Chardham Yatra CM Dhami News: उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस साल अपने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ती हुई नजर आ रही है। तीर्थयात्रियों के इस अभूतपूर्व उत्साह और रिकॉर्ड तोड़ भीड़ को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री ने शासन और प्रशासन के आला अधिकारियों को दोटूक शब्दों में निर्देश दिए हैं कि यात्रा की व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को हर दिन यात्रा मार्ग की व्यवस्थाओं, बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा इंतजामों की रोजाना समीक्षा करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
इस वर्ष चारधाम यात्रा को लेकर देश-विदेश के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 के शुरुआती दौर के मुकाबले इस साल इसी अवधि में लगभग 15 प्रतिशत अधिक श्रद्धालु देवभूमि के चारों धामों—बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री पहुंच चुके हैं। यात्रा के पहले ही महीने में करीब साढ़े बीस लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं और यह सिलसिला लगातार बढ़ता ही जा रहा है। श्रद्धालुओं के इस भारी जनसैलाब के कारण पहाड़ी मार्गों और धामों पर लॉजिस्टिक दबाव, यातायात प्रबंधन और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर चुनौतियां काफी बढ़ गई हैं, जिसके चलते मुख्यमंत्री को स्वयं कमान संभालनी पड़ी है।
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने “सुरक्षित तीर्थयात्रा, सुगम दर्शन और निरंतर संचार” का मूल मंत्र देते हुए अधिकारियों को काम करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि यात्रा अब अपने दूसरे और सबसे चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है, जहां जल्द ही मानसून की दस्तक और खराब मौसम जैसी प्राकृतिक बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आदेश दिया है कि चारधाम यात्रा मार्गों पर रात दस बजे से लेकर तड़के चार बजे तक वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। उन्होंने कहा कि रात के समय पहाड़ी रास्तों पर सफर करना जोखिम भरा होता है, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर इस नियम का कड़ाई से पालन कराया जाए।

श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रत्येक धाम की वहन क्षमता के अनुसार दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी एसओपी तैयार करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि किसी धाम या मुख्य पड़ाव पर क्षमता से अधिक भीड़ होती है, तो ऋषिकेश, हरिद्वार और निचले होल्डिंग एरिया में ही वाहनों और श्रद्धालुओं को चरणबद्ध तरीके से रोका जाए। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि जब भी श्रद्धालुओं को कहीं रोका जाए, तो उन्हें रोके जाने के सही कारण, संभावित प्रतीक्षा समय और वहां की जा रही व्यवस्थाओं के बारे में लगातार जागरूक किया जाए ताकि यात्रियों में किसी प्रकार का भ्रम या असंतोष पैदा न हो।
इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पुलिस, प्रशासन और तीर्थ प्रबंधन विभाग के सभी कर्मचारियों को तीर्थयात्रियों के साथ अत्यंत विनम्र, संवेदनशील और सहयोगात्मक व्यवहार करने की नसीहत दी। उन्होंने यात्रा मार्गों पर संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों में जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, एम्बुलेंस और सैटेलाइट फोन की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति या मार्ग अवरुद्ध होने पर रिस्पॉन्स टाइम को न्यूनतम किया जा सके। साथ ही, उन्होंने होटलों, रेस्टोरेंटों और ढाबों पर खाने-पीने की चीजों की रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से चस्पा करने और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की नियमित जांच करने की जिम्मेदारी गढ़वाल कमिश्नर और संबंधित जिलाधिकारियों को सौंपी है।








