Dehradun Bridge Approach Road Caves News: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मूसलाधार बारिश के बाद नंदा की चौकी स्थित नवनिर्मित पुल को लेकर बने संशय पर लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव पंकज कुमार पांडेय ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि 16 करोड़ रुपये की लागत से बना यह नवनिर्मित पुल पूरी तरह से मजबूत और सुरक्षित है। बारिश के भारी पानी और नदी के तेज कटाव की वजह से पुल के मुख्य ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचा है, बल्कि उसकी एप्रोच रोड का एक हिस्सा नीचे से मिट्टी और मलबा बह जाने के कारण धंस गया है।
सचिव ने बताया कि विभाग की टीम मौके पर डटी हुई है और युद्ध स्तर पर मरम्मत कार्य चलाकर आवाजाही को जल्द से जल्द पूरी तरह बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। नदी के उफान को देखते हुए पानी के तेज बहाव की दिशा को बदलने का काम भी शुरू कर दिया गया है, ताकि सड़क के बाकी हिस्से को और कटाव से बचाया जा सके। इस काम में सिंचाई विभाग के अधिकारियों और भारी मशीनरियों को भी ग्राउंड जीरो पर तैनात किया गया है।
उच्च स्तरीय जांच के आदेश: दोषी अधिकारी और ठेकेदार पर होगी सख्त कार्रवाई
पुल की एप्रोच रोड धंसने की घटना की गंभीरता को देखते हुए लोक निर्माण विभाग के सचिव ने मुख्य अभियंता को खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति का मुआयना करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही इस बात की भी जांच के आदेश जारी किए गए हैं कि आखिर पहली ही तेज बारिश में एप्रोच रोड के नीचे का कटाव इतनी आसानी से कैसे हो गया।
पंकज कुमार पांडेय ने दो टूक शब्दों में कहा कि मुख्य अभियंता की जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि निर्माण कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही, गुणवत्ता से समझौता या विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत सामने आती है, तो उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में जहां कहीं भी हाल ही में बनी नई सड़कें या पुल पहली बारिश में क्षतिग्रस्त होंगे, उन सभी मामलों की तकनीकी जांच कराई जाएगी और जनता के पैसे की बर्बादी करने वाले जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।
बंद सड़कों को खोलने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान और लाइव पोर्टल निगरानी
प्रदेश भर में मानसून के कारण बंद हो रहे मुख्य मार्गों और संपर्क मार्गों को लेकर लोक निर्माण विभाग ने अपनी रणनीति साफ की है। सचिव PWD ने बताया कि विभाग का लक्ष्य हर बंद मार्ग को अधिकतम 24 घंटे के भीतर यातायात के लिए फिर से चालू करना है। इसके लिए सभी संवेदनशील स्थानों पर बुलडोजर, जेसीबी और पोकलैंड मशीनों के साथ विभागीय टीमों को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है।
सड़कों की अद्यतन स्थिति को लेकर आम जनता और यात्रियों में किसी तरह का भ्रम न रहे, इसके लिए विभाग अपने लाइव पोर्टल पर बंद और खुले मार्गों की पल-पल की जानकारी अपडेट कर रहा है। इसके अलावा, देहरादून-मसूरी मार्ग का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वहां एक नया जलस्रोत (वाटर सोर्स) फूटने के कारण बार-बार पहाड़ी से मलबा और पत्थर सड़क पर आ रहे हैं। इस स्थान पर जोखिम को देखते हुए विशेष उपकरणों के साथ राहत दल को तैनात रखा गया है ताकि मलबा आते ही उसे तुरंत हटाया जा सके।
16 करोड़ के गड्ढे पर भड़की कांग्रेस: सरकार के ‘भ्रष्टाचार मुक्त’ दावे पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड धंसने के मामले ने उत्तराखंड में एक बड़ा राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। घटना की तस्वीरें सामने आते ही विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार पर करारा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि महज कुछ ही समय पहले 16 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हुआ यह पुल पहली ही मूसलाधार बारिश का सामना नहीं कर सका, जो सीधे तौर पर निर्माण कार्य में हुए बड़े पैमाने के भ्रष्टाचार को उजागर करता है।
कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि जनता की गाढ़ी कमाई के 16 करोड़ रुपये से बना यह पुल और उसके पीछे बना विशाल गड्ढा राज्य सरकार के ‘भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड’ के दावों की पोल खोल रहा है। विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी सरकार के पांच साल पूरे होने पर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की बात करते हैं, लेकिन ज़मीन पर इस तरह के निर्माणाधीन और नवनिर्मित ढांचे पहली ही बरसात में ताश के पत्तों की तरह ढह रहे हैं।
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मानसून की शुरुआत में ही प्रशासनिक दावों की कसौटी
कांग्रेस का दावा है कि यह तो अभी मानसून के शुरुआती दौर का केवल पहला उदाहरण है। जैसे-जैसे बरसात का मौसम आगे बढ़ेगा, राज्य भर में जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये से बने कई और बुनियादी ढांचे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते हुए नज़र आएंगे। विपक्ष ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने के साथ-साथ इसमें शामिल ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने और दोषी अफसरों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई है।
नंदा की चौकी पुल की इस घटना ने न केवल आम जनता की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि मानसून के इस शुरुआती दौर में ही शासन और प्रशासन की तैयारियों तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को परीक्षा की घड़ी में खड़ा कर दिया है।










