Uttarakhand Lakhwar Multipurpose Project News: उत्तराखंड के बुनियादी ढांचे के विकास और जल-विद्युत क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना एक मील का पत्थर मानी जा रही है। इस राष्ट्रीय महत्व की परियोजना को समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी कड़ी में उत्तराखंड के नवनियुक्त मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को विकासखंड कालसी क्षेत्र के अंतर्गत निर्माणाधीन लखवाड़ परियोजना स्थल का दौरा किया और जमीनी हकीकत का बारीकी से मुआयना किया। इस निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव का रवैया बेहद सख्त और काम के प्रति बेहद गंभीर नजर आया। उन्होंने स्पष्ट रूप से संकेत दे दिए हैं कि इस परियोजना में किसी भी तरह की हीलाहवाली या देरी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्य सचिव ने परियोजना स्थल पर चल रहे निर्माण कार्यों के विभिन्न चरणों की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने केवल कागजी आंकड़ों पर भरोसा करने के बजाय धरातल पर जाकर काम की प्रगति को देखा। यह दौरा इस मायने में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मुख्य सचिव ने जल विद्युत निगम द्वारा तय किए गए पुराने लक्ष्य को बदलते हुए एक नया और चुनौतीपूर्ण लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। इससे यह साफ हो गया है कि प्रदेश सरकार अब विकास योजनाओं को समय से पहले पूरा करने की दिशा में आक्रामक रूप से काम कर रही है।
राष्ट्रीय महत्व की लखवाड़ परियोजना और इसका बहु-राज्यीय प्रभाव
लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना केवल उत्तराखंड के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण उत्तर भारत के लिए जीवनदायिनी साबित होने वाली है। यह देश की उन चुनिंदा जल परियोजनाओं में शामिल है, जिन्हें राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा प्राप्त है। देहरादून जिले में यमुना नदी पर बनाई जा रही इस परियोजना का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन करना नहीं है, बल्कि देश के कई प्रमुख राज्यों की प्यास बुझाना और उनके कृषि क्षेत्रों को सींचना भी है।

इस विशाल परियोजना के पूरा होने से उत्तराखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों को सीधा लाभ पहुंचेगा। इन राज्यों को न केवल सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिलेगा, बल्कि दिल्ली जैसे महानगरों की पेयजल समस्या का भी काफी हद तक समाधान हो सकेगा। मुख्य सचिव ने निरीक्षण के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया कि इस योजना के पीछे करोड़ों लोगों की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। बहु-राज्यीय लाभ होने के कारण केंद्र सरकार भी इस पर लगातार नजर बनाए हुए है। ऐसे में इस परियोजना के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की देरी सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था और बुनियादी विकास की रफ्तार को धीमा करती है।
समय-सीमा में बड़ा बदलाव: 2034 के बजाय 2031 तक काम पूरा करने का नया लक्ष्य
लखवाड़ परियोजना को लेकर अब तक की सबसे बड़ी खबर यह रही कि मुख्य सचिव ने इसके निर्माण की अंतिम समय-सीमा को सीधे तीन साल घटा दिया है। पूर्व में उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड यानी यूजेवीएनएल ने इस विशाल परियोजना को पूरा करने के लिए दिसंबर 2034 का लक्ष्य तय किया था। लेकिन मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे बेहद सुस्त रफ्तार करार दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि एक राष्ट्रीय परियोजना को पूरा करने में इतना लंबा समय लगाना न्यायसंगत नहीं है।
मुख्य सचिव ने यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण योजना का निर्माण कार्य हर हाल में वर्ष 2031 तक पूर्ण किया जाए। लक्ष्य को तीन साल पहले पूरा करना एक बहुत बड़ी चुनौती है, लेकिन मुख्य सचिव का मानना है कि यदि सही नियोजन और संसाधन प्रबंधन किया जाए, तो यह लक्ष्य पूरी तरह से हासिल करने योग्य है। इस लक्ष्य को पाने के लिए उन्होंने परियोजना से जुड़ी सभी निर्माण एजेंसियों और विभागों को अगले दो से तीन दिनों के भीतर एक व्यापक और व्यावहारिक कार्ययोजना यानी एक्शन प्लान तैयार कर शासन को सौंपने के निर्देश दिए हैं।
पर्ट चार्ट का कड़ाई से पालन और संसाधनों में बढ़ोतरी पर जोर
समय से पहले काम पूरा करने के लिए मुख्य सचिव ने आधुनिक परियोजना प्रबंधन तकनीकों को अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने निर्देश दिया कि संपूर्ण निर्माण कार्य को समय पर और बिना किसी रुकावट के पूरा करने के लिए एक विस्तृत ‘पर्ट चार्ट’ यानी प्रोग्राम इवैल्यूएशन एंड रिव्यू तकनीक चार्ट तैयार किया जाए। इस चार्ट के माध्यम से काम के हर छोटे-बड़े चरण की समय-सीमा तय की जाएगी और उसका शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। इससे यह फायदा होगा कि किस विभाग या एजेंसी का काम कहां अटका हुआ है, इसकी पहचान तुरंत की जा सकेगी।

इसके अलावा, मुख्य सचिव ने इस बात को भी रेखांकित किया कि पुरानी कार्यप्रणाली और सीमित संसाधनों के भरोसे 2031 का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए उन्होंने मौके पर ही कार्यदायी संस्थाओं को आवश्यक मशीनरी और मैनपावर यानी मानव संसाधन को तत्काल प्रभाव से बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजना स्थल पर श्रमिकों की संख्या बढ़ाई जाए और आधुनिकतम भारी मशीनों का उपयोग किया जाए ताकि काम चौबीसों घंटे और निर्बाध गति से चल सके।
गुणवत्ता और तकनीकी सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि समय की बचत करने की होड़ में कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए। हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए बांध और विद्युत गृह का निर्माण बेहद संवेदनशील और जटिल प्रक्रिया है। इसलिए, उन्होंने निर्देश दिए कि परियोजना से जुड़े सभी अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा अनिवार्य तकनीकी परीक्षण नियमित और अनिवार्य रूप से किए जाने चाहिए।
उन्होंने केंद्रीय जल आयोग द्वारा अपेक्षित सभी तकनीकी परीक्षणों को जल्द से जल्द पूरा करने और उनकी रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव का मानना है कि तकनीकी रूप से मजबूत निर्माण ही इस परियोजना को दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करेगा। किसी भी बड़ी आपदा की स्थिति में बांध की मजबूती पर कोई आंच न आए, इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों का पालन किया जाना आवश्यक है।
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एलएंडटी और यूजेवीएनएल की साझा जिम्मेदारी और त्रिस्तरीय समीक्षा ढांचा
इस विशाल परियोजना को धरातल पर उतारने का जिम्मा देश की प्रतिष्ठित निर्माण कंपनी लार्सन एंड टुब्रो और उत्तराखंड जल विद्युत निगम के कंधों पर है। मुख्य सचिव ने दोनों ही संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे केवल कार्यालयों में बैठकर फाइलों पर हस्ताक्षर न करें, बल्कि खुद मौके पर रहकर कार्यों की निगरानी करें। अधिकारियों की भौतिक उपस्थिति से कार्यस्थल पर आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का समाधान तुरंत हो जाता है और निर्णय लेने में समय नहीं गंवाना पड़ता।

काम की सुस्ती को दूर करने के लिए मुख्य सचिव ने एक त्रिस्तरीय समीक्षा ढांचा लागू करने का आदेश दिया है। इसके तहत अब परियोजना की प्रगति की दैनिक, पाक्षिक और मासिक रूप से गहन समीक्षा की जाएगी। दैनिक समीक्षा से दिन भर के काम का लेखा-जोखा मिलेगा, पाक्षिक समीक्षा से आ रही बाधाओं को दूर किया जाएगा, और मासिक समीक्षा के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि परियोजना अपने तयशुदा मार्ग पर बढ़ रही है या नहीं।
विस्थापितों का पुनर्वास और भूमि मुआवजा: एक मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण
लखवाड़ परियोजना के निर्माण में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक प्रभावित परिवारों का पुनर्वास और उनकी अधिग्रहीत भूमि का उचित मुआवजा वितरण है। मुख्य सचिव ने इस मुद्दे पर बेहद संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि भूमि अधिग्रहण के मुआवजे का वितरण कार्य बिना किसी अनावश्यक देरी के तत्काल पूरा किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि जिन लोगों ने राष्ट्र के विकास के लिए अपनी पुश्तैनी जमीनें दी हैं, उनके हितों की रक्षा करना सरकार की पहली प्राथमिकता है। प्रभावित ग्रामीणों और स्थानीय लोगों से लगातार सीधा संवाद बनाए रखना जरूरी है। उनके मन में उठने वाली शंकाओं और शिकायतों का त्वरित और शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाना चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन और यूजेवीएनएल के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे स्थानीय लोगों के बीच जाएं, उनकी समस्याओं को सुनें और आपसी सहमति से सभी लंबित मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करें।










