Governor Lieutenant General Gurmeet Singh visited Badrinath News: उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने शनिवार को भू-वैकुंठ श्री बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बदरीविशाल के दर्शन किए और विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की। कपाट खुलने के बाद राज्यपाल का यह दौरा आध्यात्मिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। बदरीनाथ धाम की पावन आभा के बीच राज्यपाल ने न केवल देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की मंगल कामना की, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति का स्थलीय निरीक्षण भी किया।
दिव्य दर्शन और भव्य स्वागत की झलक
राज्यपाल के बदरीनाथ धाम पहुंचने पर मंदिर परिसर में भक्ति और उल्लास का वातावरण देखा गया। हेलीपैड से मंदिर पहुंचने तक स्थानीय प्रशासन और श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के पदाधिकारियों ने उनकी अगवानी की। मंदिर के मुख्य द्वार पर समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती और मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान तीर्थ पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उनका अभिनंदन किया, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। राज्यपाल ने मंदिर के गर्भगृह में भगवान बदरीविशाल की विशेष पूजा में भाग लिया और कुछ समय ध्यान लगाकर धाम की शांति और दिव्यता को महसूस किया।

श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं की सराहना
भगवान के दर्शन के पश्चात राज्यपाल ने मंदिर समिति द्वारा इस वर्ष की यात्रा के लिए किए गए प्रबंधों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए बनाए गए विश्राम स्थलों, कतार प्रबंधन और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं पर संतोष व्यक्त किया। राज्यपाल ने कहा कि बदरीनाथ धाम केवल उत्तराखंड की नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व की आस्था का केंद्र है। उन्होंने मंदिर समिति के अधिकारियों और कर्मचारियों के समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि इतने दुर्गम क्षेत्र में लाखों की संख्या में उमड़ने वाले श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसे यहां का प्रशासन और मंदिर समिति बखूबी निभा रही है। मंदिर समिति की ओर से उन्हें भगवान का प्रसाद और पारंपरिक अंगवस्त्र भी भेंट किया गया।

मास्टर प्लान के कार्यों और समयबद्धता पर जोर
अपनी यात्रा के दौरान राज्यपाल ने बदरीनाथ मास्टर प्लान के तहत संचालित हो रहे विभिन्न पुनर्निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने निर्माण कार्यों में लगे इंजीनियरों और प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए। राज्यपाल ने रेखांकित किया कि मास्टर प्लान के पूर्ण होने के बाद बदरीनाथ धाम का स्वरूप और भी भव्य होगा, जिससे यहां आने वाले तीर्थयात्रियों को आधुनिक सुविधाएं प्राप्त होंगी। उन्होंने निर्माण कार्यों के दौरान धाम की पौराणिक और आध्यात्मिक गरिमा को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया, ताकि आधुनिकता और परंपरा का बेहतर समन्वय बना रहे।

वोकल फॉर लोकल: स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती का आह्वान
राज्यपाल ने तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं से एक विशेष अपील करते हुए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ है। उन्होंने यात्रियों से आग्रह किया कि वे अपनी यात्रा के दौरान देवभूमि के स्थानीय हस्तशिल्प, पहाड़ी उत्पादों और स्थानीय व्यंजनों को प्राथमिकता दें। राज्यपाल का मानना है कि जब श्रद्धालु यहां के स्थानीय उत्पाद खरीदेंगे, तभी सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और पलायन जैसी समस्याओं पर अंकुश लग सकेगा। उन्होंने इसे ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

चारधाम यात्रा: सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का गौरव
अपने संबोधन के समापन पर राज्यपाल ने चारधाम यात्रा को उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन पूरी तत्परता के साथ यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस वर्ष की यात्रा पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ेगी और श्रद्धालुओं को देवभूमि से एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होगा। राज्यपाल ने यात्रियों से संयम बरतने और हिमालयी पर्यावरण की स्वच्छता का ध्यान रखने का भी आह्वान किया, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस पावन क्षेत्र की पवित्रता अक्षुण्ण बनी रहे।










