India First Barrier Free Toll Plaza Mdano News: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 1 मई 2026 को गुजरात के सूरत में देश के पहले मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम का उद्घाटन किया। मुंबई-दिल्ली नेशनल हाईवे (NH-48) पर स्थित चोर्यासी टोल प्लाजा अब पूरी तरह से ‘बूम-बैरियर’ मुक्त हो गया है। इसका मतलब है कि अब टोल प्लाजा पर कोई डंडा (Barrier) नहीं होगा जो आपकी गाड़ी को रोके। यह तकनीक भारत को उन विकसित देशों की श्रेणी में ले आई है जहाँ हाईवे पर बिना किसी बाधा के टोल वसूली की जाती है।

क्या है MLFF और यह कैसे काम करता है?
मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) एक ऐसी तकनीक है जो बिना किसी भौतिक बाधा के वाहनों की पहचान करती है और उनसे टोल वसूलती है।
- गैन्ट्री सिस्टम: टोल प्लाजा पर अब सामान्य केबिनों की जगह सड़क के ऊपर लोहे के बड़े स्ट्रक्चर (Gantries) लगाए गए हैं।
- एडवांस सेंसर और कैमरे: इन स्ट्रक्चर पर हाई-डेफिनिशन ANPR (Automatic Number Plate Recognition) कैमरे, RFID (FASTag) रीडर्स और LiDAR सेंसर लगे हैं।
- रियल-टाइम प्रोसेसिंग: जैसे ही कोई वाहन 100 या 120 किमी/घंटा की रफ्तार से इन सेंसर्स के नीचे से गुजरता है, सिस्टम तुरंत उसके FASTag को रीड कर लेता है और खाते से पैसे काट लेता है। यदि FASTag काम नहीं कर रहा, तो ANPR कैमरा नंबर प्लेट को स्कैन कर डिजिटल चालान या इनवॉइस जेनरेट कर देता है।

सूरत टोल प्लाजा की 5 बड़ी विशेषताएं
- जीरो वेटिंग टाइम: पहले एक टोल पार करने में औसतन 20-30 सेकंड का समय लगता था, अब यह समय शून्य (0) हो गया है।
- ईंधन की बचत: वाहनों को रुकने और फिर से स्टार्ट करने की जरूरत नहीं होगी, जिससे सालाना करोड़ों लीटर ईंधन की बचत होगी।
- प्रदूषण में कमी: टोल पर लगने वाले लंबे जाम और गाड़ियों के धुएं से होने वाला प्रदूषण अब इतिहास बन जाएगा।
- 120kmph की क्षमता: यह सिस्टम इतनी सटीक है कि अगर कोई स्पोर्ट्स कार 120 की स्पीड पर भी गुजरती है, तो भी उसका टोल सफलतापूर्वक कट जाएगा।
- इंसानी दखल खत्म: पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल और ऑटोमेटेड है, जिससे भ्रष्टाचार या विवाद की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
बिना टोल भुगतान किए निकलने वाले वाहनों के लिए सरकार ने सख्त नियम बनाए हैं। यदि किसी वाहन का टोल नहीं कटता है, तो मालिक को ई-नोटिस भेजा जाएगा। 72 घंटे के भीतर भुगतान न करने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही, ऐसे वाहनों को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा, जिससे उनकी गाड़ी की फिटनेस या ओनरशिप ट्रांसफर जैसे काम रुक सकते हैं।

सूरत का यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा
सूरत का यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा है और अब NHAI की योजना है कि आने वाले समय में देश के सभी 4-लेन और उससे बड़े नेशनल हाईवे को इसी बैरियर-लेस सिस्टम में बदला जाए। यह न केवल यात्रियों का समय बचाएगा, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की गति को भी नई उड़ान देगा।











