Uttarakhand Weather Update News: देवभूमि उत्तराखंड में दक्षिण-पश्चिमी मानसून पूरी तरह से सक्रिय बना हुआ है। अगस्त के दूसरे पखवाड़े में मानसूनी हवाओं और पश्चिमी विक्षोभ की परस्पर अंतःक्रिया के चलते राज्य के अधिकांश पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में वर्षा का दौर निरंतर जारी है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून द्वारा जारी दैनिक मौसम बुलेटिन के अनुसार 18 अगस्त 2026 को राज्य के जनपदों में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा के साथ तीव्र गरज-चमक और तेज बौछारें पड़ने की प्रबल संभावना है।
हिमालयी क्षेत्रों में आर्द्रता का स्तर नब्बे से पचानवे प्रतिशत के मध्य बना हुआ है, जिसके कारण पहाड़ों में घने बादलों का डेरा जमा हुआ है। वातावरण में बढ़ती नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण पर्वतीय ढलानों पर स्थानीय संवहनीय बादल विकसित हो रहे हैं, जो अचानक किसी विशेष क्षेत्र में तीव्र बारिश का कारण बनते हैं। ऐसे मौसमी बदलावों से संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और नदी-नालों में उफान आने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 18 अगस्त 2026 को राज्य के देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली तथा बागेश्वर जनपदों में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है। इन जनपदों के उच्च पर्वतीय तथा घाटी क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर तीव्र से अति तीव्र वर्षा के दौर देखने को मिल सकते हैं। कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़, नैनीताल और अल्मोड़ा जनपदों में भी दिनभर बादल छाए रहेंगे तथा गर्जना के साथ आकाशीय बिजली चमकने और रुक-रुक कर वर्षा का दौर जारी रहने का अनुमान है। चंपावत जनपद में भी मध्यम दर्जे की वर्षा दर्ज की जा सकती है। पर्वतीय जनपदों में गर्जन-तर्जन के साथ तेज हवाओं के झोंके चलने की संभावना व्यक्त की गई है। मैदानी जनपदों जैसे हरिद्वार और उधम सिंह नगर में मौसम अपेक्षाकृत थोड़ा भिन्न रहेगा। इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। दिन के समय उमस और गर्मी का प्रभाव अधिक महसूस हो सकता है, लेकिन दोपहर बाद या शाम के समय गरज-चमक के साथ बारिश होने से तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है।
देहरादून और आसपास के तराई तथा शिवालिक घाटी क्षेत्रों में 18 अगस्त को आसमान में आमतौर पर घने बादल छाए रहने का अनुमान है। देहरादून शहर, विकासनगर, ऋषिकेश तथा मसूरी के पर्वतीय क्षेत्रों में कुछ दौर की तेज बारिश या गरज-चमक के साथ तीव्र बौछारें पड़ सकती हैं। देहरादून में अधिकतम तापमान लगभग सत्ताईस से अठाईस डिग्री सेल्सियस के आसपास और न्यूनतम तापमान चौबीस से पच्चीस डिग्री सेल्सियस के करीब रहने की संभावना है। लगातार वर्षा और आर्द्रता के कारण शहर में मौसम ठंडा और नम बना रहेगा। शहर के निचले रिहायशी इलाकों और जलभराव वाले क्षेत्रों में नगर निगम और आपदा प्रबंधन टीमों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
18 अगस्त को प्रस्तावित मौसम को देखते हुए चारधाम यात्रा मार्गों—श्री बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग, श्री केदारनाथ मार्ग, गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्गों पर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड, जोशीमठ से बद्रीनाथ और उत्तरकाशी से बड़कोट के मध्य कई ऐसे स्थान हैं जो भूस्खलन के प्रति अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं। लगातार हो रही वर्षा के कारण चट्टानें ढीली पड़ जाती हैं, जिससे अचानक बोल्डर गिरने या मलबा आने का खतरा बना रहता है। सीमा सड़क संगठन और लोक निर्माण विभाग की टीमों को प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर रणनीतिक स्थानों पर तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में तत्काल यातायात बहाल किया जा सके।
तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से अनुरोध किया गया है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष या संबंधित जिला प्रशासन के नियंत्रण कक्ष से सड़क और मौसम की ताज़ा स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। रात के समय पर्वतीय मार्गों पर अनावश्यक यात्रा से पूरी तरह परहेज करने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर राज्य आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग ने सभी तेरह जनपदों के जिलाधिकारियों को पूरी तरह से अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। राज्य आपदा प्रतिवादन बल और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टुकड़ियों को संवेदनशील जिलों में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए मुस्तैद रखा गया है।
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सभी विभागीय अधिकारियों को चौबीसों घंटे अपने संचार साधन खुले रखने तथा किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित सूचना साझा करने का आदेश दिया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में भारी अर्थमूविंग मशीनें, क्रेन और राहत सामग्री पहले से सुरक्षित स्थानों पर तैनात कर दी गई हैं। नदी और प्रमुख नालों के जलस्तर की निगरानी केंद्रीय जल आयोग और स्थानीय सिंचाई विभाग द्वारा लगातार की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार के जलभराव या अचानक आई बाढ़ की स्थिति में समय रहते पूर्व चेतावनी जारी की जा सके।
भारी वर्षा और आकाशीय बिजली की संभावना को देखते हुए आम जनमानस को सुरक्षित रहने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। गर्जना और बिजली कड़कने के दौरान खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। पक्के और सुरक्षित मकानों में आश्रय लेना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।
उफनते बरसाती नालों और नदियों के किनारे जाने या वहां स्नान करने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं। कृषि कार्यों में जुटे किसानों को सलाह दी गई है कि वे आकाशीय बिजली की संभावना के समय खेतों में काम करने से बचें और अपने मवेशियों को सुरक्षित बाड़ों में रखें। ढलानों पर बसे ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों को जल निकासी की समुचित व्यवस्था बनाए रखनी चाहिए ताकि मकानों के आसपास पानी का जमाव न हो सके।
वहीं मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य के कुछ हिस्सों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। छात्र, अभिभावक और शिक्षक इस बात की पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं कि मंगलवार को स्कूल खुले रहेंगे या बंद। मौसम संबंधी चेतावनी के चलते भूस्खलन, अचानक बाढ़ और यात्रा में कठिनाई की आशंका जताई जा रही है, खासकर संवेदनशील पहाड़ी जिलों में मौसम संबंधी चेतावनी जारी होने के बावजूद, इसका मतलब यह नहीं है कि स्कूल में छुट्टी होगी। 18 अगस्त को स्कूल बंद रहेगा या नहीं, यह राज्य प्रशासन या संबंधित जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों पर निर्भर करेगा।








