हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल IGMC में पिछले तीन दिनों से जारी गतिरोध अब समाप्त हो गया है। रेजिडेंट डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री के इस आश्वासन के बाद कि डॉ. राघव नरूला की बर्खास्तगी (Termination) के आदेश की समीक्षा की जाएगी और पूरे मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच होगी, अपनी हड़ताल वापस ले ली है। रविवार दोपहर से ही अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य होने लगी हैं।

विवाद की जड़: क्या था पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत 22 दिसंबर 2025 को हुई, जब IGMC के पल्मोनरी विभाग में एक वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर, डॉ. राघव नरूला और एक मरीज के बीच तीखी बहस के बाद मारपीट हो गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डॉक्टर को सेवा से बर्खास्त कर दिया था।

डॉक्टरों के संघ (RDA) का तर्क था कि बर्खास्तगी की कार्रवाई एकतरफा और जल्दबाजी में की गई थी। उनका कहना था कि मरीज ने पहले डॉक्टर के साथ बदसलूकी की थी। इसी के विरोध में डॉक्टरों ने पहले सामूहिक अवकाश लिया और फिर शनिवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे।
मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप और समझौता
हड़ताल के कारण प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई थी। रविवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।
- निष्पक्ष जांच: मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि इस घटना की फिर से विस्तृत जांच कराई जाएगी।
- बर्खास्ती पर पुनर्विचार: सरकार ने संकेत दिया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर की बहाली पर सकारात्मक विचार किया जा सकता है।
- सुरक्षा के कड़े इंतजाम: डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर अस्पतालों में सीसीटीवी नेटवर्क मजबूत करने और सुरक्षा गार्डों की तैनाती बढ़ाने का वादा किया गया है।
अस्पताल में सामान्य हुईं सेवाएं
हड़ताल खत्म होने की घोषणा के साथ ही रविवार शाम से ही रेजिडेंट डॉक्टर ड्यूटी पर लौट आए हैं। शनिवार और रविवार सुबह तक ओपीडी (OPD) सेवाएं पूरी तरह बंद रहने के कारण हजारों मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ा था, और कई ऑपरेशन भी टाल दिए गए थे। अब सोमवार से सभी ओपीडी और रूटीन सर्जरी निर्धारित समय पर शुरू हो जाएंगी।
आईजीएमसी शिमला: एकतरफा कार्रवाई के विरोध में डॉक्टरों का आक्रोश
शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) में स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। इस पूरे विवाद की शुरुआत 22 दिसंबर को हुई, जब अस्पताल में एक डॉक्टर और मरीज के बीच तीखी झड़प और मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। घटना की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने तुरंत एक जांच कमेटी गठित की, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर संबंधित डॉक्टर की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त (Terminate) कर दी गईं।
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डॉक्टरों का पक्ष और ‘एकतरफा’ कार्रवाई का आरोप रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) का मुख्य विरोध सरकार की दंडात्मक कार्रवाई के तरीके को लेकर है। डॉक्टरों का आरोप है कि जांच कमेटी की रिपोर्ट में डॉक्टर और मरीज दोनों पक्षों को दोषी पाया गया था, लेकिन सरकार ने केवल डॉक्टर को निशाना बनाया। डॉक्टरों के अनुसार, यह कार्रवाई पूरी तरह से एकतरफा और अन्यायपूर्ण है, क्योंकि इसमें उस उकसावे को नजरअंदाज कर दिया गया जो मरीज की ओर से शुरू हुआ था।
मुख्यमंत्री का आश्वासन बनाम जमीनी हकीकत इस मुद्दे को लेकर डॉक्टरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात की थी। उस समय मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों को शांत करने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, डॉक्टरों में असंतोष तब और बढ़ गया जब मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद डॉक्टर का ‘टर्मिनेशन’ (सेवा समाप्ति) आदेश वापस नहीं लिया गया।
हड़ताल का प्रभाव सरकार के इसी अड़ियल रवैये से नाराज होकर रेजिडेंट डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। डॉक्टरों का स्पष्ट रुख है कि जब तक निष्पक्ष जांच के साथ-साथ डॉक्टर की बहाली नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा। इस गतिरोध के कारण आईजीएमसी में आने वाले दूर-दराज के मरीजों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा, लेकिन अब सरकार के आश्वासन के बाद डॉक्टर काम पर लौट आए है।












