भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग की सबसे प्रतिष्ठित और सम्मानित अभिनेत्रियों में से एक, कामिनी कौशल का 98 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनका निधन शुक्रवार, 14 नवंबर 2025 की देर रात मुंबई स्थित उनके आवास पर हुआ। उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उनका निधन हुआ। उनके निधन से बॉलीवुड जगत में शोक की लहर दौड़ गई है, और कई फिल्मी हस्तियों तथा प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।
कामिनी कौशल, जिनका असली नाम उमा कश्यप था, ने 1946 में चेतन आनंद की क्लासिक फिल्म ‘नीचा नगर’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। यह फिल्म इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि यह कान फिल्म समारोह (Cannes Film Festival) में पाल्मे डी’ओर (Palme d’Or) जीतने वाली पहली भारतीय फिल्म थी।
सात दशकों से भी अधिक लंबे अपने शानदार करियर में, कामिनी कौशल ने दिलीप कुमार, देव आनंद, और राज कपूर जैसे महान अभिनेताओं के साथ काम किया। वह अपनी सादगी, कोमलता और दमदार अभिनय के लिए जानी जाती थीं। 1940 के दशक में वह हिंदी सिनेमा की सबसे अधिक फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में से एक थीं।
उन्होंने ‘शहीद’, ‘नदिया के पार’, ‘जिद्दी’, ‘शबनम’, ‘बिराज बहू’ और ‘आरजू’ जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया। 1960 के दशक के मध्य में उन्होंने चरित्र भूमिकाएं (कैरेक्टर रोल्स) निभानी शुरू कर दी थीं, और अपनी अंतिम फिल्मों तक सक्रिय रहीं। युवा पीढ़ी ने उन्हें शाहिद कपूर की फिल्म ‘कबीर सिंह’ (2019) में उनकी दादी के किरदार में और आमिर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ (2022) में उनके अंतिम कैमियो रोल में देखा था।
हिंदी सिनेमा में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें 2015 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। उनका निजी जीवन भी काफी चर्चा में रहा, जब उन्होंने अपनी दिवंगत बड़ी बहन के बच्चों की देखभाल के लिए अपने जीजा से शादी की थी। वह अपने पीछे तीन बेटे और एक विशाल सिनेमाई विरासत छोड़ गई हैं।












