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Uttarakhand TB Mukt Bharat Abhiyan News: मुख्य सचिव ने टीबी मुक्त भारत अभियान की धीमी प्रगति पर जताई नाराज़गी

On: June 18, 2026 6:00 PM
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Uttarakhand TB Mukt Bharat Abhiyan News: मुख्य सचिव ने टीबी मुक्त भारत अभियान की धीमी प्रगति पर जताई नाराज़गी
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Uttarakhand TB Mukt Bharat Abhiyan : उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और राष्ट्रीय अभियानों की प्रगति को लेकर शासन स्तर पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया गया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य में ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ (TB Mukt Bharat Abhiyan) की सुस्त रफ्तार और कुछ जनपदों में लक्ष्य से पीछे चल रहे आंकड़ों पर अत्यंत गहरी नाराजगी व्यक्त की है। गुरुवार को सचिवालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों (DMs) और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMOs) के साथ आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने सीधे तौर पर जवाबदेही तय करने के आदेश दिए हैं।

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Photo- Google

मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय महत्व के इस स्वास्थ्य अभियान में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही अक्षम्य होगी। उन्होंने उन सभी जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMOs) को तत्काल प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) जारी करने के निर्देश दिए हैं, जहां टीबी मरीजों का सामान्य जांच आकलन प्रतिशत 60 प्रतिशत से कम दर्ज किया गया है।

टीबी मुक्त भारत अभियान और मातृ स्वास्थ्य समीक्षा: मुख्य बिंदु

राज्य में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत संचालित हो रहे इन दो बड़े अभियानों को गति देने के लिए मुख्य सचिव द्वारा निर्धारित समय-सीमा और प्रमुख रणनीतियों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है:

अभियान / प्राथमिकता क्षेत्रवर्तमान स्थिति व समस्यामुख्य सचिव (CS) के कड़े निर्देश व समय-सीमा
टीबी मरीज सामान्य जांचकुछ जनपदों में प्रगति 60% से भी कमअगले 1 सप्ताह (7 दिन) के भीतर 100% जांच कार्य पूर्ण करने का अल्टीमेटम
दंडात्मक कार्रवाईखराब प्रदर्शन वाले जिलों की सूचीसंबंधित मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMOs) को तत्काल प्रतिकूल प्रविष्टि
अभियान की दैनिक निगरानीपूर्व में साप्ताहिक/मासिक समीक्षाडीजी हेल्थ (DG Health) स्तर पर प्रतिदिन (Daily) अनिवार्य मॉनिटरिंग
गर्भावस्था पंजीकरणपहली तिमाही (First Trimester) में कम रजिस्ट्रेशनप्रथम तिमाही में ही 100% पंजीकरण बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश
हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP)मानसून में सुदूर क्षेत्रों में संपर्क टूटने का खतराजोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को अग्रिम रूप से बर्थ वेटिंग होम्स में शिफ्ट करना
संस्थानों का समन्वयबुनियादी ढांचों की कमीमहिला एवं बाल विकास विभाग के वन स्टॉप सेंटर्स का उपयोग करने की स्वीकृति

टीबी मुक्त भारत अभियान: एक हफ्ते में 100% लक्ष्य का अल्टीमेटम

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बैठक के दौरान प्रदेश में टीबी उन्मूलन की दिशा में हो रहे कार्यों की जिलावार समीक्षा की। स्क्रीनिंग और डायग्नोसिस की धीमी रफ्तार पर अधिकारियों को फटकार लगाते हुए उन्होंने अगले एक हफ्ते (7 दिन) के भीतर राज्य में टीबी मरीजों की सामान्य जांच आकलन कार्य को 100 प्रतिशत पूर्ण करने की अंतिम समय-सीमा (Deadline) निर्धारित की है।

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जोखिम वाले गांवों को प्राथमिकता

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इस एक सप्ताह के विशेष अभियान के दौरान उन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जाए जो चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से अति-संवेदनशील (Highly Sensitive) हैं।

  • औद्योगिक क्षेत्रों के समीप स्थित बस्तियां, खनन क्षेत्र और मलिन बस्तियां जहां टीबी फैलने की संभावना अधिक होती है।
  • ऐसे दूरस्थ और पर्वतीय गांव जहां पूर्व में टीबी के क्लस्टर (ज्यादा मरीज) पाए गए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर कवर किया जाए।

दैनिक आधार पर होगी मॉनिटरिंग

अभियान को पटरी पर लाने के लिए मुख्य सचिव ने इसके प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। अब तक जिला स्तर पर होने वाली इस समीक्षा को सीधे महानिदेशक स्वास्थ्य (DG Health) के अधीन कर दिया गया है। महानिदेशक को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिदिन (Daily) प्रत्येक जनपद की स्क्रीनिंग और टेस्टिंग रिपोर्ट का विश्लेषण करेंगे। जिन जनपदों में स्क्रीनिंग की संख्या कम पाई जाएगी, वहां तत्काल अतिरिक्त टीमें तैनात की जाएंगी।

मुख्य सचिव का स्पष्ट संदेश: “टीबी मुक्त भारत का सपना तभी साकार होगा जब हमारी जमीनी टीम सक्रिय रहेगी। जिन जिलों में प्रोग्रेस 60% से कम है, वहां के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। केवल लक्ष्य निर्धारित करना काफी नहीं है, बल्कि समयबद्ध तरीके से जमीन पर परिणाम दिखना अनिवार्य है।”

मातृ स्वास्थ्य: पहली तिमाही में पंजीकरण बढ़ाने पर विशेष जोर

बैठक के दूसरे महत्वपूर्ण चरण में मुख्य सचिव ने राज्य में मातृ स्वास्थ्य (Maternal Health) और शिशु सुरक्षा कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की। उन्होंने प्रसवपूर्व देखभाल (Antenatal Care – ANC) में सुधार लाने के लिए कड़े निर्देश जारी किए।

गर्भावस्था की प्रथम तिमाही में पंजीकरण के लाभ

मुख्य सचिव ने कहा कि मातृ मृत्यु दर (MMR) को न्यूनतम करने के लिए यह बेहद जरूरी है कि गर्भवती महिला का पंजीकरण गर्भावस्था के पहले तीन महीनों (First Trimester) के भीतर ही हो जाए। इससे प्रशासन को निम्नलिखित तकनीकी लाभ मिलेंगे:

  1. हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP) की समय पर पहचान: एनीमिया (खून की कमी), उच्च रक्तचाप (Hyper-tension), मधुमेह या अन्य जटिलताओं से ग्रसित महिलाओं की पहचान शुरुआत में ही हो सकेगी।
  2. बेहतर क्लिनिकल प्रबंधन: उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का चिकित्सा विशेषज्ञों की देखरेख में नौ महीनों तक बेहतर क्लिनिकल और न्यूट्रिशनल मैनेजमेंट सुनिश्चित किया जा सकेगा।
  3. एएनसी (ANC) जांच का दायरा बढ़ाना: सभी जनपदों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक गर्भवती महिला की न्यूनतम चार एएनसी जांचें अनिवार्य रूप से पूरी करवाई जाएं।

मानसून सीजन को लेकर अलर्ट: ‘बर्थ वेटिंग होम्स’ होंगे सक्रिय

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों और आगामी मानसून सीजन (Monsoon Season) के दृष्टिगत मुख्य सचिव ने एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में भारी बारिश, भूस्खलन और नदी-नालों के उफान पर आने से कई सुदूरवर्ती गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों और चिकित्सालयों से पूरी तरह टूट जाता है।

इस आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए मुख्य सचिव ने योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने को कहा है:

  • अग्रिम शिफ्टिंग: मानसून के दौरान जिन दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क मार्ग बंद होने की आशंका रहती है, वहां चिन्हित की गई ‘हाई-रिस्क’ गर्भवती महिलाओं को उनके प्रसव की संभावित तिथि (EDD) से पहले ही नजदीकी जन्म प्रतीक्षा गृहों (Birth Waiting Homes) में शिफ्ट कर दिया जाए।
  • वन स्टॉप सेंटर्स का उपयोग: जिन क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग के पास जन्म प्रतीक्षा गृहों के लिए पर्याप्त स्थान या बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं है, वहां महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित वन स्टॉप सेंटर्स (One Stop Centers) के भवनों और संसाधनों का समन्वय (Convergence) स्थापित कर उपयोग किया जाए।
  • प्रसव उपरांत देखभाल: मुख्य सचिव ने कहा कि जोखिम केवल प्रसव तक ही सीमित नहीं रहता। प्रसव के बाद भी ‘हाई-रिस्क माताओं’ (High-Risk Mothers) की स्वास्थ्य निगरानी और मैनेजमेंट को मजबूत रखा जाए, ताकि ऐसी किसी भी मातृ-मृत्यु को रोका जा सके जिसे सही समय पर इलाज देकर बचाया जा सकता है।

बैठक के अंत में मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे स्वास्थ्य विभाग के इन दोनों महत्वपूर्ण घटकों (टीबी उन्मूलन और मातृ स्वास्थ्य) की प्रगति की व्यक्तिगत रूप से साप्ताहिक समीक्षा करना सुनिश्चित करें, जिससे कि देवभूमि उत्तराखंड स्वास्थ्य मानकों के राष्ट्रीय सूचकांक में शीर्ष स्थान प्राप्त कर सके।

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