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UPSC Rules 2026: UPSC में बड़ा बदलाव: सेवा में रहते हुए बार-बार परीक्षा नहीं, रैंक सुधार सिर्फ एक बार

On: February 8, 2026 5:05 PM
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UPSC Rules 2026 News In Hindi: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने 4 फरवरी 2026 को सिविल सेवा परीक्षा (CSE) की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
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UPSC Rules 2026 News In Hindi: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने 4 फरवरी 2026 को सिविल सेवा परीक्षा (CSE) की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस वर्ष न केवल 933 रिक्तियों की घोषणा की गई है, बल्कि आयोग ने सेवा आवंटन और परीक्षा में बैठने की पात्रता से जुड़े नियमों में ऐसे “क्रांतिकारी” बदलाव किए हैं, जो भविष्य के अधिकारियों की तैयारी की पूरी रणनीति को बदल देंगे। नए नियमों के तहत, अब एक बार ‘क्लास-वन’ सेवा मिलने के बाद रैंक सुधारने (Rank Improvement) के असीमित अवसर समाप्त कर दिए गए हैं।

IAS और IFS अधिकारियों के लिए दरवाजे बंद

सबसे बड़ा बदलाव उन उम्मीदवारों के लिए है जो पहले से ही भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) या भारतीय विदेश सेवा (IFS) में नियुक्त हो चुके हैं। नए नियमों के अनुसार, यदि कोई उम्मीदवार पहले से इन दो सेवाओं में कार्यरत है, तो वह CSE 2026 की परीक्षा में बैठने का पात्र ही नहीं होगा।

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अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) पास कर लेता है, लेकिन मुख्य परीक्षा (Mains) शुरू होने से पहले उसकी नियुक्ति IAS या IFS के रूप में हो जाती है, तो उसे मेन्स परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी तरह, यदि मुख्य परीक्षा के दौरान वह इन सेवाओं को जॉइन कर लेता है, तो उसकी उम्मीदवारी तत्काल प्रभाव से रद्द मानी जाएगी। यदि कोई सेवारत अधिकारी दोबारा परीक्षा देना चाहता है, तो उसे सबसे पहले अपनी सेवा से औपचारिक रूप से इस्तीफा देना होगा।

IPS और ग्रुप-A सेवाओं के लिए ‘वन-टाइम’ अवसर

पुलिस सेवा और अन्य केंद्रीय सेवाओं (जैसे IRS, IAAS) के लिए नियम कुछ लचीले लेकिन सख्त शर्तों से बंधे हैं। जो उम्मीदवार CSE 2026 के माध्यम से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) या ग्रुप-A सेवाओं के लिए चुने जाते हैं, उन्हें अपनी रैंक सुधारने के लिए केवल एक अतिरिक्त अवसर (CSE 2027) दिया जाएगा।

हालांकि, इसके लिए शर्तें काफी कड़ी हैं:

  1. प्रशिक्षण से छूट (Exemption): उम्मीदवार को आवंटित सेवा की ट्रेनिंग में शामिल होने से संबंधित विभाग से विशेष छूट लेनी होगी। यह छूट पूरे करियर में केवल एक बार ही मिलेगी।
  2. फाउंडेशन कोर्स अनिवार्य: रैंक सुधार के लिए परीक्षा देने वाले उम्मीदवार को केवल ‘फाउंडेशन कोर्स’ पूरा करने की अनुमति होगी, पूर्ण ट्रेनिंग की नहीं।
  3. दोबारा वही सेवा नहीं: यदि कोई पहले से ही IPS है, तो वह अन्य सेवाओं के लिए तो परीक्षा दे सकता है, लेकिन वह दोबारा अपनी प्राथमिकता (Preference) में IPS का विकल्प नहीं चुन पाएगा।
  4. 2028 से पूर्ण प्रतिबंध: यदि कोई उम्मीदवार CSE 2027 में भी सफल नहीं हो पाता, तो उसे 2028 या उसके बाद की परीक्षाओं में बैठने के लिए अपनी वर्तमान सेवा से इस्तीफा देना अनिवार्य होगा।
UPSC CSE Notification 2026 Out, Check Exam Date, Application Link and Fee

क्यों किए गए ये बड़े बदलाव?

विशेषज्ञों और प्रशासनिक गलियारों में इन बदलावों के पीछे तीन मुख्य तर्क दिए जा रहे हैं:

  • प्रशिक्षण संसाधनों की बर्बादी: जब कोई अधिकारी चयनित होने के बाद बार-बार परीक्षा देता है, तो वह ट्रेनिंग पर पूरा ध्यान नहीं दे पाता। इससे सरकार द्वारा प्रशिक्षण पर खर्च किया गया करोड़ों का बजट और संसाधन व्यर्थ चले जाते हैं।
  • प्रशासनिक स्थिरता: अधिकारियों के बार-बार सेवा बदलने या परीक्षा की तैयारी में लगे रहने से विभागों के कामकाज और नीतिगत निरंतरता पर बुरा असर पड़ता है।
  • अवसरों की समानता: अक्सर देखा गया है कि कुछ ‘प्रोफेशनल’ उम्मीदवार हर साल शीर्ष पदों पर कब्जा जमा लेते हैं, जिससे नए और प्रतिभावान ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के लिए मौके कम हो जाते हैं।

2025 बैच के लिए ‘सनसेट क्लॉज’

आयोग ने पुराने उम्मीदवारों को थोड़ी राहत दी है। CSE 2025 या उससे पहले चयनित अधिकारियों को CSE 2026 या 2027 में एक अंतिम अवसर बिना इस्तीफा दिए मिल सकता है। लेकिन 2028 के बाद, सभी के लिए इस्तीफा देना अनिवार्य हो जाएगा।

डिजिटल सुरक्षा और AI का पहरा

नियमों के अलावा, UPSC ने इस बार AI आधारित फेस ऑथेंटिकेशन और लाइव फोटो कैप्चर को भी अनिवार्य किया है। उम्मीदवारों को आवेदन के समय अपनी हालिया फोटो अपलोड करने के साथ-साथ कैमरे के सामने लाइव फोटो भी खिंचवानी होगी। परीक्षा केंद्रों पर भी आधार आधारित डिजिटल सत्यापन किया जाएगा ताकि फर्जीवाड़े को रोका जा सके।

UPSC postpones Civil Services 2026 notice due to 'administrative reasons' |  Education News - The Indian Express

UPSC के इन नए नियम

UPSC के इन नए नियमों ने स्पष्ट संदेश दे दिया है—अब ‘सुरक्षित’ रहकर रैंक सुधारने का खेल खत्म हो चुका है। अब उम्मीदवारों को पहली बार में ही अपनी पसंदीदा सेवा और कैडर पाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करनी होगी। 24 फरवरी 2026 आवेदन की अंतिम तिथि है, और 24 मई को होने वाली प्रारंभिक परीक्षा इस नई व्यवस्था की पहली अग्निपरीक्षा होगी।

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IAS और IFS अधिकारियों पर पूरी तरह रोक

नए नियमों के अनुसार, जो उम्मीदवार पहले से ही भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) या भारतीय विदेश सेवा (IFS) में नियुक्त हो चुके हैं और सेवा में बने हुए हैं, वे CSE 2026 की परीक्षा में बैठने के पात्र नहीं होंगे।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई उम्मीदवार CSE 2026 की प्रारंभिक परीक्षा पास कर लेता है, लेकिन मुख्य परीक्षा शुरू होने से पहले उसकी नियुक्ति IAS या IFS के रूप में हो जाती है, तो उसे मुख्य परीक्षा (Mains) देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी तरह, यदि मुख्य परीक्षा के दौरान या परिणाम से पहले वह इन सेवाओं को जॉइन कर लेता है, तो उसकी उम्मीदवारी रद्द मानी जाएगी। यदि कोई अधिकारी दोबारा परीक्षा देना चाहता है, तो उसे सेवा से इस्तीफा देना अनिवार्य होगा।

IPS और ग्रुप-A सेवाओं के लिए ‘वन-टाइम इम्प्रूवमेंट’

पुलिस सेवा और अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए नियम थोड़े अलग लेकिन सख्त हैं। जो उम्मीदवार CSE 2026 के माध्यम से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) या केंद्रीय ग्रुप-A सेवाओं के लिए चुने जाते हैं, उन्हें अपनी रैंक सुधारने के लिए केवल एक अतिरिक्त मौका (CSE 2027) मिलेगा।

हालांकि, इसके लिए शर्तें निम्नलिखित हैं:

  1. ट्रेनिंग से छूट: उम्मीदवार को CSE 2026 के आधार पर आवंटित सेवा की ट्रेनिंग में शामिल होने से छूट (Exemption) लेनी होगी। यह छूट केवल एक बार ही मिलेगी।
  2. इस्तीफा अनिवार्य: यदि उम्मीदवार CSE 2027 में भी सफल नहीं हो पाता या मनचाही रैंक नहीं पाता, तो उसे 2028 या उसके बाद की परीक्षाओं में बैठने के लिए अपनी वर्तमान सेवा से इस्तीफा देना होगा।
  3. दोबारा वही सेवा नहीं: यदि कोई पहले से ही IPS है, तो वह परीक्षा तो दे सकता है (अन्य सेवाओं के लिए), लेकिन वह दोबारा IPS सेवा का विकल्प नहीं चुन पाएगा।

बदलाव का मुख्य उद्देश्य

विशेषज्ञों और आयोग के सूत्रों के अनुसार, इन बदलावों के पीछे दो मुख्य कारण हैं:

  • प्रशिक्षण पर होने वाला खर्च: जब कोई अधिकारी चयनित होने के बाद बार-बार परीक्षा देता है, तो वह ट्रेनिंग पर ध्यान नहीं दे पाता और सरकार द्वारा प्रशिक्षण पर खर्च किया गया पैसा और संसाधन बर्बाद होते हैं।
  • अवसरों की समानता: कई बार कुछ मुट्ठी भर लोग ही हर साल शीर्ष पदों पर कब्जा जमा लेते हैं, जिससे नए और प्रतिभावान उम्मीदवारों को मौका नहीं मिल पाता।

2025 तक के चयनित उम्मीदवारों के लिए राहत

आयोग ने पुराने उम्मीदवारों के लिए ‘सनसेट क्लॉज’ रखा है। CSE-2025 या उससे पहले के आधार पर सेवा पाने वाले उम्मीदवारों को CSE-2026 या 2027 में एक बार परीक्षा देने की अनुमति होगी बिना इस्तीफा दिए। लेकिन 2028 से उनके लिए भी इस्तीफा देना अनिवार्य हो जाएगा।

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