Dehradun News: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता को तार-तार करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एक बेहद शातिर और तकनीकी रूप से उन्नत हाईटेक नकल गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली करने की फिराक में था। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद एक्शन में आई एसटीएफ ने इस पूरे नेटवर्क के मुख्य सूत्रधार यानी मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया है। इस बड़ी कामयाबी ने एक बार फिर साबित किया है कि राज्य सरकार नकल माफियाओं के खिलाफ पूरी तरह से जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।
मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी और नेटवर्क का खुलासा
इस पूरे सुनियोजित खेल का मुख्य आरोपी दिल्ली का रहने वाला ईश्वरी प्रसाद उर्फ इंद्रजीत शर्मा है, जिसे एसटीएफ ने कड़ी मशक्कत के बाद दबोच लिया है। ईश्वरी प्रसाद बेहद शातिर किस्म का अपराधी है, जिसने देहरादून को अपना नया ठिकाना बनाकर यहां की परीक्षा प्रणालियों में सेंध लगाने की पूरी तैयारी कर ली थी। वह केवल एक मोहरा नहीं, बल्कि इस पूरे गिरोह का दिमाग था जो दिल्ली से लेकर उत्तराखंड तक अपने पैर पसार रहा था। एसटीएफ की पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी इससे पहले भी कई संदिग्ध गतिविधियों में शामिल रहा है और उसका नेटवर्क देश के अन्य राज्यों से भी जुड़ा हो सकता है।
आधुनिक तकनीक और अंडरग्राउंड चेंबर का मायाजाल
इस गिरोह की कार्यप्रणाली को देखकर खुद जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। आरोपी ईश्वरी प्रसाद ने परीक्षा में नकल कराने के लिए किसी साधारण तरीके का इस्तेमाल नहीं किया था, बल्कि उसने बकायदा एक समानांतर तकनीकी ढांचा खड़ा कर दिया था। जांच में सामने आया कि आरोपी ने नेहरू ग्राम स्थित सेंट जॉन्स एकेडमी परीक्षा केंद्र के भीतर और आसपास एक गोपनीय सर्वर रूम, परीक्षा लैब और एक छुपा हुआ अंडरग्राउंड (भूमिगत) चेंबर तैयार किया था। इस अंडरग्राउंड चेंबर से पूरे परीक्षा केंद्र के कंप्यूटरों पर नजर रखी जा रही थी और उन्हें रिमोट एक्सेस के जरिए नियंत्रित करने की योजना थी।

भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
गिरफ्तारी के दौरान एसटीएफ ने आरोपी के कब्जे से भारी मात्रा में अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और उपकरण बरामद किए हैं। बरामद सामानों में हाई-कॉन्फ़िगरेशन लैपटॉप, महंगे स्मार्टफोन, बेहद छोटे और छुपाने में आसान ब्लूटूथ डिवाइस, अतिरिक्त पावर बैकअप के लिए बैटरियां और हाई-स्पीड इंटरनेट राउटर्स शामिल हैं। इन उपकरणों का उपयोग परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्रों को बाहर भेजने और बाहर बैठे सॉल्वर्स से उत्तरों को सीधे अभ्यर्थियों के कंप्यूटर या ब्लूटूथ तक पहुंचाने के लिए किया जाना था। यह बरामदगी दर्शाती है कि गिरोह किस स्तर पर जाकर डिजिटल सेंधमारी करने की तैयारी कर चुका था।
एसएससी कांस्टेबल जीडी परीक्षा पर मंडराया संकट
इस पूरे खुलासे का सबसे बड़ा असर आगामी 18 मई को होने वाली एसएससी कांस्टेबल (जीडी) परीक्षा पर पड़ा है। यह परीक्षा हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ी हुई है। नेहरू ग्राम स्थित सेंट जॉन्स एकेडमी को इस परीक्षा के लिए एक प्रमुख केंद्र बनाया गया था। लेकिन परीक्षा से ठीक पहले इतने बड़े गिरोह के नेटवर्क का पता चलने से परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर संकट खड़ा हो गया था। यदि समय रहते इस गिरोह को न पकड़ा जाता, तो हजारों योग्य और दिन-रात मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य अंधकार में डूब सकता था।
सर्वर कॉम्प्रोमाइज की आशंका और परीक्षा केंद्र सील
एसटीएफ की तकनीकी टीम ने जब सेंट जॉन्स एकेडमी के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच की, तो उन्हें इस बात का गहरा संदेह हुआ कि परीक्षा केंद्र का मुख्य सर्वर पहले ही कॉम्प्रोमाइज (हैक या प्रभावित) किया जा चुका है। सर्वर के साथ छेड़छाड़ होने की प्रबल आशंका को देखते हुए एसटीएफ ने बिना कोई जोखिम उठाए तुरंत कड़ा कदम उठाया। एसटीएफ ने परीक्षा की गरिमा बनाए रखने के लिए नेहरू ग्राम स्थित सेंट जॉन्स एकेडमी केंद्र को पूरी तरह से सील कर दिया है। केंद्र के सील होने के बाद अब वहां आगामी परीक्षाओं के आयोजन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है और पूरे सिस्टम को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।

गिरोह के पुराने इतिहास पर एसटीएफ की नजर
यह पहली बार नहीं है जब इस गिरोह के तार एसएससी परीक्षा से जुड़े हैं। एसटीएफ की जांच में यह भी साफ हुआ है कि इस हाईटेक नकल गिरोह के तीन सक्रिय सदस्य पहले ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ चुके हैं। पुराने सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद भी ईश्वरी प्रसाद लगातार अपने नेटवर्क को जिंदा रखने और नए तरीकों से परीक्षाओं में धांधली करने की कोशिशों में जुटा हुआ था। पुलिस अब पुराने गिरफ्तार आरोपियों और ईश्वरी प्रसाद के बीच के कड़ियों को जोड़ने में जुटी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह ने अब तक कितनी परीक्षाओं को प्रभावित किया है।
मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश और एसटीएफ का अभियान
उत्तराखंड में पिछले कुछ समय से सरकारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए मुख्यमंत्री के स्तर से बेहद सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी नकल माफिया को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। मुख्यमंत्री के इन्हीं कड़े दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए एसटीएफ लगातार हाईटेक नकल माफियाओं के खिलाफ एक बड़ा और सघन अभियान चला रही है। इसी अभियान के तहत एसटीएफ को यह बड़ी कामयाबी मिली है, जिसने परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को भी सचेत कर दिया है।
युवाओं के भविष्य की सुरक्षा और आगे की राह
देहरादून का यह मामला यह साबित करता है कि आज के समय में नकल माफिया पारंपरिक तरीकों को छोड़कर डिजिटल और साइबर अपराध का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में परीक्षा कराने वाली एजेंसियों और सुरक्षा बलों को भी अपनी तकनीकी क्षमता को दोगुना करना होगा। इस कार्रवाई से उत्तराखंड के उन लाखों ईमानदार छात्रों को एक बड़ा संबल मिला है जो अपनी योग्यता के दम पर नौकरी पाना चाहते हैं। एसटीएफ की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की हर तरफ सराहना हो रही है, क्योंकि इसने परीक्षा से ठीक पहले एक बहुत बड़े घोटाले को होने से रोक लिया। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही इस रैकेट से जुड़े कुछ और सफेदपोश चेहरों और मददगारों के नामों का खुलासा हो सकता है।
High-tech cheating gang busted in Dehradun: STF takes major action, seals SSC exam centre









