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Uttarakhand News: विदेशों में रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप राज्य के युवाओं को दिया जाए कौशल एवं भाषा प्रशिक्षण : मुख्यमंत्री

On: September 1, 2026 2:56 AM
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Uttarakhand News: विदेशों में रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप राज्य के युवाओं को दिया जाए कौशल एवं भाषा प्रशिक्षण : मुख्यमंत्री
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Uttarakhand News: उत्तराखंड की धरती ने सदैव अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक ऊर्जा और यहां के निवासियों के अदम्य साहस से देश-दुनिया को आकर्षित किया है। वहीं बदलते वैश्विक परिवेश में राज्य के युवाओं की प्रतिभा केवल स्थानीय या राष्ट्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसी दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरगामी पहल के तहत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास में जमैका में भारत के उच्चायुक्त मयंक जोशी, इथियोपिया में भारत के राजदूत देवेश उत्तम तथा जाम्बिया में भारत के उच्चायुक्त आलोक रंजन झा के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय बैठक की।

यह बैठक केवल एक औपचारिक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि यह उत्तराखंड के मानव संसाधन को अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों के साथ जोड़ने, राज्य की आर्थिक संभावनाओं को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने और यहां के युवाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक व उच्च वेतन वाले विदेशी रोजगार के मार्ग प्रशस्त करने की एक ठोस कार्ययोजना का आरंभ है। बैठक के दौरान इन तीनों देशों में कुशल श्रमशक्ति की वास्तविक मांग, विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों की आवश्यकताओं और उत्तराखंड की वर्तमान क्षमताओं पर बिंदुवार नहीं, बल्कि एक समग्र नीतिगत दृष्टिकोण के साथ गहन विचार-विमर्श किया गया।

वैश्विक श्रम बाजार की बदलती प्रकृति और राज्य का नया विजन विश्व स्तर पर आज कई विकासशील और विकसित देश ऐसे हैं जहां विशिष्ट क्षेत्रों में दक्ष, अनुशासित और समर्पित कार्यबल की भारी कमी महसूस की जा रही है। विशेषकर अफ्रीका और कैरेबियाई देशों में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि आधुनिकीकरण और औद्योगिक प्रबंधन में तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे समय में भारत के राजदूतों और उच्चायुक्तों के साथ राज्य सरकार का सीधा संवाद उत्तराखंड के युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर बनकर सामने आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड के युवाओं में प्रतिभा, निष्ठा और कठिन परिश्रम करने की क्षमता की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि उन्हें यह सही जानकारी मिले कि दुनिया के किस कोने में उनके हुनर की मांग है, और उस मांग के अनुसार उन्हें आवश्यक तकनीकी कौशल व भाषा ज्ञान उपलब्ध कराया जाए। यदि सरकार, भारतीय दूतावास और कौशल विकास संस्थान मिलकर एक समन्वित तंत्र का निर्माण करें, तो उत्तराखंड का युवा दुनिया भर में अपनी योग्यता का परचम लहरा सकता है। संबंधित देशों के साथ मिशन-आधारित समन्वय की आवश्यकता मुख्यमंत्री ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे जमैका, इथियोपिया और जाम्बिया स्थित भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों के साथ एक स्थायी और नियमित संवाद प्रणाली स्थापित करें। अक्सर यह देखा जाता है कि विदेशों में रोजगार के अवसर तो उपलब्ध होते हैं, लेकिन सही समय पर सही सूचना न मिलने के कारण या प्रामाणिक माध्यमों के अभाव में युवा या तो इन अवसरों से वंचित रह जाते हैं या फिर अनाधिकृत एजेंटों के चंगुल में फंसकर धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संबंधित देशों के भारतीय मिशनों से वहां की श्रम नीतियों, वीजा नियमों, वेतनमान और आवश्यक योग्यताओं का आधिकारिक डेटा नियमित रूप से प्राप्त किया जाए।

राज्य का कौशल विकास विभाग इस डेटा के आधार पर अपने पाठ्यक्रमों को आधुनिक बनाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जब भी कोई युवा उत्तराखंड से विदेश के लिए प्रस्थान करे, तो वह पूर्णतः प्रशिक्षित, प्रमाणित और कानूनी रूप से सुरक्षित मार्ग से जाए। भाषा और सांस्कृतिक अनुकूलन प्रशिक्षण का महत्व किसी भी विदेशी देश में काम करने के लिए तकनीकी दक्षता जितनी आवश्यक है, उतनी ही जरूरी वहां की स्थानीय भाषा, संवाद शैली और कार्य संस्कृति की समझ भी है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि विदेशों में रोजगार चाहने वाले युवाओं को केवल उनके ट्रेड या पेशे की ट्रेनिंग देना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें उस देश की प्रमुख भाषा और बेसिक कम्युनिकेशन का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए। अंग्रेजी के अतिरिक्त फ्रेंच, स्पैनिश या स्थानीय बोलचाल की बुनियादी समझ युवाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाती है और उन्हें नए वातावरण में शीघ्रता से ढलने में मदद करती है। राज्य में भाषा अकादमियों और तकनीकी संस्थानों के माध्यम से ऐसे क्रैश कोर्स और संवाद उन्मुख मॉड्यूल तैयार किए जाएंगे, जिससे हमारे युवा कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार की हीनभावना या संकोच का अनुभव न करें। जाम्बिया: कृषि, शिक्षा और बुनियादी ढांचे में व्यापक संभावनाएं जाम्बिया में भारत के उच्चायुक्त आलोक रंजन झा ने चर्चा के दौरान जाम्बिया की वर्तमान आर्थिक स्थिति और वहां भारतीय कार्यबल की मांग पर विस्तृत प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि जाम्बिया एक ऐसा देश है जहां प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, विशेष रूप से उपजाऊ भूमि और जल संसाधन। वर्तमान में जाम्बिया अपनी कृषि व्यवस्था का आधुनिकीकरण कर रहा है और वहां आधुनिक खेती, बागवानी, कृषि आधारित प्रसंस्करण और सिंचाई प्रबंधन के जानकारों की भारी आवश्यकता है। उत्तराखंड, जो स्वयं एक कृषि और बागवानी प्रधान राज्य है, के पास ऐसे अनेक युवा हैं जो कृषि विज्ञान, वानिकी और भूमि संरक्षण में शिक्षित हैं। यदि इन युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर के कृषि प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाए, तो वे जाम्बिया में कृषि विशेषज्ञों, फार्म प्रबंधकों और परामर्शदाताओं के रूप में उत्कृष्ट करियर बना सकते हैं। इसके साथ ही जाम्बिया के शैक्षणिक क्षेत्र में भी योग्य शिक्षकों और प्रोफेसरों की निरंतर मांग बनी हुई है। गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और कंप्यूटर शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय शिक्षकों की वहां बहुत अधिक प्रतिष्ठा है। आलोक रंजन झा ने राज्य सरकार को आश्वस्त किया कि वे जाम्बिया के विभिन्न मंत्रालयों और निजी क्षेत्रों से समन्वय स्थापित करके एक विस्तृत मांग पत्र उत्तराखंड सरकार को सौंपेंगे, ताकि उसी के आधार पर भर्ती और प्रशिक्षण की रूपरेखा बनाई जा सके। जमैका: पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा और नर्सिंग में अपार अवसर कैरेबियाई द्वीप समूह का प्रमुख देश जमैका विश्व स्तर पर अपने पर्यटन उद्योग और आतिथ्य सत्कार के लिए जाना जाता है।

जमैका में भारत के उच्चायुक्त मयंक जोशी ने बैठक में साझा किया कि जमैका का स्वास्थ्य क्षेत्र और पर्यटन ढांचा इस समय प्रशिक्षित पेशेवरों की भारी कमी का सामना कर रहा है। विशेष रूप से नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के क्षेत्र में जमैका में भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों की अत्यधिक मांग है। भारतीय नर्सों और स्वास्थ्य सहायकों का समर्पण, सेवाभाव और चिकित्सीय दक्षता पूरी दुनिया में पहचानी जाती है। उत्तराखंड में कई प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग स्कूल और पैरामेडिकल संस्थान संचालित हो रहे हैं, जहां से प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में छात्र उत्तीर्ण होते हैं। यदि इन नर्सिंग स्नातकों को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों, विशेष चिकित्सा उपकरणों के संचालन और कैरेबियाई देशों के स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के अनुरूप उन्मुखीकरण दिया जाए, तो उन्हें जमैका में बहुत अच्छे वेतनमान पर रोजगार मिल सकता है। इसके अलावा, जमैका की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार पर्यटन है। रिसॉर्ट प्रबंधन, खाद्य और पेय सेवा, साहसिक पर्यटन और इवेंट मैनेजमेंट में वहां निरंतर कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता रहती है। उत्तराखंड भी पर्यटन आधारित राज्य है, इसलिए यहां के होटल मैनेजमेंट और हॉस्पिटैलिटी के छात्रों के लिए जमैका एक उत्कृष्ट अंतरराष्ट्रीय गंतव्य सिद्ध हो सकता है। इथियोपिया: प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स और फार्मास्यूटिकल का उभरता केंद्र अफ्रीका महाद्वीप का एक प्रमुख राष्ट्र इथियोपिया अपनी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति के कारण तेजी से एक विनिर्माण और व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। इथियोपिया में भारत के राजदूत देवेश उत्तम ने बताया कि वहां प्रबंधन, सप्लाई चेन, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में दक्ष कार्यबल की अभूतपूर्व मांग है। आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं में लॉजिस्टिक्स रीढ़ की हड्डी के समान है। इथियोपिया के बंदरगाहों, हवाई अड्डों और औद्योगिक पार्कों में ऐसे प्रबंधकों की आवश्यकता है जो आपूर्ति श्रृंखला को बिना किसी रुकावट के संचालित कर सकें।

उत्तराखंड के प्रबंधन संस्थानों के छात्रों के लिए यह एक बहुत बड़ा मंच साबित हो सकता है। इसके अतिरिक्त, इथियोपिया में फ्लोरीकल्चर यानी फूलों की व्यावसायिक खेती और फार्मास्यूटिकल उद्योग का तेजी से विस्तार हो रहा है। भारतीय दवा कंपनियों की वहां मजबूत उपस्थिति है, और उन्हें ऐसे विशेषज्ञों की आवश्यकता है जो औषधि निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण और पैकेजिंग में पारंगत हों। चूंकि उत्तराखंड देश का एक प्रमुख फार्मास्यूटिकल हब बन चुका है, इसलिए हमारे पास इस क्षेत्र के लिए पहले से ही एक मजबूत आधार मौजूद है। उत्तराखंड की स्थानीय विशेषताओं का अंतरराष्ट्रीय मंच पर विस्तार इस महत्वपूर्ण बैठक का एक और प्रमुख आयाम यह रहा कि मुख्यमंत्री ने केवल राज्य से मानव संसाधन भेजने की ही बात नहीं की, बल्कि उत्तराखंड की अपनी अद्वितीय पहचान, प्राकृतिक उत्पादों और सफल मॉडलों को इन देशों में प्रस्तुत करने का भी विजन रखा। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से राज्य के होम स्टे मॉडल का उल्लेख किया। पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में होम स्टे योजना ने ग्रामीण पर्यटन, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय आर्थिकी को एक नई दिशा दी है। पर्यटक अब केवल बड़े होटलों में ठहरने के बजाय स्थानीय परिवारों के साथ रहकर उनकी संस्कृति, खानपान और जीवनशैली को अनुभव करना पसंद करते हैं। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि जब भी इन देशों या अन्य मित्र राष्ट्रों के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भारत आएं, तो उन्हें उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित इन सफल होम स्टे का भ्रमण कराया जाए। इससे न केवल वैश्विक स्तर पर हमारे ग्रामीण पर्यटन की ब्रांडिंग होगी, बल्कि यह मॉडल उन देशों के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है जो अपने यहां समुदाय आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना चाहते हैं। फार्मा, आयुर्वेद और वेलनेस: देवभूमि की वैश्विक पहचान उत्तराखंड सदियों से औषधीय पौधों, जड़ी-बूटियों और आयुर्वेद की पावन भूमि रहा है। हरिद्वार, उधमसिंह नगर और देहरादून के औद्योगिक क्षेत्रों में आज देश की शीर्ष दवा निर्माता कंपनियां कार्य कर रही हैं। इसके साथ ही, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में ऋषिकेश को पूरे विश्व की राजधानी माना जाता है।

मुख्यमंत्री ने राजनयिकों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने देशों में उत्तराखंड के आयुर्वेद, हर्बल उत्पादों, प्राकृतिक तेलों और वेलनेस पर्यटन को प्रोत्साहित करें। पूरी दुनिया एलोपैथिक दवाओं के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य और वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों की ओर लौट रही है। उत्तराखंड के पास इस मांग को पूरा करने की प्राकृतिक और चिकित्सीय दोनों क्षमताएं हैं। यदि जमैका, इथियोपिया और जाम्बिया जैसे देशों के साथ इस क्षेत्र में व्यापारिक और संस्थागत समझौते किए जाएं, तो राज्य के औषधीय कृषकों और स्थानीय उद्यमियों को एक विशाल अंतरराष्ट्रीय बाजार सुलभ हो सकता है। संस्थानों का आधुनिकीकरण और कार्ययोजना का क्रियान्वयन नीतियों की सफलता उनके धरातल पर क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। इस बैठक के उपरांत मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं। राज्य के कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग को नोडल एजेंसी की भूमिका निभाते हुए एक विशेष प्रकोष्ठ गठित करने के लिए कहा गया है जो सीधे तौर पर विदेश मंत्रालय और संबंधित दूतावासों के संपर्क में रहेगा। इस व्यवस्था के तहत सबसे पहले एक ऐसा डिजिटल पोर्टल सुदृढ़ किया जाएगा जहां विदेश में कार्य करने के इच्छुक राज्य के युवाओं का प्रामाणिक डेटाबेस तैयार हो सके। इसके बाद, दूतावासों से प्राप्त होने वाली मांग के आधार पर इन युवाओं की स्क्रीनिंग की जाएगी और उन्हें आवश्यक ब्रिज कोर्स कराए जाएंगे। तकनीकी शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और पर्यटन विभाग को भी इस अभियान में सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों के पाठ्यक्रम को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढाल सकें। सुरक्षित प्रवासन और युवाओं का कल्याण विदेशों में काम करने के दौरान कामगारों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा एक सर्वोपरि चिंता होती है।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि राज्य के किसी भी युवा को किसी भी परिस्थिति में असुरक्षित या अवैध तरीके से विदेश न भेजा जाए। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि प्रवासन की पूरी प्रक्रिया भारत सरकार के ई-माइग्रेट सिस्टम और वैध राजनयिक माध्यमों से ही संचालित हो। इसके अलावा, संबंधित देशों में कार्यरत भारतीय मिशनों के साथ ऐसा संपर्क तंत्र विकसित किया जाएगा जिससे वहां काम कर रहे उत्तराखंड के नागरिकों को किसी भी आपात स्थिति, चिकित्सीय समस्या या कानूनी अड़चन के समय तत्काल दूतावास से सहायता प्राप्त हो सके। यह सुरक्षा चक्र युवाओं और उनके परिजनों के मन में एक गहरा विश्वास पैदा करेगा। राज्य की आर्थिकी और रिवर्स माइग्रेशन पर सकारात्मक प्रभाव उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन हमेशा से एक संवेदनशील सामाजिक और आर्थिक मुद्दा रहा है। रोजगार के अवसरों के अभाव में युवाओं को अपने गांव और घर छोड़ने पड़ते हैं। यदि राज्य सरकार के इस प्रयास से युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानजनक रोजगार मिलता है, तो इससे न केवल उनका जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि उनके द्वारा भेजी जाने वाली विदेशी मुद्रा राज्य की ग्रामीण आर्थिकी को भी सुदृढ़ करेगी। इसके साथ ही, जब यह युवा कुछ वर्ष विदेश में काम करके आधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन और कार्यकुशलता सीखकर वापस अपने राज्य लौटेंगे, तो वे अपने अनुभव और पूंजी का उपयोग उत्तराखंड में ही नए उद्यम, स्टार्टअप और व्यवसाय स्थापित करने में कर सकेंगे। यह ज्ञान और अनुभव का हस्तांतरण राज्य में एक स्थायी और आत्मनिर्भर आर्थिक चक्र का निर्माण करेगा। समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की ओर अग्रसर कदम मुख्यमंत्री आवास में संपन्न हुई यह बैठक उत्तराखंड के विकास पथ पर एक मील का पत्थर कही जा सकती है। यह पहल दर्शाती है कि राज्य का नेतृत्व केवल तात्कालिक समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आने वाले दशकों की वैश्विक चुनौतियों और संभावनाओं को भांपते हुए दूरगामी नीतियां बना रहा है।

जमैका में भारत के उच्चायुक्त मयंक जोशी, इथियोपिया में भारत के राजदूत देवेश उत्तम और जाम्बिया में भारत के उच्चायुक्त आलोक रंजन झा द्वारा दिया गया सकारात्मक सहयोग का आश्वासन इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार और उसके अंतरराष्ट्रीय मिशन राज्य सरकारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने को तत्पर हैं। यदि यह योजना अपनी पूरी क्षमता और ईमानदारी के साथ धरातल पर उतरती है, तो आने वाले समय में उत्तराखंड के युवा केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार भी अपनी मेहनत, निष्ठा और कौशल से देवभूमि का नाम रोशन करेंगे। विकास, विरासत और आधुनिक अवसरों का यह संगम निश्चित रूप से उत्तराखंड को देश के अग्रणी और समृद्ध राज्यों की पंक्ति में मजबूती से स्थापित करेगा।

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