विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे ब्लॉक और ग्राम स्तर पर किसानों के लिए जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करें। उन्हें कीटनाशकों के सीमित और सही उपयोग की जानकारी दी जाए।
- मंडी व्यापारियों की भूमिका: स्थानीय मंडियों के व्यापारियों और फल-सब्जी विक्रेताओं को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा ताकि वे भी गुणवत्ता सुनिश्चित करने में सहयोग करें।
- जैविक खेती को प्रोत्साहन: किसानों को रसायनों के बजाय जैविक खाद और प्राकृतिक कीट नियंत्रण विधियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

सैंपलिंग और प्रयोगशाला जांच तेज
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के उपायुक्त (मुख्यालय) गणेश कंडवाल के अनुसार, आयुक्त के निर्देशों के बाद पूरे प्रदेश में सघन अभियान शुरू कर दिया गया है।
“अब तक प्रदेश के विभिन्न जिलों से आम, केला, पपीता और तरबूज जैसे मौसमी फलों के 39 नमूने लिए गए हैं। इनमें से 19 नमूने कुमाऊं क्षेत्र से लिए गए हैं। इन सभी नमूनों को राजकीय प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है।”
यह अभियान केवल फलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में हरी सब्जियों और अन्य खाद्य सामग्रियों की भी व्यापक स्तर पर जांच की जाएगी।
मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि खाद्य पदार्थों में मिलावट और रसायनों का खेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन अपने चरम पर है। ऐसे में प्रदेशवासियों के साथ-साथ बाहर से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों का स्वास्थ्य हमारी प्राथमिकता है।
सभी संबंधित विभागों को एक समन्वित दृष्टिकोण (Coordinated Approach) अपनाकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उत्तराखंड को ‘स्वच्छ और सुरक्षित खाद्य प्रदेश’ के रूप में स्थापित किया जा सके।
(For more news apart from Dehradun Government strict on indiscriminate use of pesticides in fruits and vegetables News in hindi, stay tuned to Mdano News In Hindi)









