Uttarakhand SIR Launched News: उत्तराखंड में लोकतंत्र की बुनियाद को और अधिक मजबूत तथा पारदर्शी बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। सूबे में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (Special Intensive Revision) कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत हो गई है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य की मतदाता सूची को शत-प्रतिशत शुद्ध, सटीक और त्रुटिरहित बनाना है। इस बार निर्वाचन आयोग तकनीक और जमीनी सत्यापन के अनूठे समन्वय के साथ काम कर रहा है, जिसके तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) राज्य के कोने-कोने में घर-घर जाकर सीधे मतदाताओं से संवाद करेंगे और गणना फार्म वितरित करेंगे। इस बार आयोग का रुख बेहद सख्त है; यदि पूरी प्रक्रिया के दौरान कहीं भी कोई जानबूझकर की गई गड़बड़ी, फर्जीवाड़ा या दोहरी प्रविष्टि पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सीधे कानूनी नोटिस जारी कर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

घर-घर दस्तक देंगे 11 हजार से अधिक बीएलओ, अनुपस्थिति पर तीन बार दी जाएगी विज़िट
इस व्यापक अभियान को अमलीजामा पहनाने के लिए उत्तराखंड के सभी विधानसभा क्षेत्रों में व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, प्रदेश भर के सभी 11,733 पोलिंग बूथों पर तैनात बीएलओ को तीन चरणों में कड़ा प्रशिक्षण दिया गया है और गणना फार्मों की शत-प्रतिशत छपाई का काम पूरा कर लिया गया है। अभियान के दौरान राज्य के लगभग 79 लाख 60 हजार 762 मतदाताओं तक पहुंचने का विशाल लक्ष्य रखा गया है।
आयोग ने आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए नियमों को काफी व्यावहारिक बनाया है। यदि क्षेत्र भ्रमण के दौरान कोई मतदाता पहली बार में अपने घर पर उपलब्ध नहीं मिलता है, तो बीएलओ हार नहीं मानेंगे। वे ऐसे परिवारों के घर पर कम से कम तीन बार विज़िट करेंगे। पहली बार घर पर न मिलने की स्थिति में बीएलओ मकान के बाहर एक विशेष स्टिकर चिपकाएंगे, जिस पर वे अपनी अगली विज़िट (दौरे) की तारीख, समय और अपना निजी मोबाइल नंबर स्पष्ट रूप से लिखेंगे ताकि मतदाता अपनी सुविधानुसार बीएलओ से संपर्क कर सकें और अपना विवरण दर्ज करवा सकें।
गड़बड़ी मिलने पर जारी होगा नोटिस, डिजिटल मैपिंग से पकड़े जाएंगे फर्जी वोटर
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि इस सघन अभियान का एक बड़ा मकसद फर्जी मतदाताओं की पहचान करना और उन्हें मतदाता सूची से बाहर का रास्ता दिखाना है। अक्सर यह देखा जाता है कि कई लोग एक से अधिक स्थानों पर या पुराने पते के साथ-साथ नए पते पर भी मतदाता बने रहते हैं। इस बार एसआईआर प्रक्रिया के तहत बीएलओ ऐप के माध्यम से सभी फार्मों का मौके पर ही डिजिटलीकरण किया जाएगा।
जैसे ही डेटा ऑनलाइन फीड होगा, सॉफ्टवेयर तुरंत समान नाम, पिता के नाम या पते वाली प्रविष्टियों को फिल्टर कर देगा। यदि किसी भी मतदाता के विवरण में विसंगति, दोहरी प्रविष्टि या किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी पाई जाती है, तो आयोग द्वारा तुरंत कानूनी नोटिस जारी किया जाएगा। इसके साथ ही, लापरवाही बरतने वाले या जानबूझकर गलत जानकारी भरने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की गई है, ताकि चुनावी प्रक्रिया की शुचिता से कोई समझौता न हो सके।
महत्वपूर्ण तिथियों का पूरा शेड्यूल और एक जुलाई 2026 की अर्हता
यह पूरी पुनरीक्षण प्रक्रिया एक जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर संपन्न की जा रही है, जिसका अर्थ है कि इस तिथि तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा भी अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार, 8 जून से 7 जुलाई 2026 तक पूरे एक महीने बीएलओ घर-घर जाकर गणना फार्म वितरित और एकत्र करेंगे। इसी अवधि में उनके द्वारा बीएलओ ऐप पर डेटा अपलोड किया जाएगा।
इसके बाद, 14 जुलाई 2026 को मतदाता सूची के ड्राफ्ट रोल (प्रारूप) का प्रकाशन किया जाएगा। ड्राफ्ट जारी होने के बाद 14 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक आम जनता को अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का पूरा मौका मिलेगा। इन सभी प्राप्त दावों और आपत्तियों की गहन स्क्रूटनी की जाएगी और नोटिस जारी करने के बाद 11 सितंबर 2026 तक इनका अंतिम निस्तारण कर दिया जाएगा। सभी सुधारों के बाद, 15 सितंबर 2026 को उत्तराखंड की अंतिम और संशोधित मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया जाएगा।
‘बुक ए कॉल विद बीएलओ’ जैसी आधुनिक डिजिटल सुविधाएं भी उपलब्ध
इस बार के एसआईआर अभियान में तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल देखने को मिल रहा है। भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं की सुविधा के लिए “बुक ए कॉल विद बीएलओ” नाम से एक बेहद खास डिजिटल फीचर लॉन्च किया है। यदि किसी मतदाता को बीएलओ से मिलने में कठिनाई हो रही है, तो वह राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (voters.eci.gov.in) पर जाकर या ईसीआई-नेट (ECI-NET) मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक कर सकता है। कॉल बुक होने के महज दो दिनों के भीतर संबंधित बीएलओ खुद उस मतदाता से संपर्क करेगा।
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इसके अतिरिक्त, राज्य के पुराने इतिहास को देखने के लिए वर्ष 2003 की मतदाता सूची को भी मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया गया है, जहां लोग अपने मोहल्ले, विधानसभा क्षेत्र या नाम के आधार पर पुराने रिकॉर्ड खोज सकते हैं। नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए फार्म-6 की सुविधा भी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से चालू रखी गई है।









