ताजा खबरें क्राइम लाइफस्टाइल मौसम खेल बॉलीवुड हॉलीवुड जॉब - एजुकेशन स्वास्थ्य राज्य देश विदेश राशिफल लाइफ - साइंस धर्म अन्य

---Advertisement---

Dhal Singh Bisen Oath Ceremony: उत्तराखंड के नए राज्यपाल बने ढाल सिंह बिसेन

On: October 19, 2026 6:21 AM
Follow Us:
Dhal Singh Bisen Oath Ceremony: उत्तराखंड के नए राज्यपाल बने ढाल सिंह बिसेन
---Advertisement---

Dhal Singh Bisen Oath Ceremony News: राजधानी देहरादून स्थित गरिमामय लोक भवन में आयोजित एक भव्य और ऐतिहासिक समारोह के दौरान डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने राज्य के नवनियुक्त राज्यपाल के रूप में अपने पद और गोपनीयता की शपथ ली। यह आयोजन केवल एक औपचारिक सत्तांतरण अथवा प्रशासनिक प्रक्रिया का निर्वहन मात्र नहीं था, बल्कि यह सीमांत पर्वतीय राज्य की अस्मिता, संस्कृति, परंपरा और भावी विकास के संकल्पों का एक महत्वपूर्ण संगम बनकर सामने आया। जब संवैधानिक दायित्वों की डोर एक अनुभवी, संवेदनशील और जनसरोकारों से जुड़े व्यक्तित्व के हाथों में सौंपी जाती है, तो राज्य की जनता की अपेक्षाएं और व्यवस्था का भरोसा स्वाभाविक रूप से और अधिक सुदृढ़ हो जाता है।

image 94
Photo- X Dhal Singh Bisen Oath Ceremony: उत्तराखंड के नए राज्यपाल बने ढाल सिंह बिसेन

शपथ ग्रहण समारोह की भव्यता और उसकी गंभीरता इस बात से स्पष्ट परिलक्षित हो रही थी कि इसमें शासन, प्रशासन, धर्म, संस्कृति और समाज के हर प्रमुख वर्ग का प्रतिनिधित्व मौजूद था। समारोह स्थल पर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने नवनियुक्त राज्यपाल का देवभूमि की जनता की ओर से आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री की उपस्थिति यह संदेश दे रही थी कि विधायिका और कार्यपालिका के शीर्ष नेतृत्व के बीच बेहतर सामंजस्य से ही राज्य में जनकल्याणकारी नीतियों को धरातल पर उतारा जा सकता है। इसके अलावा मंच और दर्शक दीर्घा में उत्तराखंड सरकार के लगभग सभी कैबिनेट मंत्री मौजूद रहे, जिनमें वरिष्ठ राजनेता सतपाल महाराज और डॉ. धन सिंह रावत प्रमुख थे। आध्यात्मिक जगत की ओर से योग गुरु बाबा रामदेव तथा परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि महाराज की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को एक अलौकिक और सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की। समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय माता मंगला की मौजूदगी ने यह रेखांकित किया कि राज्य के विकास में केवल राजनीतिक तंत्र ही नहीं, बल्कि सेवाभावी संस्थाओं का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। शासन-प्रशासन के शीर्ष अधिकारी, पुलिस महानिदेशक, सैन्य बलों के उच्चाधिकारी और न्यायिक जगत की विभूतियों की उपस्थिति ने इस समारोह को अत्यंत ऐतिहासिक बना दिया।

संवैधानिक दायित्व ग्रहण करने के उपरांत अपने पहले संबोधन में नवनियुक्त राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने जिस विनम्रता और स्पष्ट दृष्टि के साथ अपनी बात रखी, उसने उपस्थित जनसमूह और राज्यवासियों के दिलों को गहराई से छुआ। उन्होंने सबसे पहले देश के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की सेवा करने का अवसर प्राप्त होना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य और पुनीत दायित्व है। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि उत्तराखंड को केवल एक सामान्य भौगोलिक भूभाग या प्रशासनिक राज्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह भूमि भारत की सांस्कृतिक चेतना का मुकुटमणि है, जहां युगों-युगों से तपस्वियों, संतों और विचारकों ने मानवता को दिशा दी है। यह गंगा और यमुना जैसी पवित्र जीवनदायिनी नदियों का उद्गम स्थल है, जिसने सदियों से समूचे राष्ट्र का पोषण किया है।

राज्यपाल ने उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान को रेखांकित करते हुए कहा कि यह भूभाग बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे चार पवित्र धामों का आश्रय स्थल है। इसके साथ-साथ आदि कैलाश, ओंकारेश्वर और जागेश्वर धाम जैसे दिव्य तीर्थ स्थल इस राज्य को विश्व के आध्यात्मिक मानचित्र पर सर्वोपरि स्थापित करते हैं। उनका मानना था कि इन पावन धामों का संरक्षण और संवर्धन केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह हमारे नैतिक मूल्यों, पर्यावरण और राष्ट्रीय एकता की आधारशिला भी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राज्य के धार्मिक पर्यटन को आधुनिक सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन के साथ आगे बढ़ाना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी इस अमूल्य धरोहर पर गर्व कर सकें।

अपने उद्बोधन में राज्यपाल ने उत्तराखंड की एक और अद्वितीय पहचान पर गहरा प्रकाश डाला, जो है इसकी वीरभूमि के रूप में ख्याति। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उत्तराखंड केवल संतों की तपस्थली ही नहीं, बल्कि राष्ट्ररक्षकों की पावन जन्मभूमि भी है। यहां का शायद ही कोई ऐसा गांव या परिवार होगा, जिसका कम से कम एक सदस्य देश की सीमाओं की रक्षा के लिए भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों या सुरक्षा तंत्र में अपनी सेवाएं न दे रहा हो। प्रथम विक्टोरिया क्रॉस विजेता दरबान सिंह नेगी और गबर सिंह नेगी से लेकर कारगिल युद्ध और आधुनिक समय के अनगिनत वीर बलिदानियों की इस धरती ने हमेशा मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है। राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण, पुनर्वास और सम्मान की रक्षा करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और सामाजिक संरचना की चर्चा करते हुए डॉ. बिसेन ने उत्तराखंड की मातृशक्ति के असाधारण योगदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं यहां की रीढ़ हैं। विषम भौगोलिक परिस्थितियों, कड़ाके की ठंड और सीमित संसाधनों के बावजूद जिस तरह यहां की महिलाएं घर-परिवार, कृषि, पशुपालन और समाज को संभालती हैं, वह पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। राज्य आंदोलन के इतिहास से लेकर आज के आत्मनिर्भर भारत के निर्माण तक, महिलाओं का संघर्ष और उनकी कर्मठता अद्वितीय रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राजभवन के स्तर से महिला सशक्तिकरण, स्वयं सहायता समूहों के विस्तार, ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य और उनकी आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में चलने वाले अभियानों को हर संभव प्रोत्साहन दिया जाएगा।

राज्यपाल ने राज्य के मेहनती युवाओं, किसानों और श्रमिकों के पुरुषार्थ की भी मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का समाज स्वाभाविक रूप से कर्मठ, शांतिप्रिय और जुझारू है। यही कारण है कि तमाम प्राकृतिक आपदाओं और दुर्गम चुनौतियों के बावजूद राज्य लगातार प्रगति के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि एक संवैधानिक प्रमुख के रूप में उनका यह कर्तव्य होगा कि वे राज्य के नौजवानों को आधुनिक शिक्षा, तकनीकी कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर दिलाने के लिए सरकार के साथ निरंतर विचार-विमर्श करें। उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध की गुणवत्ता को बढ़ाना, विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक सत्रों को नियमित करना और कौशल विकास को बढ़ावा देना उनके विजन का अभिन्न अंग रहेगा ताकि पर्वतीय क्षेत्रों से होने वाले पलायन की गंभीर समस्या का समाधान निकाला जा सके।

स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को राज्य के अंतिम छोर तक ले जाने पर चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सीमांत और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना समय की सबसे बड़ी मांग है। टेलीमेडिसिन, मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के सुदृढ़ीकरण से ही दूरदराज के ग्रामीणों को समय पर उपचार मिल सकता है। उन्होंने जन कल्याण को शासन का मूल मंत्र बताते हुए कहा कि नीति निर्माण में सबसे वंचित और गरीब व्यक्ति के हितों को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसकी निगरानी और मार्गदर्शन में राजभवन अपनी रचनात्मक भूमिका का निर्वहन करेगा।

पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के संवेदनशील मुद्दे पर डॉ. बिसेन ने अत्यंत संतुलित विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक संपदा, घने वनों, दुर्लभ जड़ी-बूटियों और जैव विविधता का अनूठा भंडार है। विकास की दौड़ में प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ना आत्मघाती सिद्ध हो सकता है। भूस्खलन, वनाग्नि और मौसमी बदलावों से निपटने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्थानीय ज्ञान के समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने ईको-टूरिज्म, जैविक कृषि, बागवानी और जल संरक्षण की पारंपरिक प्रणालियों को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया। उनका मानना था कि पर्यावरण की रक्षा करते हुए ही हम भावी पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध और सुरक्षित उत्तराखंड छोड़ सकते हैं।

राज्यपाल के रूप में अपने संवैधानिक कर्तव्यों की मर्यादा को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि उनका प्राथमिक उद्देश्य भारतीय संविधान के उदात्त मूल्यों को अक्षुण्ण बनाए रखना और राजभवन की गरिमा को सर्वोच्च स्तर पर स्थापित करना होगा। वे राज्य सरकार के एक मार्गदर्शक, सहयोगी और निष्पक्ष संरक्षक के रूप में कार्य करेंगे। लोकतंत्र की मजबूती विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंधों पर टिकी होती है, और राज्यपाल का पद इन सभी अंगों के बीच संतुलन साधने का एक सेतु है। उन्होंने कहा कि जब शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और संवेदनशीलता होती है, तब जनता का लोकतंत्र पर विश्वास गहरा होता है।

इस शपथ ग्रहण के साथ ही उत्तराखंड के प्रशासनिक इतिहास में एक नए युग का सूत्रपात माना जा रहा है। नवनियुक्त राज्यपाल की जनोन्मुखी सोच, सादगी और राज्य के सर्वांगीण विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने समूचे प्रदेश में एक नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी कैबिनेट ने भी राज्यपाल के मार्गदर्शन में देवभूमि को विकास के शिखर पर ले जाने और जन कल्याणकारी संकल्पों को पूरी निष्ठा से सिद्ध करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। देवभूमि के पावन मंदिरों, वीर सपूतों की चौकियों, सशक्त मातृशक्ति और कर्मठ युवाओं की यह पावन धरती अब शांति, सुरक्षा और समृद्धि के एक नए स्वर्णिम पथ पर आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तत्पर दिखाई दे रही है।

Rishikesh News: देहरादून और मसूरी के बाद ऋषिकेश पहुंचे अक्षय कुमार और राशि खन्ना

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

राष्ट्रपति के उत्तराखंड दौरे 2026 की तैयारियों की समीक्षा करते देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान

राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे को लेकर जिलाधिकारी देहरादून आशीष चौहान ने की तैयारियों की समीक्षा, अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

देहरादून के विनबर्ग एलन स्कूल में सुरक्षित बचपन जागरूकता अभियान के तहत विद्यार्थियों को बाल अधिकारों और POCSO एक्ट की जानकारी देते न्यायिक अधिकारी

नालसा के ‘सुरक्षित बचपन जागरूकता अभियान’ के तहत देहरादून में व्यापक पहल, न्यायिक अधिकारियों ने विभिन्न विद्यालयों में बच्चों को किया जागरूक

गैरसैंण विधानसभा सत्र में उत्तराखंड अनुपूरक बजट 2026-27 और विकास योजनाओं पर जानकारी देते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

गैरसैंण सत्र में 7,844 करोड़ का अनुपूरक बजट, विकास कार्यों और जनसुविधाओं पर फोकस

m-pushkar-singh-dhami-tribute-bc-khanduri

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

Uttarakhand Assembly Session 2026: उत्तराखंड के गैरसैंण विधानसभा का सत्र आस से शुरू

Uttarakhand Assembly Session 2026: उत्तराखंड के गैरसैंण विधानसभा का सत्र आज से शुरू

Uttarakhand News: मुख्यमंत्री ने रुद्रप्रयाग में पुल-सुरंग परियोजना और संगम लाइब्रेरी का किया अवलोकन

Uttarakhand News: मुख्यमंत्री ने रुद्रप्रयाग में पुल-सुरंग परियोजना और संगम लाइब्रेरी का किया अवलोकन

Leave a Comment