Kainchi Dham Mela 2026 News In Hindi: उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम (Kainchi Dham) में हर साल 15 जून को बाबा नीम करौली आश्रम का स्थापना दिवस बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर आयोजित होने वाले भव्य मेले में देश के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी लाखों श्रद्धालुओं की भारी आमद होती है।

श्रद्धालुओं की इस भारी भीड़ को नियंत्रित करने और पर्वतीय मार्गों पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए नैनीताल जिला पुलिस-प्रशासन ने कमर कस ली है। प्रशासन द्वारा जारी किए गए विशेष ट्रैफिक प्लान के तहत 14 और 15 जून को कैंची धाम रूट पर सभी प्रकार के निजी वाहनों (Private Vehicles) और बाहरी जिलों/राज्यों से आने वाले दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
यात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए व्यापक स्तर पर 210 विशेष रोडवेज/केमू बसों और 250 शटल टैक्सियों (मैक्स व अन्य वाहन) का संचालन किया जा रहा है।
निजी और दोपहिया वाहनों पर सख्त पाबंदी: कहाँ रोके जाएंगे वाहन?
मेले के दौरान संकरे पहाड़ी रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने कड़े कदम उठाए हैं। एसएसपी नैनीताल के अनुसार, ट्रैफिक डायवर्जन और नो-एंट्री प्लान 14 जून की सुबह से ही प्रभावी हो जाएगा।
Neem Karoli Baba: कौन है नीम करौली बाबा, एक आध्यात्मिक संत जिनकी महिमा ने विश्व को झुकाया
- दोपहिया वाहनों पर रोक: बाहरी राज्यों या मैदानी इलाकों से आने वाले टू-व्हीलर्स को काठगोदाम और कालाढूंगी के पास ही रोक दिया जाएगा। इन्हें पर्वतीय मार्गों की ओर जाने की अनुमति नहीं होगी।
- निजी कार और टैक्सियां: हल्द्वानी या अन्य शहरों से आने वाले निजी चौपहिया वाहनों को भवाली, भीमताल और ज्योलिकोट में बने निर्धारित पार्किंग स्थलों पर पार्क करना होगा। कैंची धाम मंदिर के मुख्य परिसर तक केवल आधिकारिक शटल सेवाओं को ही जाने की अनुमति होगी।
महत्वपूर्ण चेतावनी: यदि नैनीताल, भवाली और हल्द्वानी के पार्किंग स्थल पूरी तरह भर जाते हैं, तो एहतियातन बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों को ऊधम सिंह नगर की सीमा पर ही रोककर वापस लौटाया जा सकता है। इसलिए प्रशासन ने सभी से नियमों का पालन करने की अपील की है।
सुगम यात्रा के लिए ‘कलर कोडेड’ शटल सेवा और पार्किंग व्यवस्था
श्रद्धालुओं को पार्किंग स्थलों से मंदिर परिसर तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए परिवहन विभाग और प्रशासन ने इस बार बेहद अनूठी व्यवस्था की है। भ्रम की स्थिति से बचने के लिए शटल सेवाओं के लिए कलर-कोडेड बोर्ड (Color-Coded Boards) निर्धारित किए गए हैं।

| पार्किंग/प्रस्थान स्थल | शटल का प्रकार | रूट और व्यवस्था |
| हल्द्वानी – काठगोदाम | गुलाबी बोर्ड वाली बसें | सीधे मुख्य पार्किंग हब तक कनेक्ट करेंगी |
| भीमताल – नैनीताल | नीले/हरे बोर्ड वाले वाहन | भवाली और मस्जिद तिराहा होते हुए कैंची धाम |
| भवाली डंपिंग जोन व सैनिटोरियम | शटल टैक्सियां (मैक्स) | यहाँ से लगातार मंदिर के लिए राउंड लगाएंगी |
यात्रियों की सुविधा के लिए भवाली जलसंस्थान कैंपस, श्यामखेत-घोड़ाखाल मार्ग, भवाली बाईपास डंपिंग जोन और रातिघाट के पास अस्थाई पार्किंग स्थल विकसित किए गए हैं।
आम राहगीरों और पर्यटकों के लिए रूट डायवर्जन (Route Diversion)
जो यात्री अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, रानीखेत या कौसानी की तरफ जा रहे हैं और उनका कैंची धाम मेले से कोई सरोकार नहीं है, उन्हें मुख्य राजमार्ग के बजाय वैकल्पिक रास्तों से भेजा जाएगा:
- हल्द्वानी से अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ जाने वाले: इन वाहनों को भीमताल से डायवर्ट करके पदमपुरी -> धानाचूली -> शहरफाटक के रास्ते भेजा जाएगा।
- रानीखेत जाने वाले वाहन: इन्हें नैनीताल या कालाढूंगी-मंगोली के रास्ते से डायवर्ट किया जाएगा ताकि मुख्य भवाली-कैंची मार्ग पर दबाव कम से कम रहे।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष गाइडलाइंस और जरूरी टिप्स
यदि आप भी 14 या 15 जून को बाबा नीम करौली के दर्शन करने की योजना बना रहे हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
- अतिरिक्त समय लेकर चलें: यदि आपकी इस दौरान काठगोदाम से कोई ट्रेन है या पंतनगर/दिल्ली से फ्लाइट है, तो कम से कम 3-4 घंटे का अतिरिक्त बफर समय लेकर घर से निकलें। डायवर्जन के कारण यात्रा में लंबा समय लग सकता है।
- स्थानीय पहचान पत्र साथ रखें: स्थानीय निवासियों और सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी या आवश्यक कार्यों के लिए छूट दी जाएगी, लेकिन इसके लिए वैध आईडी कार्ड दिखाना अनिवार्य होगा।
- भीड़ से बचने का सही तरीका: प्रशासन ने सुझाव दिया है कि स्थापना दिवस (15 जून) के मुख्य मेले के दिन अत्यधिक भीड़ रहती है। बाबा का विशेष प्रसाद 16 से 18 जून तक भी वितरित किया जाएगा। शांतिपूर्ण दर्शन के इच्छुक श्रद्धालु 16, 17 या 18 जून को आने का प्लान बना सकते हैं।
अध्यात्म का बड़ा केंद्र: क्यों उमड़ती है यहाँ इतनी भीड़?
शिप्रा नदी के किनारे पहाड़ों के बीच बसा कैंची धाम बाबा नीम करौली महाराज की तपोस्थली है। इस स्थान की ख्याति वैश्विक स्तर पर तब फैली जब एप्पल (Apple) के संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक (अब मेटा) के मुखिया मार्क जुकरबर्ग ने यहाँ आकर बाबा का आशीर्वाद लिया और उनके जीवन की दिशा बदल गई।
स्थापना दिवस के दिन यहाँ आने वाले हर श्रद्धालु को मालपुए का विशेष प्रसाद बांटा जाता है। पिछले वर्ष मात्र 16 घंटों के भीतर सवा लाख से अधिक लोगों ने दर्शन किए थे, और इस वर्ष यह संख्या और बड़े रिकॉर्ड को पार करने की उम्मीद है। प्रशासन की इस चुस्त-दुरुस्त शटल व्यवस्था से उम्मीद है कि श्रद्धालु बिना किसी बड़ी बाधा के बाबा के दरबार में शीश नवा सकेंगे।







