Dehradun News: उत्तराखंड के पर्वतीय और दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में आम नागरिकों को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं, प्रमाणपत्रों, सिंचाई की नालियों या विद्यालय की टूटी छतों की शिकायत लेकर जिला मुख्यालय तक चक्कर काटने पड़ते थे। इस व्यवस्थागत दूरी को पाटने और ग्रामीण जनता के भीतर शासन के प्रति सीधा भरोसा जगाने के लिए देहरादून जिला प्रशासन ने ‘रात्रि चौपाल’ के रूप में एक संवेदनशील और व्यावहारिक पहल की नींव रखी है। ‘जन सेवा–जन विश्वास–जन भागीदारी’ के विचार को जमीन पर उतारते हुए इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य केवल फाइलों में योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि रात के समय ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी वास्तविक दिनचर्या, उनकी चुनौतियों और उनके संकोच को दूर कर सीधे समाधान देना है।
मालदेवता के थेवा गांव से जमीनी संवाद की शुरुआत इस नई कार्ययोजना की औपचारिक शुरुआत विकासखंड रायपुर की ग्राम पंचायत थेवा (मालदेवता) से की गई। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह की अगुवाई में जिला प्रशासन और विभिन्न तकनीकी विभागों के अधिकारी थेवा पहुंचे। दिन के उजाले में होने वाली प्रशासनिक यात्राओं और इस रात्रि चौपाल में सबसे बड़ा फर्क यह था कि अधिकारी तय समय सीमा के दबाव में भागने की बजाय पूरे इत्मीनान से ग्रामीणों के बीच मौजूद रहे।
चौपाल में थेवा और आसपास के इलाकों से पहुंचे किसानों, महिलाओं और बुजुर्गों ने अपनी रोजमर्रा की दुश्वारियों को बिना किसी औपचारिक झिझक के सीधे मुख्य विकास अधिकारी के सामने रखा। किसानों की आजीविका और खेती पर संकट का परीक्षण चौपाल के दौरान स्थानीय किसान बच्चन सिंह कठैत ने क्षेत्र में खेती से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं को सामने रखा। उन्होंने बताया कि सिंचाई की नहरें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं और पुलिया टूटने के कारण खेतों तक पानी और आवाजाही दोनों बाधित हो रही हैं। इसके अलावा इस समय धान की फसल में लग रहे अज्ञात रोग और खरपतवार की मार से किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद हो रही है। जंगली जानवरों द्वारा फसलों को पहुंचाए जाने वाले नुकसान का मुद्दा भी पूरी शिद्दत से उठाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने तुरंत कृषि विभाग के विशेषज्ञों को निर्देशित किया कि वे फसलों में फैले रोग का स्थलीय परीक्षण करें।
खरपतवार की वास्तविक प्रकृति को समझने और उसका सटीक उपचार खोजने के लिए खरपतवार के नमूने जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर की प्रयोगशाला भेजने का आदेश दिया गया, ताकि किसानों को वैज्ञानिक आधार पर सही कीटनाशक या दवा का परामर्श मिल सके। इसके साथ ही सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग को क्षतिग्रस्त नहरों और पुलियों के तत्काल जीर्णोद्धार का काम सौंपा गया। शिक्षा के बुनियादी ढांचे और पेयजल संकट पर त्वरित वित्तीय स्वीकृति गांव के भविष्य यानी स्कूली बच्चों की शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी चौपाल में संवेदनशील रुख देखने को मिला। ग्रामीणों ने जब विद्यालय के जर्जर भवन का मुद्दा उठाया, तो जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भवन पुनर्निर्माण की विस्तृत कार्ययोजना (डीपीआर) तैयार हो चुकी है और इसके लिए धन आवंटन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। प्रशासन ने इस प्रक्रिया को और तेज करने के निर्देश दिए ताकि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। वहीं सरखेत ग्राम प्रधान द्वारा जब ग्रामीण विद्यालय में लंबे समय से चली आ रही पेयजल किल्लत की बात उठाई गई, तो मुख्य विकास अधिकारी ने औपचारिकता में उलझने के बजाय मौके पर ही बजट की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी। जल संस्थान को तुरंत पाइपलाइन बिछाने और स्कूल में नियमित शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई। इसके अलावा क्षेत्र में जहां-जहां मुख्य पेयजल लाइनों से रिसाव होकर पानी बर्बाद हो रहा था, उन स्थलों का स्थलीय मुआयना कर तत्काल मरम्मत करने के आदेश दिए गए।
सड़क निर्माण से उत्पन्न जलभराव और स्थानीय जलनिकासी पहाड़ी और तटीय मार्गों पर निर्माण कार्यों के दौरान कई बार पानी की प्राकृतिक निकासी बंद हो जाती है, जो बाद में ग्रामीणों के घरों के लिए खतरा बन जाती है। स्थानीय निवासी मनोज पंवार ने चौपाल में शिकायत रखी कि उनके घर के निकट नई सड़क के निर्माण से पानी की निकासी रुक गई है और घरों के आसपास जलभराव हो रहा है। इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे आपसी समन्वय बनाकर पानी के बहाव का स्थायी रास्ता तैयार करें ताकि आने वाले समय में भू-कटाव या घरों को नुकसान पहुंचने का खतरा न रहे। स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उच्चीकरण पहाड़ी क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं जीवन और मरण का अंतर तय करती हैं। चौपाल में मालदेवता स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की मांग उठी। इस पर अधिकारियों ने बताया कि मालदेवता पीएचसी को ए श्रेणी से बी श्रेणी में क्रमोन्नत करने का विधिवत प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है।
ग्रामीण इलाकों में कुत्तों और जंगली जानवरों के काटने की घटनाओं को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने मालदेवता पीएचसी में एंटी-रेबीज इंजेक्शन का पर्याप्त स्टॉक हर समय सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय को निर्देशित किया कि दवाओं और जरूरी टीकों की उपलब्धता पर नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए ताकि किसी भी ग्रामीण को आपात स्थिति में शहर न दौड़ना पड़े। बुनियादी परिसंपत्तियों का औचक निरीक्षण चौपाल की औपचारिक बैठक शुरू होने से पहले मुख्य विकास अधिकारी ने गांव के विभिन्न सार्वजनिक प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया।
उन्होंने स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के पोषण आहार और खेलकूद की स्थिति जांची। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत चलने वाली राशन की सरकारी दुकान पर पहुंचकर खाद्यान्न के स्टॉक रजिस्टर और वितरण की पारदर्शिता का मुआयना किया गया। निर्माणाधीन पशु सेवा केंद्र के काम की प्रगति और गुणवत्ता को भी मौके पर परखा गया। प्रशासन की इस कार्यप्रणाली का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी मशीनरी केवल कागजों पर आंकड़े न भरे, बल्कि जमीनी स्तर पर हर सरकारी इमारत और व्यवस्था ग्रामीणों के उपयोग के लायक बनी रहे।
योजनाओं का जमीनी फीडबैक, आजीविका और सामुदायिक सहभागिता रात्रि चौपाल का एक उद्देश्य शासन की कल्याणकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति की पड़ताल करना भी रहा। सरकारी पेंशन, किसान सम्मान निधि, मातृ वंदना योजना और राशन वितरण से जुड़े लाभार्थियों ने अधिकारियों के सामने अपने अनुभव बताए और कुछ तकनीकी कमियों को भी रेखांकित किया। किसानों की आजीविका को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग की ओर से उन्नत किस्म के बीजों का वितरण किया गया, जिससे वे नकदी फसलों और सब्जियों की खेती से जुड़ सकें। इसके साथ ही पंचायत प्रतिनिधियों, आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ खुली बैठक कर गांव में होमस्टे, ग्रामीण पर्यटन और पशुपालन आधारित स्वरोजगार बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तार से मंथन किया गया।
चौपाल में सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों को गीला और सूखा कचरा अलग करने तथा गांवों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी गई। लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने के उद्देश्य से व्यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचक सहभागिता यानी स्वीप कार्यक्रम के तहत नोडल अधिकारियों ने युवाओं और महिलाओं को मतदान के अधिकार और मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के प्रति जागरूक किया। प्रशासनिक जवाबदेही और विश्वास का नया मॉडल देहरादून जिला प्रशासन का यह रात्रि प्रवास मॉडल शासन को जनता के द्वार तक ले जाने की दिशा में एक सार्थक बदलाव माना जा रहा है। दिन के समय अमूमन किसान और मजदूर अपने खेतों या काम-धंधों में व्यस्त रहते हैं, जिसके चलते वे तहसील या ब्लॉक स्तर के अधिकारियों से मिल नहीं पाते। शाम के समय जब पूरा गांव फुरसत में होता है, तब अधिकारियों का गांव में पहुंचना और वहीं रात बिताना एक आत्मीय माहौल तैयार करता है। जब प्रशासनिक अमला सीधे ग्रामीणों के साथ बैठकर चूल्हे के पास चाय पीता है और उनके दुख-दर्द को अपनी आंखों से देखता है, तो योजनाओं में मौजूद कमियां अपने आप उजागर हो जाती हैं। यह चौपाल केवल शिकायतें सुनने का मंच नहीं, बल्कि जनसमस्याओं के ऑन-द-स्पॉट समाधान, सरकारी योजनाओं की समीक्षा और पलायन रोकने के लिए स्थानीय आजीविका विकसित करने की एक मजबूत नीति साबित हो रही है।
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