Uttarakhand lakhpati didi yojana देवभूमि उत्तराखंड की पावन धारा केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक चेतना और पर्वतीय छटा के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि यह भूमि हमेशा से जुझारू और कर्मठ महिला शक्ति की पहचान रही है। पहाड़ों की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में जीवनयापन करते हुए यहाँ की महिलाओं ने हर दौर में अपनी जिजीविषा और मेहनत से समाज को दिशा दी है। वर्तमान समय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी और संवेदनशील नेतृत्व में उत्तराखंड की इस नारी शक्ति को एक नया आकाश मिला है। राज्य सरकार के भागीरथ प्रयासों और सुदृढ़ आर्थिक नीतियों के चलते प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की एक ऐसी लहर चली है, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था का स्वरूप ही बदलकर रख दिया है।
उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से गाँव-गाँव तक पहुँची विकास की इस बयार ने महिलाओं के भीतर छिपी उद्यमशीलता की भावना को जगाया है। जिस राज्य में कभी पहाड़ जैसी आजीविका की चुनौतियाँ थीं, आज वहीं की महिलाएँ अपने दम पर खुद को और अपने परिवार को आर्थिक रूप से समृद्ध बना रही हैं। धामी सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, नीतिगत सुधारों और निरंतर सहयोग का ही परिणाम है कि राज्य की हजारों-लाखों महिलाएँ अब केवल पारिवारिक जिम्मेदारियाँ संभालने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे स्वरोजगार अपनाकर प्रदेश की आर्थिक प्रगति में एक मुख्य साझेदार बन चुकी हैं।

लखपति दीदी योजना: सफलता के नित नए कीर्तिमान स्थापित करती पहल नवंबर 2022 में उत्तराखंड सरकार द्वारा शुरू की गई लखपति दीदी योजना राज्य में सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उनकी वार्षिक आय को कम से कम एक लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुँचाना है। योजना के क्रियान्वयन को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का दृष्टिकोण हमेशा से स्पष्ट और परिणाम-केंद्रित रहा है। सरकार की इसी मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था और दृढ़ संकल्प का नतीजा है कि लखपति दीदी योजना हर साल अपने निर्धारित लक्ष्यों को समय से पहले ध्वस्त कर नए रिकॉर्ड बना रही है।
आंकड़ों के परिप्रेक्ष्य में देखें तो वित्तीय वर्ष 2025-26 तक राज्य में 3 लाख 3 हजार 696 महिलाएँ लखपति दीदी बनकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं। इन महिलाओं ने पारंपरिक बाधाओं को लांघकर और अपनी कार्यकुशलता के बल पर प्रतिवर्ष एक लाख रुपये से अधिक की शुद्ध आय अर्जित करना शुरू कर दिया है। यह आंकड़ा केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि भर नहीं है, बल्कि यह उन लाखों ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में आए अभूतपूर्व सुधार का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इस योजना की अपार सफलता को देखते हुए राज्य सरकार ने अपने कदमों को और तेजी से आगे बढ़ाया है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 1 लाख 12 हजार और महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का एक नया एवं विशाल लक्ष्य निर्धारित किया है। सबसे खास बात यह है कि इस नए लक्ष्य को भी निर्धारित समय-सीमा से काफी पहले हासिल करने के लिए संबंधित सभी विभाग और प्रशासनिक इकाइयाँ पूरी निष्ठा के साथ धरातल पर जुट गई हैं।
पारंपरिक संसाधनों से आधुनिक व्यवसाय तक: आजीविका के विविध आयाम उत्तराखंड की ग्रामीण महिलाओं ने लखपति दीदी बनने की इस यात्रा में पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर आधुनिक व्यावसायिक मॉडलों को अपनाया है। राज्य सरकार द्वारा प्रदान किए जा रहे वित्तीय अनुदान, तकनीकी प्रशिक्षण और सुगम ऋण सुविधाओं के बलबूते स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएँ विविधतापूर्ण व्यवसायों का संचालन सफलता पूर्वक कर रही हैं। इन व्यवसायों में जैविक खेती और मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियाँ बेहद लोकप्रिय हुई हैं, जहाँ महिलाएँ वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग कर उच्च गुणवत्ता वाली फसलें उगा रही हैं।
इसके अतिरिक्त, खाद्य प्रसंस्करण और मसाला निर्माण के क्षेत्र में भी महिलाओं ने अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी है। स्थानीय स्तर पर उत्पादित शुद्ध मसालों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की बाजार में भारी माँग देखने को मिल रही है। डेरी एवं पशुपालन, मौन पालन (मधुमक्खी पालन) और हस्तशिल्प जैसे पारंपरिक कार्यों को महिलाओं ने व्यावसायिक रूप देकर अपनी आय में भारी वृद्धि की है। उत्तराखंड की समृद्ध प्राकृतिक संपदा को देखते हुए राज्य में होमस्टे संचालन की दिशा में महिलाओं की भागीदारी एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव बनकर सामने आई है।
दूरदराज के पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा संचालित होमस्टे पर्यटकों को न केवल स्थानीय संस्कृति और आतिथ्य का प्रामाणिक अनुभव करा रहे हैं, बल्कि महिलाओं के लिए आय का एक स्थायी जरिया भी बन गए हैं। हाल के वर्षों में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण मिलेट्स यानी श्रीअन्न से बने उत्पादों की माँग में जबरदस्त उछाल आया है। इस अवसर को पहचानते हुए उत्तराखंड की महिलाओं ने मिलेट आधारित बेकरी उत्पाद जैसे बिस्किट, नमकीन और पारंपरिक व्यंजनों को तैयार करना शुरू कर दिया है। महिलाओं द्वारा बनाए गए ये बेकरी उत्पाद अपने स्वाद और पोषण मूल्य के कारण स्थानीय बाजारों से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर काफी पसंद किए जा रहे हैं।
बाजारों तक सीधी पहुँच: इंफ्रास्ट्रक्चर और विपणन व्यवस्था का सशक्त जाल उत्पादन क्षमता बढ़ाना ही काफी नहीं होता, बल्कि उत्पादों को उचित मूल्य पर उपभोक्ताओं तक पहुँचाना और बेहतर बाजार उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। धामी सरकार ने इस आवश्यकता को समय रहते समझा और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग, प्रोसेसिंग और बिक्री के लिए राज्यभर में एक सुदृढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार होने वाले सामानों को बड़े शहरों के बाजारों से जोड़ने के लिए वैज्ञानिक और आधुनिक विपणन तंत्र विकसित किया गया है। उत्पाद संवर्धन के इस अभियान के तहत प्रदेश में 24 ग्रोथ सेंटर, 33 नैनो पैकेजिंग यूनिट और 17 सरस सेंटरों का सुचारू संचालन किया जा रहा है। ये केंद्र महिलाओं द्वारा बनाए गए कच्चे उत्पादों को प्रसंस्कृत करने, उनका वजन करने, आकर्षक पैकेजिंग प्रदान करने और गुणवत्ता बनाए रखने में तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं। नैनो पैकेजिंग यूनिट्स के माध्यम से गाँव के स्तर पर ही उत्पादों को ऐसी आधुनिक पैकेजिंग दी जाती है जो उन्हें बड़े ब्रांडों की तुलना में खड़ा कर सके। इसके अलावा, उत्पादों की व्यापक स्तर पर प्रदर्शनी और बिक्री के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर नियमित रूप से सरस मेलों का आयोजन किया जा रहा है। इन मेलों के माध्यम से ग्रामीण कारीगर और उत्पादक महिलाओं को सीधे बड़े खरीदारों, व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं से संवाद करने तथा अपने उत्पादों की वास्तविक कीमत पाने का सुनहरा अवसर मिलता है। मध्यस्थों और बिचौलियों की भूमिका खत्म होने से महिलाओं को उनके परिश्रम का पूरा वित्तीय लाभ सीधे उनके खातों में मिल रहा है।
‘हाउस ऑफ हिमालयाज’: वैश्विक पटल पर उत्तराखंडी उत्पादों का सिरमौर राज्य के स्थानीय और जैविक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की ब्रांडिंग और पहचान दिलाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड का गठन किया गया है। यह ब्रांड उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित शुद्ध, प्राकृतिक और सांस्कृतिक महत्व वाले उत्पादों के लिए एक विशाल और भरोसेमंद छतरी की तरह काम कर रहा है। इसने महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण कारीगरों के हाथों से बनी वस्तुओं को सीधा प्रीमियम रिटेल बाजारों में ला खड़ा किया है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के अंतर्गत राजमा, मंडुआ, झंगोरा, पहाड़ी दालें, शहद, हर्बल चाय, विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प और ऊनी वस्त्रों की विशेष पैकेजिंग की जा रही है। इस ब्रांड की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह उत्पाद की शुद्धता और गुणवत्ता का पूर्ण आश्वासन देता है।
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ब्रांडिंग और पैकेजिंग के अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाने से देश के बड़े महानगरों और प्रमुख वाणिज्यिक शहरों में उत्तराखंडी उत्पादों की माँग कई गुना बढ़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त किए गए ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के विजन को धरातल पर उतारने में ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ एक अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह पहल न केवल महिलाओं की आय बढ़ाने में मददगार साबित हुई है, बल्कि इसने विश्व पटल पर उत्तराखंड की पारंपरिक विरासत और जैविक संपदा का मान भी बढ़ाया है।
लाखों महिलाओं का संगठनात्मक नेटवर्क: आजीविका मिशन का विस्तृत ढांचा उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं को संगठित और सशक्त बनाने का कार्य जमीनी स्तर पर एक वटवृक्ष का रूप ले चुका है। संगठन में ही शक्ति है के सिद्धांत को अपनाते हुए प्रदेश के सभी 13 जनपदों के अंतर्गत आने वाले 95 विकासखंडों में महिलाओं को एक मजबूत संस्थागत ढांचे में पिरोया गया है।
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, इस मिशन के तहत अब तक राज्य की 5 लाख 19 हजार 943 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को एकजुट किया जा चुका है। इस विशाल जनसांख्यिकी को व्यावसायिक और सामाजिक रूप से प्रभावी बनाने के लिए 70 हजार 767 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है। इन प्राथमिक समूहों को और अधिक मजबूती तथा स्थायित्व देने के उद्देश्य से गाँव के स्तर पर 8 हजार 179 ग्राम संगठनों की स्थापना की गई है। इसके शीर्ष पर प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन को सुचारू बनाए रखने के लिए 615 क्लस्टर लेवल फेडरेशन यानी सीएलएफ कार्यरत हैं। यह त्रिस्तरीय संगठनात्मक ढांचा महिलाओं को केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उनके भीतर नेतृत्व क्षमता, वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग प्रक्रियाओं की समझ और सामाजिक जागरूकता का भी विकास कर रहा है। क्लस्टर लेवल फेडरेशन के माध्यम से महिलाएँ स्वयं अपने व्यापारिक फैसलों का प्रबंधन करती हैं, ऋणों का आवंटन करती हैं और सामूहिक रूप से बड़े व्यावसायिक निर्णय लेती हैं, जिससे उनके भीतर अपार आत्मविश्वास का संचार हुआ है।
ऐतिहासिक निर्णय और दूरगामी योजनाएँ: महिला कल्याण के नए आयाम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नेतृत्व केवल आजीविका बढ़ाने तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि उन्होंने नीतियों के स्तर पर महिलाओं को सामाजिक और प्रशासनिक रूप से मजबूत बनाने के लिए अनेक क्रांतिकारी फैसले लिए हैं। सरकारी सेवाओं में राज्य की महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का कानून लागू करना धामी सरकार का एक ऐसा ऐतिहासिक कदम है जिसने राज्य की बेटियों के भविष्य को एक मजबूत सुरक्षा चक्र प्रदान किया है। इस निर्णय से उत्तराखंड की होनहार बेटियों के लिए राज्य की प्रशासनिक सेवाओं और सरकारी नौकरियों के द्वार बड़े पैमाने पर खुले हैं। इसी तरह, त्रिस्तरीय व्यवस्था और जमीनी लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से सहकारी समितियों में भी महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का अभूतपूर्व निर्णय लिया गया है। इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में नीति-निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं की आवाज अधिक मुखर हुई है।
महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए धामी सरकार द्वारा कई अन्य जनकल्याणकारी और नवीन योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। इनमें ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ प्रमुख है, जो विधवा, परित्यक्ता और असहाय महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
इसी श्रृंखला में ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना’ और ‘मुख्यमंत्री नारी सशक्तिकरण योजना’ महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण और स्वावलंबन के संसाधन मुहैया करा रही हैं। आधुनिक तकनीक से महिलाओं को जोड़ने के लिए ‘ड्रोन दीदी योजना’ की शुरुआत की गई है, जिसके तहत महिला समूहों को कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले ड्रोन चलाने का आधुनिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में महिलाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए ‘सोलर सखी योजना’ क्रियान्वित की जा रही है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में नए उद्यम स्थापित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना’ और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘मुख्यमंत्री सतत आजीविका मिशन’ जैसे कार्यक्रम राज्य के कोने-कोने में महिलाओं के जीवन में नया उजाला फैला रहे हैं।
समृद्ध उत्तराखंड की ओर अग्रसर नारी शक्ति उत्तराखंड में चल रहा यह महिला सशक्तिकरण अभियान केवल कागजी आंकड़ों या सरकारी अभियानों का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह धरातल पर घटित हो रहा एक जीवंत सामाजिक और आर्थिक बदलाव है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी निर्णयों, संवेदनशील सोच और प्रशासनिक तत्परता ने राज्य की महिलाओं के हाथों में आत्मनिर्भरता और सम्मान की एक नई मशाल थमा दी है।
लखपति दीदी योजना से लेकर ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसे दूरगामी अभियानों ने उत्तराखंड की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाकर उनके परिवारों को खुशहाली की ओर मोड़ा है। सरकारी नौकरियों में horizontal आरक्षण और सहकारिता में भागीदारी ने उन्हें समाज में नेतृत्व की पहली पंक्ति में लाकर खड़ा कर दिया है। आने वाले वर्षों में जब 2026-27 के नए लक्ष्य पूरे होंगे, तब उत्तराखंड निसंदेह देश के अन्य राज्यों के लिए महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास का एक सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत और रोल मॉडल बनकर उभरेगा।








