Shri Badrinath Dham donation scam News: उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्री बदरीनाथ धाम से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। मंदिर में आने वाले दान-चढ़ावे और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं तथा वित्तीय गड़बड़ियों की कुछ शिकायतें लगातार सरकार तक पहुंच रही थीं। इस पूरे प्रकरण की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत कड़ा रुख अख्तियार किया है। मुख्यमंत्री के साफ निर्देशों के बाद उत्तराखंड शासन ने इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए एक बेहद मजबूत और तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है। सरकार का संकल्प है कि देवभूमि के मंदिरों की पवित्रता और वहां की व्यवस्थाओं की पारदर्शिता से किसी भी कीमत पर खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। इसी कड़ी में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने भी एक बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक को सस्पेंड कर दिया है।
गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय ताकतवर जांच समिति
मामले की निष्पक्षता और गहराई से जांच सुनिश्चित करने के लिए पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल की ओर से एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के तहत जो समिति बनाई गई है, उसकी कमान सीधे गढ़वाल मंडल के आयुक्त यानी कमिश्नर को सौंपी गई है। प्रशासनिक अनुभव में शीर्ष पायदान पर बैठे कमिश्नर इस पूरी जांच की निगरानी करेंगे। उनके साथ सहयोग के लिए समिति में दो अन्य वरिष्ठ और विशेषज्ञ अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। इनमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी और महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में तैनात निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान शामिल हैं। वित्तीय निदेशक को शामिल करने से साफ है कि सरकार दान-चढ़ावे के एक-एक पैसे के हिसाब-किताब और बहीखातों की बारीकी से ऑडिट करवाना चाहती है, ताकि किसी भी स्तर पर हुई आर्थिक हेराफेरी को पकड़ा जा सके।

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पंद्रह दिनों के भीतर देनी होगी रिपोर्ट और व्यवस्था सुधारने के सुझाव
शासन द्वारा जारी किए गए सख्त आदेशों के मुताबिक इस उच्चस्तरीय समिति को अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट और जरूरी सिफारिशें आगामी पंद्रह दिनों के भीतर सरकार को सौंपनी होंगी। इस समय सीमा से स्पष्ट है कि सरकार मामले को लटकाना नहीं चाहती और जल्द से जल्द सच सामने लाना चाहती है। जांच को पूरी तरह सटीक और प्रभावी बनाने के लिए समिति को कुछ विशेष अधिकार भी दिए गए हैं। जांच के दौरान यदि समिति को लगता है कि उन्हें किसी तकनीकी विशेषज्ञ, चार्टर्ड अकाउंटेंट या किसी अन्य प्रशासनिक अधिकारी की मदद की जरूरत है, तो वे बेझिझक उनका सहयोग और परामर्श ले सकते हैं। इसके अलावा, समिति का काम सिर्फ कमी ढूंढना नहीं होगा, बल्कि वे भविष्य के लिए एक ऐसा पारदर्शी, जवाबदेह और मजबूत प्रबंधन तंत्र बनाने के लिए सुधारात्मक उपाय भी सुझाएंगे, जिससे आगे कभी ऐसी शिकायतों की गुंजाइश ही न बचे।
बीकेटीसी की बड़ी कार्रवाई: व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल तत्काल प्रभाव से सस्पेंड
इस पूरे मामले के तार जैसे ही प्रशासनिक गलियारों से जुड़े, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने भी अपनी आंतरिक व्यवस्था को साफ-सुथरा रखने के लिए बिना कोई समय गंवाए कड़ा कदम उठाया। मंदिर समिति के अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल के खिलाफ अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही और प्रथम दृष्टया गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप पाए गए थे। इन आरोपों के सामने आने के बाद बीकेटीसी प्रशासन ने इसी महीने की तीन तारीख को प्रमोद नौटियाल को एक कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। साथ ही इस आंतरिक जांच को आगे बढ़ाने के लिए विभाग के स्तर पर एक चार सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन भी किया गया था।
पद पर बने रहने से जांच प्रभावित होने का था अंदेशा, मुख्यालय छोड़ने पर रोक
जब जांच समिति ने आरोपी कर्मचारी द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण और उपलब्ध दस्तावेजों का शुरुआती परीक्षण किया, तो प्रमोद नौटियाल पर लगे आरोप पहली नजर में बिल्कुल सही और पुख्ता पाए गए। आंतरिक जांच समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में साफ कहा कि संबंधित कर्मचारी का व्यवहार और कार्यप्रणाली प्रशासनिक अनुशासन के खिलाफ है और उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी बेहद जरूरी है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की आशंका भी जताई कि यदि उक्त कर्मचारी को वर्तमान में उसके प्रभावशाली पद पर बनाए रखा गया, तो वह अपने रसूख का इस्तेमाल कर मुख्य जांच को प्रभावित कर सकता है या सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है।
इन्हीं गंभीर तथ्यों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्षता बनाए रखने के लिए प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया है। निलंबन की इस अवधि के दौरान नियमानुसार उन्हें केवल जीवन-निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें बीकेटीसी के जोशीमठ (चमोली जिला) स्थित कार्यालय से अटैच यानी संबद्ध कर दिया गया है। सख्त हिदायत दी गई है कि इस निलंबन अवधि के दौरान वे सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति के बिना किसी भी सूरत में मुख्यालय छोड़कर बाहर नहीं जा सकेंगे। इसके अलावा, उन्हें मुख्य जांच और आगे होने वाली अनुशासनात्मक कार्यवाही में पूरा सहयोग देना अनिवार्य होगा, अन्यथा उनके खिलाफ और सख्त कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।
भ्रष्टाचार और लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर अडिग मंदिर प्रशासन
इस बड़ी कार्रवाई के बाद श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने राज्य की जनता और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। बीकेटीसी प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मंदिर के प्रबंधन, उसकी गरिमा और व्यवस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा कड़ा अनुशासन उनकी सबसे पहली प्राथमिकता है। करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस पावन धाम में किसी भी स्तर पर होने वाली लापरवाही, भ्रष्टाचार या अनियमितता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मंदिर समिति ने भरोसा दिलाया है कि जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, चाहे वह कितने ही बड़े पद पर क्यों न बैठा हो, उसके खिलाफ नियमों के दायरे में रहकर सबसे कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री के इस त्वरित फैसले और विभाग की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से देवभूमि के प्रशासनिक महकमे में भी हड़कंप मचा हुआ है।
गौर हो कि इस मामले में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने अनुशासन एवं प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। समिति द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नौटियाल के विरुद्ध पदीय दायित्वों के निर्वहन में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने पर 03 जुलाई 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। साथ ही मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच के लिए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया।









