उत्तराखंड के नैनीताल जिले में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारत के सबसे प्रतिष्ठित टाइगर रिजर्व, जिम कॉर्बेट (Jim Corbett), और उससे सटे रामनगर, तराई पश्चिम, तराई केंद्रीय और हल्द्वानी वन प्रभागों सहित पूरे कुमाऊं क्षेत्र में बाघों की आधिकारिक गणना (Tiger Census) का कार्य शुरू हो गया है। यह गणना देश में हर चार साल में होने वाले अखिल भारतीय बाघ आकलन का हिस्सा है, और यह तय करेगी कि भारत का राष्ट्रीय पशु (बाघ) अपने पर्यावासों में कितनी सुरक्षित स्थिति में है।
अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग: कैमरा ट्रैपिंग
इस बार की गणना में वैज्ञानिक पद्धति और उच्च तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि गिनती में अधिकतम सटीकता लाई जा सके।

- फेज-4 विधि: गणना में फेज-4 (Phase-4) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें चार चरणों वाली पारंपरिक गणना विधियों को मिलाकर नवीनतम वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाता है।
- कैमरा ट्रैप (Camera Trapping): पूरे नैनीताल और उससे लगे कुमाऊं क्षेत्र में 600 से अधिक स्वचालित कैमरे लगाए जा रहे हैं। ये कैमरे बाघों के मूवमेंट वाले निश्चित रूटों पर लगाए जाएंगे। बाघ की त्वचा पर धारियों का पैटर्न हर बाघ में अद्वितीय (Unique) होता है। कैमरा इन्हीं धारियों की तस्वीरें लेता है, जिसके विश्लेषण से एक-एक बाघ की पहचान की जाती है और उनकी सही संख्या का आकलन किया जाता है।
- प्रशिक्षण: गणना शुरू करने से पहले, वन विभाग के 100 से अधिक कर्मचारियों और अधिकारियों को भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के मानकों के अनुसार विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
कॉर्बेट के बाहर का क्षेत्र भी फोकस में
यह गणना सिर्फ कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है। नैनीताल वन प्रभाग का यह आकलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तराई और पहाड़ी क्षेत्रों के बीच बाघों के आवागमन का अध्ययन करेगा।

- विस्तृत दायरा: रामनगर, हल्द्वानी, और तराई के वन प्रभागों में भी बाघों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष पर अध्ययन: हाल के वर्षों में नैनीताल के आसपास के क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कॉर्बेट में बाघों की संख्या धारण क्षमता (Carrying Capacity) से अधिक होने के कारण कुछ बाघ भोजन और नए क्षेत्र की तलाश में आबादी वाले इलाकों की ओर पलायन कर रहे हैं। यह गणना इस समस्या के समाधान के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगी।

पिछली गणना और अपेक्षाएँ
अखिल भारतीय बाघ गणना 2022 के परिणामों के अनुसार, उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में देश में सबसे अधिक बाघों (लगभग 260) की मौजूदगी दर्ज की गई थी।
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- सकारात्मक संकेत: रामनगर वन प्रभाग में हुए आंतरिक आकलन में भी सभी कैमरा ट्रैप में बाघों की गतिविधियाँ दर्ज हुई हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है।
- उम्मीदें: वन विभाग को उम्मीद है कि इस बार के अखिल भारतीय आकलन में भी नैनीताल-कुमाऊं क्षेत्र बाघों की संख्या में वृद्धि दर्ज कर एक नया रिकॉर्ड बनाएगा।

बाघों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित बनाए रखने की दिशा में यह जनगणना एक आधारशिला का काम करेगी। गणना का कार्य अगले साल अप्रैल-मई तक कैमरा ट्रैपिंग के साथ पूरा होगा, जिसके बाद NTCA द्वारा अगले वर्ष 29 जुलाई (अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस) को आधिकारिक परिणाम जारी किए जाएंगे।
उत्तराखंड के नैनीताल वन्यजीव प्रभाग (Nainital Forest Division) और जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) से सटे वन क्षेत्रों में अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE) 2025 की प्रक्रिया दिसंबर के मध्य में शुरू हो गई है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के निर्देशानुसार यह गणना ‘फेज-4’ (Phase-4) तकनीक का उपयोग करके की जा रही है, जिसमें कैमरा ट्रैप और पदचिह्नों के वैज्ञानिक विश्लेषण पर जोर दिया जाएगा। इस बार पहाड़ से लेकर तराई तक के क्षेत्रों में बाघों के वितरण और संख्या का विस्तृत रिकॉर्ड रखा जाएगा।













